‘माई’ के ‘मन’ में क्या है… कौशल किशोर चतुर्वेदी

 

‘माई’ के ‘मन’ में क्या है…
मध्य प्रदेश में इन दिनों दतिया की ही चर्चा हो रही है। यह उपचुनाव दतिया के लिए ऐतिहासिक होने वाला है। भाजपा ने यहां 15 साल तक राज करने वाले नरोत्तम मिश्रा को बाहर का रास्ता दिखाया है। और दतिया में भाजपा सरकार और नरोत्तम मिश्रा के समय हुए विकास को अपने प्रत्याशी आशुतोष तिवारी की जीत का आधार बना रही है। दतिया में इस उपचुनाव में दिलचस्प मुकाबला यह है कि 2023 विधानसभा चुनाव में आमने सामने दिखने वाले चेहरे नरोत्तम मिश्रा और राजेन्द्र भारती इस चुनाव में भी महत्वपूर्ण भूमिका में रहेंगे, जबकि उपचुनाव के प्रत्याशी दोनों ही नहीं हैं। नरोत्तम मिश्रा ने न केवल भाजपा द्वारा घोषित प्रत्याशी आशुतोष तिवारी का नामांकन पत्र दाखिल करवाया बल्कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की उपस्थिति में मंच से आँखों में आँसुओं के साथ भी, यह भरोसा दिलाया कि वह घर-घर मत्था टेक कर आशुतोष तिवारी को जीत दिलवाएंगे। तो 2023 विधानसभा चुनाव में नरोत्तम को हराकर विधायक बने राजेन्द्र भारती भी फिलहाल मैदान में नहीं है, लेकिन उनका भरोसा है कि उपचुनाव में कांग्रेस ही जीत दर्ज करने जा रही है। नरोत्तम मिश्रा के लिए यह विडंबना ही है कि उनके प्रति कार्यकर्ताओं में टिकट न मिलने पर सहानुभूति का सैलाब भले ही देखा गया हो लेकिन फिलहाल उनके प्रति अब भाजपा कार्यकर्ता भी खुलकर सहानुभूति नहीं दिखा पा रहे हैं और बाकी किसी के मन में भी नरोत्तम के प्रति उत्तम भाव नजर नहीं आ रहे हैं।

