तो अब सीजेपी से बड़े आंदोलन की तैयारी… सड़क पर बैठकर सरकार चलाने की बारी… कौशल किशोर चतुर्वेदी

तो अब सीजेपी से बड़े आंदोलन की तैयारी… सड़क पर बैठकर सरकार चलाने की बारी…
आजकल सीक्वल फिल्म्स का जमाना है। धुरंधर-वन फिल्म की अपार सफलता के बाद इसकी सीक्वल फिल्म धुरंधर-टू और भी ज्यादा हिट रही।
सीक्वल फिल्म एक ऐसी फिल्म होती है जो किसी पिछली फिल्म की कहानी, पात्रों या दुनिया को आगे बढ़ाती है। जैसे रैड 2, जॉली एलएलबी थ्री और सन ऑफ़ सरदार 2 आदि। भारत में अब कुछ इसी तरह का सिलसिला आंदोलनों को लेकर चलने वाला है। सीजेपी की अपार सफलता के बाद अब ‘ ई-20 जनता पार्टी’ मैदान में आने को तैयार हो चुकी है। और यह सिलसिला यहीं थमने वाला नहीं है, बल्कि समानांतर रूप से सोशल मीडिया पर रिजर्वेशन हटाओ आंदोलन भी छाने को तैयार है। तो अब भारत की सरकार संसद की जगह सड़कों पर होने वाले आंदोलनों से नियंत्रित होगी, सीजेपी की अपार सफलता के बाद कुछ ऐसा ही संकेत मिल रहा है। और जिस तरह का इशारा करके सीजेपी विदा हुई थी कि अभी तो यह शुरुआत है और अभी पहला विकेट गिरा है, लगता है अब दूसरा विकेट गिराने की तैयारी शुरू हो चुकी है। खास बात यह भी है कि हो सकता है इन अलग-अलग आंदोलनों में किरदार भी अलग-अलग दिखाई दें। और मूल कहानी का विस्तार साफ-साफ नजर आए। साथ ही, विपक्ष भी पहले से हर आंदोलन के बाद और ज्यादा मजबूत नजर आने वाला है। देखना यह है कि सरकार ने सीजेपी की सफलता के बाद आगे क्या तैयारी कर रखी है।
तो पहली मुख्य खबर यह है कि सीजेपी की तर्ज पर अब ‘ ई-20 जनता पार्टी’ मैदान में है, पेट्रोल में एथनॉल मिलाने के विरोध में यह नया संगठन अब मोदी सरकार को चुनौती देने के लिए तैयार है। ‘ई-20 जनता पार्टी’ ने पेट्रोल में एथनॉल मिश्रण का विरोध किया है।
इस संगठन ने शुद्ध पेट्रोल का विकल्प और नितिन गडकरी का इस्तीफा मांगा है। ट्रांसपोर्ट यूनियनों ने 4 अगस्त को संसद मार्च की घोषणा की है। नीट पेपर लीक के खिलाफ ‘कॉकरोच जनता पार्टी के असरदार विरोध प्रदर्शन के बाद अब देश में इस नए संगठन की एंट्री ने मोदी सरकार के सामने नई चुनौती पेश कर दी है। यूनियन का आरोप है कि पेट्रोल में एथनॉल मिलाने की वजह से गाड़ियों का माइलेज कम हो गया है। गाड़ियों की देखभाल का खर्च बढ़ गया है और खासकर पुरानी गाड़ियों के इंजन की परफॉर्मेंस पर बुरा असर पड़ रहा है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर कुछ ही घंटों में 25000 से ज्यादा फॉलोअर्स पाने वाली इस पार्टी ने स्पष्ट किया है कि वे किसी तरह की सब्सिडी, मुफ्त ईंधन या एथनॉल-ब्लेंडेड पेट्रोल को पूरी तरह बंद करने की मांग नहीं कर रहे हैं। इस नए संगठन ने अपनी मांग में ग्राहक को आजादी पर जोर दिया है। पेट्रोलियम राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने पिछले हफ्ते संसद में बताया था कि सरकार को एथनॉल-युक्त पेट्रोल से गाड़ियों के प्रदर्शन पर पड़ने वाले असर को लेकर कोई भी व्यापक या पुख्ता शिकायतें नहीं मिली हैं।

