
देश के सभी बड़े नगरों में लागू होना चाहिए ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान-3…
दिल्ली में वायु प्रदूषण पर सुप्रीम कोर्ट ने तंज कसा है कि ‘उम्मीद है कि आप मौसम का आनंद ले रहे होंगे’। सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण से जुड़े स्वतः संज्ञान मामले की सुनवाई की, जहां सीजेआई ने मौसम का आनंद लेने पर तंज कसा। शायद ऐसे तंज हर राज्य की राजधानियों पर कसे जायेंगे, यदि हम समय पर नहीं चेते। दीपावली की रात और उसके बाद सभी राज्यों की राजधानी और बड़े शहरों का जिक्र खबरों में सिर्फ और सिर्फ वायु प्रदूषण को लेकर होने वाला है। मरीजों की संख्या में भी बड़ा इजाफा होने वाला है। यह कोई पहली बार नहीं बल्कि हर साल का ही ट्रेंड है। लेकिन हम हमेशा की तरह लापरवाही और गैर जिम्मेदाराना व्यवहार करते रहे हैं और शायद करते रहेंगे। वायु प्रदूषण को लेकर मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल का हाल भी बहुत अच्छा नहीं है। और दीपावली के बाद स्थितियां यहां भी भयावह ही होंगी। दिल और अस्थमा के मरीजों के लिए तो यही अच्छा है कि वह ऐसे समय में गांवों की तरफ कदम बढ़ा दें।
दिल्ली में प्रदूषण तेजी से बढ़ रहा है और कई इलाकों में एक्यूआई का लेवल 450 के पार चला गया है, जो बेहद गंभीर श्रेणी में आता है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि दिवाली मनाने के साथ-साथ प्रदूषण के प्रति जागरूकता बढ़ाना भी जरूरी है। कोर्ट ने कहा कि सिर्फ पाबंदियां लगाने से समस्या हल नहीं होगी, बल्कि इससे नियमों के उल्लंघन के मामले और बढ़ सकते हैं। बेंच ने कहा कि त्योहारों के दौरान हमें अपनी पुरानी परंपराओं और रीति-रिवाजों पर फिर से गौर करने की जरूरत है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने सवाल किया, “हम अपनी पुरानी परंपराओं की ओर क्यों नहीं लौटते?” उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि त्योहार मनाते समय पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी का अहसास भी होना चाहिए।
न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची ने टिप्पणी की कि यह मुद्दा त्योहारों के व्यावसायीकरण से भी जुड़ा हुआ है। ये बातें दिवाली के आसपास बढ़ते प्रदूषण पर चर्चा के दौरान सामने आईं। केंद्र सरकार के वकील ने बताया कि त्योहार और सड़कों पर लोगों की आवाजाही के कारण प्रदूषण का स्तर और बढ़ गया है।
कोर्ट ने कहा, “कोई भी पाबंदी काम नहीं आएगी। हम जितने ज्यादा आदेश जारी करेंगे, नियमों के उल्लंघन के मामले उतने ही बढ़ेंगे।” कोर्ट ने लोगों के व्यवहार में बदलाव लाने और प्रदूषण के प्रति जागरूकता बढ़ाने की जरूरत पर जोर दिया।
मुख्य न्यायाधीश ने प्रदूषण संकट के लिए आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को जिम्मेदार ठहराने के खिलाफ भी आगाह किया। उन्होंने कहा कि दिवाली का समय उन लोगों के लिए बहुत महत्वपूर्ण होता है, जिनकी आजीविका मौसमी काम और त्योहारों पर निर्भर है।
मुख्य न्यायाधीश ने टिप्पणी की, “गरीब लोग प्रदूषण नहीं फैलाते। बल्कि, वे खुद इसके शिकार होते हैं। प्रदूषण तो वे लोग फैलाते हैं जो इसका खर्च उठा सकते हैं और जो इसमें योगदान देते हैं।”
वास्तव में, सुप्रीम कोर्ट की हर बात सौ फीसदी सही है। प्रदूषण फैलाने का काम वही कर रहे हैं, जिनके पास जरूरत से ज्यादा धन है और
वह पर्यावरण की चिंता किये बगैर प्रदूषण फैलाने में मनमानी करते हैं।