हालांकि यह उपचुनाव अगर सबसे कड़ी परीक्षा किसी की है, तो वह व्यक्ति डॉ. नरोत्तम मिश्रा ही हैं। टिकट न मिलने के बाद भी अब नरोत्तम ने आशुतोष तिवारी को जिताने के लिए चुनाव की बागडोर संभाल ली है। उन्होंने मंच से कांग्रेस पर निशाने साधे और दतिया की जनता को भरोसा दिलाया कि कहीं कुछ नहीं बदला , सबकुछ पहले जैसा ही है और भारतीय जनता पार्टी एक बार फिर दतिया सीट जीतने जा रही है। उन्होंने कहा हम आशुतोष तिवारी के लिए छाती अडाए खड़े हैं और एक-एक कार्यकर्ता भी छाती अडाए खड़ा है। नाराजगी की बातों को सिरे से ख़ारिज करते हुए कहा दतिया के मालिकों मेरी पार्टी ने मुझे बहुत दिया है, 30 साल विधायक बनाया, 15 साल मंत्री बनाया और क्या चाहिए पार्टी से? रात दिन पार्टी की पूरी सेवा करके मन, वचन और कर्म से एक-एक कार्यकर्ता आशुतोष भैया के लिए प्राण झोंक देगा। वह 16 जुलाई से यहीं डेरा डालेंगे। कोई कार्यकर्ता घर नहीं बैठेगा। इतना कहते कहते नरोत्तम मिश्रा का गला रुंध गया उन्होंने कहा मैं एक-एक दरवाजे पर शीश झुकाऊंगा, एक-एक गाँव जाऊंगा और आशुतोष को जिताऊंगा। फिलहाल डॉ. नरोत्तम मिश्रा के लिए यही कहा जा सकता है कि दिल के अरमां आँसुओं में बह गए।
वहीं हाल ही में उज्जैन में एक सरकारी ट्रस्ट को एक रुपए में सरकारी भवन देने के मामले में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के पक्ष में खड़े नजर आए पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने दतिया उपचुनाव के दौरान नरोत्तम मिश्रा को “रावण स्वरूप” बताते हुए भाजपा पर हमला बोला। तो मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इसे आपत्तिजनक बताते हुए कहा कि कांग्रेस मुद्दों के अभाव में व्यक्तिगत टिप्पणी कर रही है। भाजपा ने बयान को जनता और नरोत्तम मिश्रा का अपमान बताया, जिससे सियासी विवाद तेज हो गया। दतिया में कांग्रेस प्रत्याशी के नामांकन के बाद मीडिया से बात करते हुए दिग्विजय सिंह ने कहा कि हमें इस बात की प्रसन्नता है कि उस अत्याचारी, अन्यायी और रावण स्वरूप नरोत्तम मिश्रा का टिकट भाजपा ने काट दिया। यह हमारे लगातार किए गए प्रहारों का असर है। उन्होंने नए भाजपा प्रत्याशी पर भी सवाल उठाए। दिग्विजय ने कहा कि अब जिसे टिकट दिया गया है, उसे जनता कितना जानती है? उसका नाम तब सुर्खियों में आया था जब विधायक चोरी के मामले में नरोत्तम मिश्रा जी के पैसे का लेन-देन वह कर रहा था। उस पर लेन-देन का आरोप है। दिग्विजय का यह बयान आते ही सियासी गलियारों में हलचल तेज हो गई। दिग्विजय की टिप्पणी पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कड़ा एतराज जताया। उन्होंने कहा कि चुनाव के दौरान इस तरह की भाषा बर्दाश्त नहीं की जा सकती। नरोत्तम मिश्रा ने दतिया और पूरे प्रदेश के लिए बहुत काम किया है। सीएम ने आगे कहा कि कांग्रेस के पास कोई मुद्दा नहीं बचा है, इसलिए वह व्यक्तिगत टिप्पणियों पर उतर आई है। जनता विकास के नाम पर वोट देती है, गाली-गलौज के नाम पर नहीं। मुख्यमंत्री के अलावा भाजपा नेताओं ने भी दिग्विजय के बयान की निंदा की। पार्टी का कहना है कि दिग्विजय सिंह चुनाव हारने की बौखलाहट में मर्यादा की सीमा लांघ रहे हैं। भाजपा नेताओं ने कहा कि नरोत्तम मिश्रा ने 20 साल तक दतिया की सेवा की है। उनके काम को जनता जानती है। ऐसे में उन्हें “रावण” कहना जनता का अपमान है। दिग्विजय के बयान ने चुनाव को और आक्रामक बना दिया है। कांग्रेस इसे भ्रष्टाचार और तानाशाही के खिलाफ लड़ाई बता रही है, तो भाजपा इसे संस्कार और मर्यादा पर हमला बता रही है।
खैर, फिलहाल यही कहा जा सकता है कि प्रत्यक्ष तौर पर दतिया उपचुनाव में मुकाबला भाजपा प्रत्याशी आशुतोष तिवारी और कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम सिंह के बीच में है। लेकिन मतदान से पहले तक, यहाँ मतदाताओं के मन में अपनी जगह बनाए हुए दो चेहरे डॉ. नरोत्तम मिश्रा और राजेन्द्र भारती महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले हैं। बाकी ‘माई’ के ‘मन’ में क्या है यह आने वाला चुनाव परिणाम ही बताएगा… दतिया में ‘माई’ की मर्जी के बिना कुछ नहीं होता, यह भरोसा हर सनातनी के मन में अवश्य ही है…।

कौशल किशोर चतुर्वेदी

कौशल किशोर चतुर्वेदी मध्यप्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार हैं। प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में पिछले ढ़ाई दशक से सक्रिय हैं। पांच पुस्तकों व्यंग्य संग्रह “मोटे पतरे सबई तो बिकाऊ हैं”, पुस्तक “द बिगेस्ट अचीवर शिवराज”, ” सबका कमल” और काव्य संग्रह “जीवन राग” के लेखक हैं। वहीं काव्य संग्रह “अष्टछाप के अर्वाचीन कवि” में एक कवि के रूप में शामिल हैं। इन्होंने स्तंभकार के बतौर अपनी विशेष पहचान बनाई है।वर्तमान में भोपाल और इंदौर से प्रकाशित दैनिक समाचार पत्र “एलएन स्टार” में कार्यकारी संपादक हैं। इससे पहले इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में एसीएन भारत न्यूज चैनल में स्टेट हेड, स्वराज एक्सप्रेस नेशनल न्यूज चैनल में मध्यप्रदेश‌ संवाददाता, ईटीवी मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ में संवाददाता रह चुके हैं। प्रिंट मीडिया में दैनिक समाचार पत्र राजस्थान पत्रिका में राजनैतिक एवं प्रशासनिक संवाददाता, भास्कर में प्रशासनिक संवाददाता, दैनिक जागरण में संवाददाता, लोकमत समाचार में इंदौर ब्यूरो चीफ दायित्वों का निर्वहन कर चुके हैं। नई दुनिया, नवभारत, चौथा संसार सहित अन्य अखबारों के लिए स्वतंत्र पत्रकार के तौर पर कार्य कर चुके हैं