तो सीजेपी आंदोलन के खत्म होने के बाद सोशल मीडिया पर ‘रिजर्वेशन हटाओ आंदोलन’ तेजी से चर्चा में आ गया है। इस अभियान ने महज पांच दिनों में इंस्टाग्राम पर 46 लाख फॉलोअर्स जुटाने का दावा किया। रिजर्वेशन हटाओ आंदोलन (आरएचए) अभियान खुद को नागरिकों द्वारा चलाया गया आंदोलन बताता है और कहता है कि उसका किसी भी राजनीतिक दल से कोई संबंध नहीं है। यह पूरा अभियान सोशल मीडिया के जरिए आरक्षण व्यवस्था में बदलाव की मांग को लेकर चलाया जा रहा है और इसी वजह से चर्चा में है। इस समूह का इंस्टाग्राम अकाउंट रिजर्वेशन हटाओ मूवमेंट नाम से चल रहा। यह केवल भारतीय सेना के आधिकारिक अकाउंट को फॉलो करता है। समूह के प्रोफाइल में लिखा है कि यह उन नागरिकों का अभियान है, जो मानते हैं कि सुधार की आवाज उठनी चाहिए। इसके साथ ही प्रोफाइल में डॉ. भीमराव आंबेडकर के प्रसिद्ध नारे ‘एजुकेट-एजिटेट-ऑर्गेनाइज’ का इस्तेमाल किया गया है। हिंदी में लिखा गया है कि ‘सारी जाति एक समान, मेरा बस ये देश महान।’ अंत में ‘जय हिंद’ लिखा गया। समूह ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा है कि यदि सरकार का उद्देश्य जाति आधारित भेदभाव खत्म करना है, तो सार्वजनिक जीवन में जाति की पहचान का इस्तेमाल बंद किया जाना चाहिए। समूह का कहना है कि व्यक्ति की पहचान जाट-गुर्जर या एससी-एसटी जैसे जातीय आधार पर नहीं होनी चाहिए। उसने सार्वजनिक रूप से जाति प्रदर्शित करने को अवैध घोषित करने की मांग की। इसके साथ ही सरकारी फॉर्म, शैक्षणिक संस्थानों में प्रवेश, नौकरी के आवेदन और अन्य सार्वजनिक प्रक्रियाओं में जाति का उल्लेख अनिवार्य नहीं होना चाहिए।
समूह ने अपने दीर्घकालिक लक्ष्य को “वन नेशन, वन आइडेंटिटी, इंडियन” बताया है और नारा दिया है कि आरक्षण हटाओ जाति हटाओ।

और सबसे मजेदार बात यह है कि सुप्रीम कोर्ट के हालिया निर्देशों से यह दोनों ही आंदोलन संजीवनी पाते नजर आ रहे हैं। भारत के चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अगुवाई वाली बेंच ने 27 जुलाई 2026 को परीक्षा पेपर लीक के विरोध में देशभर में छात्रों के प्रदर्शनों के दौरान कथित पुलिस ज्यादती से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए कहा कि शांतिपूर्ण और कानून के दायरे में प्रदर्शन करना संवैधानिक अधिकार है और केवल प्रदर्शन होने के कारण लाठीचार्ज नहीं किया जा सकता। अदालत ने कहा कि यदि पुलिस द्वारा अत्यधिक बल प्रयोग हुआ है तो उसकी स्वतंत्र जांच होनी चाहिए। साथ ही देशभर में प्रदर्शनों से निपटने के लिए एक समान पुलिस प्रोटोकॉल की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
तो नीट पेपर लीक मामले में धर्मेन्द्र प्रधान का इस्तीफा और मोदी सरकार की किरकिरी होने के बाद जीत मनाती विदा हुई कॉकरोज जनता पार्टी ने मोदी सरकार के सामने चुनौतियों की नई श्रृंखला तैयार कर दी है। देखने वाली बात यही है कि मोदी सरकार अब आने वाली इन चुनौतियों से कैसे निपटती है या फिर सरकार के विकेट गिरने का सिलसिला जारी रहता है। मूल बात यही है कि अब सीजेपी से बड़े आंदोलन की तैयारी हो चुकी है… ऐसा समझा जा सकता है कि सड़क पर बैठकर सरकार चलाने की बारी अब इन आंदोलनों की है… वहीं सीजेपी की चुनौती अभी खत्म नहीं हुई है।

कौशल किशोर चतुर्वेदी

कौशल किशोर चतुर्वेदी मध्यप्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार हैं। प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में पिछले ढ़ाई दशक से सक्रिय हैं। पांच पुस्तकों व्यंग्य संग्रह “मोटे पतरे सबई तो बिकाऊ हैं”, पुस्तक “द बिगेस्ट अचीवर शिवराज”, ” सबका कमल” और काव्य संग्रह “जीवन राग” के लेखक हैं। वहीं काव्य संग्रह “अष्टछाप के अर्वाचीन कवि” में एक कवि के रूप में शामिल हैं। इन्होंने स्तंभकार के बतौर अपनी विशेष पहचान बनाई है।वर्तमान में भोपाल और इंदौर से प्रकाशित दैनिक समाचार पत्र “एलएन स्टार” में कार्यकारी संपादक हैं। इससे पहले इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में एसीएन भारत न्यूज चैनल में स्टेट हेड, स्वराज एक्सप्रेस नेशनल न्यूज चैनल में मध्यप्रदेश‌ संवाददाता, ईटीवी मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ में संवाददाता रह चुके हैं। प्रिंट मीडिया में दैनिक समाचार पत्र राजस्थान पत्रिका में राजनैतिक एवं प्रशासनिक संवाददाता, भास्कर में प्रशासनिक संवाददाता, दैनिक जागरण में संवाददाता, लोकमत समाचार में इंदौर ब्यूरो चीफ दायित्वों का निर्वहन कर चुके हैं। नई दुनिया, नवभारत, चौथा संसार सहित अन्य अखबारों के लिए स्वतंत्र पत्रकार के तौर पर कार्य कर चुके हैं