कामकाज में लोकसभा फेल और राज्यसभा थर्ड डिविजन विद ग्रेस… सत्रों के यही रह गए मायने… कौशल किशोर चतुर्वेदी

कामकाज में लोकसभा फेल और राज्यसभा थर्ड डिविजन विद ग्रेस… सत्रों के यही रह गए मायने…
लोकतंत्र और संविधान की चिंता में लगा भारत शायद अब सत्रों को लेकर गंभीरता का दिखावा भी नहीं करना चाहता। 13 अगस्त 2026 की संसदीय खबर यही है कि विपक्ष का हंगामा, संसद ठप! लोकसभा में 19%, राज्यसभा में 39% काम के साथ मानसून सत्र खत्म। यानि कि फेल-पास का गणित लगाया जाए तो
कामकाज के मामले में लोक सभा पूरी तरह से फेल हो गई है और राज्यसभा थर्ड डिवीज़न पास मानी जा सकती है लेकिन इसमें भी ग्रेस अंक के साथ ही
एक या एक से अधिक विषयों में पास की सूरत बन रही है। और अगर
यह मार्कशीट लेकर कोई छात्र पुराने जमाने में अपने घर चला गया होता, तो शायद पिता पीट-पीटकर उसे अधमरा किए बिना नहीं मानते। लेकिन लोकतंत्र में लोक के इस खस्ताहाल पर तो कोई आक्रोश जताने वाला भी नहीं है और आंसू बहाने वाला भी नहीं है। सत्तापक्ष
बिना चर्चा के ही ध्वनिमत से सब विधेयक पास करता रहे,विपक्ष को इसकी कोई परवाह नहीं है। तो सत्ता पक्ष दिखावे के लिए, भले ही लोकतंत्र की दोहाई देते हुए विपक्ष को आईना दिखाने में संवैधानिक तड़का लगाता रहे
लेकिन शायद उसके मन में भी यही है कि विपक्ष चाहे हंगामा करे या फिर ड्रामा, सरकार बिना विपक्ष के भी अपना काम चलाना जानती है। और
अच्छा यही है कि विपक्ष हंगामे में लगा रहे क्योंकि यदि किसी विधेयक पर चर्चा भी हुई तब भी उसमें संशोधन जैसे किसी हालात पर सरकार विचार करने की मंशा कतई नहीं रखती है। ऐसे में कामकाज को लेकर फेल और पास जैसी मार्कशीट देखने में जनप्रतिनिधियों की कोई रुचि नहीं रही है, चाहे इसमें सत्ता पक्ष हो या फिर विपक्ष ही सही। ऐसे में, वास्तव में अब 21 सदी में लोकतंत्र और संवैधानिक इबारत में स्वर्णिम अक्षरों में अंकित संसदीय सत्रों के मायने बड़े सीमित ही रह गए हैं।
संसद का मानसून सत्र 13 अगस्त को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित हो गया है। लोकसभा में आखिरी दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, पूरी कैबिनेट और विपक्ष के नेता राहुल गांधी मौजूद रहे। लोकसभा की कार्यवाही 13 अगस्त 2026 को अनिश्चिकाल के लिए स्थगित कर दी गई। मानसून सत्र में लोकसभा में 19 फीसदी तो राज्यसभा में 39 फीसदी कामकाज हुआ है। अब संविधान की बानगी देखिए कि इस बार मानसून सत्र में एक भी दिन प्रश्नकाल और शून्यकाल नहीं चल सके। अयोध्या के राम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी के मुद्दे पर चर्चा और दिल्ली में प्रदर्शनकारी छात्रों पर पुलिस कार्रवाई को लेकर गृह मंत्री अमित शाह के बयान की मांग को लेकर विपक्षी दलों के सदस्यों के हंगामे और नारेबाजी के कारण लोकसभा में लगातार गतिरोध बना रहा। यानी हंगामा होता रहा और इसे दूर करने के लिए विपक्ष एवं सत्ता पक्ष के बीच सहमति नहीं बन पाई। मानसून सत्र के दौरान केवल 28 और 29 जुलाई को ही सदन में सामान्य माहौल देखने को मिला, जब लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026’ पर लगभग दस घंटे तक चर्चा हुई। मानसून सत्र के आखिरी दिन सदन की कार्यवाही 11 बजे शुरू होने पर लोकसभा अध्यक्ष ने आसन पर बैठते ही सदस्यों से राष्ट्रगीत वंदे मातरम् के सम्मान में खड़े होने के लिए कहा। हालांकि सामान्यत: सत्र समाप्ति के मौके पर वंदे मातरम् से पहले वह अपने पारंपरिक संबोधन में उस सत्र की कार्य उत्पादकता, उसमें पारित विधेयकों, पूछे गए प्रश्नों आदि का उल्लेख करते हैं। लेकिन वंदे मातरम् के सभी छह अंतरों के गायन की रिकार्डिंग के बाद लोकसभा अध्यक्ष ने सदन की बैठक अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करने की घोषणा कर दी। सत्र के आखिरी दिन तक गतिरोध नहीं टूट सका।
हालांकि, अमित शाह ने कहा कि विपक्ष सदन चलने दे, हम हर जवाब देने के लिए तैयार हैं। लेकिन हंगामा थमा नहीं। और ठीक ही है कि आखिरी दिन विपक्ष बंदर के खिलौनों को हाथ में लेकर संसद पहुंचा था। शायद
बंदर की तरह ही सत्र अब गुलाटियां खा रहा है। और संसद सत्र के मायने
बस इतने ही रह गए हैं कि हंगामा के बीच सरकार अपने मतलब के कामकाज निपटाता रहे…।

कौशल किशोर चतुर्वेदी

कौशल किशोर चतुर्वेदी मध्यप्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार हैं। प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में पिछले ढ़ाई दशक से सक्रिय हैं। पांच पुस्तकों व्यंग्य संग्रह “मोटे पतरे सबई तो बिकाऊ हैं”, पुस्तक “द बिगेस्ट अचीवर शिवराज”, ” सबका कमल” और काव्य संग्रह “जीवन राग” के लेखक हैं। वहीं काव्य संग्रह “अष्टछाप के अर्वाचीन कवि” में एक कवि के रूप में शामिल हैं। इन्होंने स्तंभकार के बतौर अपनी विशेष पहचान बनाई है।वर्तमान में भोपाल और इंदौर से प्रकाशित दैनिक समाचार पत्र “एलएन स्टार” में कार्यकारी संपादक हैं। इससे पहले इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में एसीएन भारत न्यूज चैनल में स्टेट हेड, स्वराज एक्सप्रेस नेशनल न्यूज चैनल में मध्यप्रदेश‌ संवाददाता, ईटीवी मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ में संवाददाता रह चुके हैं। प्रिंट मीडिया में दैनिक समाचार पत्र राजस्थान पत्रिका में राजनैतिक एवं प्रशासनिक संवाददाता, भास्कर में प्रशासनिक संवाददाता, दैनिक जागरण में संवाददाता, लोकमत समाचार में इंदौर ब्यूरो चीफ दायित्वों का निर्वहन कर चुके हैं। नई दुनिया, नवभारत, चौथा संसार सहित अन्य अखबारों के लिए स्वतंत्र पत्रकार के तौर पर कार्य कर चुके हैं।

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