दिल्ली-एनसीआर में अब ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान-3 (ग्रेप-3) की पाबंदियां लागू कर दी गई हैं। एयर पॉल्यूशन रोकने के लिए कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट (सीएक्यूएम) ने बड़ा कदम उठाया है। राजधानी के कई इलाकों में एक्यूआई 400 के पार भी दर्ज किया गया।
ग्रेप-3 लागू होने पर दिल्ली-एनसीआर में पॉल्यूशन फैलाने वाली गतिविधियों पर सख्ती की जाती है। इसके तहत 9 पॉइंट का एक्शन प्लान तैयार किया गया था। इसमें धूल फैलाने वाले निर्माण कार्यों, स्टोन क्रशर और खनन पर रोक शामिल है। दिल्ली समेत गुरुग्राम, फरीदाबाद, गाजियाबाद और गौतम बुद्ध नगर में बीएस-3 पेट्रोल और बीएस-4 डीजल की चार पहिया गाड़ियों पर प्रतिबंध का प्रावधान है। पांचवीं तक की कक्षाओं के लिए हाइब्रिड पढ़ाई और सरकारी दफ्तरों में 50 फीसदी कर्मचारियों के वर्क फ्रॉम होम पर भी निर्देश दिए गए हैं।
तो यदि हमें प्रदूषण से बचना है, तो सबसे पहले स्वयं में बदलाव लाना होगा। जागरुकता के साथ सावधानी के उपाय बरतने होंगे। और स्वघोषित तौर पर ग्रेप-3 का अनिवार्य रूप से पालन करना होगा। यदि हमने पूर्ण मन से समाज और राष्ट्र के हित में
पर्यावरण के लिए।
खुद को तैयार कर लिया तो न केवल वर्तमान सुधरेगा, बल्कि भविष्य भी खराब होने से बच जाएगा। वास्तव में, सरकार पर आश्रित न होकर, हम सभी को देश के सभी बड़े नगरों में ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान-3 लागू कर देना चाहिए … ताकि हमारे परिवार सेहतमंद रहें और हमारे प्राकृतिक संसाधनों को भी नया और सेहतमंद जीवन मिले। इसी में दीप पर्व की सही महत्ता है। प्रदूषण मुक्त त्योहार ही जीवन का वास्तविक आधार है। तो आइए हम सब मिलकर संकल्प लें कि बिना ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान-3 (ग्रेप-3) के हम अपने शहर को प्रदूषण मुक्त बनाकर रखेंगे… वरना वरना हम सभी के जीवन में दिल्ली की तरह प्रदूषण भरा वह दिन आने वाला है जब कोर्ट तंज कसेगा कि मौसम का आनंद लीजिए।

कौशल किशोर चतुर्वेदी
कौशल किशोर चतुर्वेदी मध्यप्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार हैं। प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में पिछले ढ़ाई दशक से सक्रिय हैं। पांच पुस्तकों व्यंग्य संग्रह “मोटे पतरे सबई तो बिकाऊ हैं”, पुस्तक “द बिगेस्ट अचीवर शिवराज”, ” सबका कमल” और काव्य संग्रह “जीवन राग” के लेखक हैं। वहीं काव्य संग्रह “अष्टछाप के अर्वाचीन कवि” में एक कवि के रूप में शामिल हैं। इन्होंने स्तंभकार के बतौर अपनी विशेष पहचान बनाई है।वर्तमान में भोपाल और इंदौर से प्रकाशित दैनिक समाचार पत्र “एलएन स्टार” में कार्यकारी संपादक हैं। इससे पहले इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में एसीएन भारत न्यूज चैनल में स्टेट हेड, स्वराज एक्सप्रेस नेशनल न्यूज चैनल में मध्यप्रदेश संवाददाता, ईटीवी मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ में संवाददाता रह चुके हैं। प्रिंट मीडिया में दैनिक समाचार पत्र राजस्थान पत्रिका में राजनैतिक एवं प्रशासनिक संवाददाता, भास्कर में प्रशासनिक संवाददाता, दैनिक जागरण में संवाददाता, लोकमत समाचार में इंदौर ब्यूरो चीफ दायित्वों का निर्वहन कर चुके हैं। नई दुनिया, नवभारत, चौथा संसार सहित अन्य अखबारों के लिए स्वतंत्र पत्रकार के तौर पर कार्य कर चुके हैं।