वंचितों को आरक्षण का लाभ मिले, यही 21वीं सदी की मांग है… कौशल किशोर चतुर्वेदी

वंचितों को आरक्षण का लाभ मिले, यही 21वीं सदी की मांग है…
आरक्षण को लेकर भारत में लगातार बहस होती रही है। बहस का मूल विषय यही रहा है कि आजादी के बाद संविधान में एससी-एसटी वर्ग को मिल रहे आरक्षण का लाभ इन वर्गों के एक सीमित दायरे तक सिमट गया है। जिसको एक बार आरक्षण मिला बाद में उसका परिवार ही बार-बार आरक्षण के लाभ से फायदा ले रहा है। इसका दुष्परिणाम यह है कि वर्ग विशेष में एक क्रीमी लेयर का सृजन हो चुका है और इसके चलते ही वंचित वर्ग आरक्षण के लाभ से बहुत दूर हो गया है। आरक्षण में रिफॉर्म को लेकर बीते 21 अगस्त को जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन आयोजित करने वाली टीम की चिंता में यही मूल विषय है। हालांकि संविधान का हवाला देकर इन वर्ग विशेष के नेता गण आरक्षण में रिफॉर्म का विरोध कर रहे हैं। शायद उनकी चिंता यह भी हो सकती है कि इस बहाने कहीं संविधान में इन वर्गों को मिल रहे आरक्षण के साथ खिलवाड़ न हो जाए।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा और आरक्षण रिफॉर्म मूवमेंट के लोगों की मुलाकात इन दिनों चर्चा के केंद्र में है। दोनों ही पक्षों ने इस मुलाकात को सौहार्दपूर्ण बताया और ये भी कहा गया कि अगली मुलाकात 7 सितंबर को होगी। इस मीटिंग को लेकर जेपी नड्डा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट किया, ’21 अगस्त को जंतर-मंतर पर हुए आंदोलन के उपरांत पूर्व निर्धारित समय के अनुसार हर्ष दुबे, रण बहादुर सिंह चौहान व मृत्युंजय पाठक, टीम के सदस्यों से सौहार्दपूर्ण वार्ता हुई। इस क्रम में हम शीघ्र ही फिर मिलेंगे।’ साथ ही, हर्ष दुबे ने पोस्ट किया, ‘सर्व समाज के हित में सकारात्मक पहल। हमारी टीम ने जेपी नड्डा से मुलाकात की। इस दौरान 21 अगस्त को हुए प्रदर्शन के संबंध में उनसे संक्षिप्त चर्चा हुई। यह मुलाकात संवाद की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। हम बहुत जल्द पुनः मुलाकात करेंगे और सर्व समाज के हित में एक सकारात्मक एवं न्यायसंगत निर्णय के साथ आगे बढ़ने का प्रयास करेंगे।’ इसके साथ ही, विवादों को ध्यान में रखते हुए, शायद अपने पोस्ट में हर्ष दुबे ने आगे लिखा, ‘हमारा उद्देश्य किसी भी वर्ग के विरुद्ध नहीं, बल्कि समान अवसर, न्यायसंगत व्यवस्था और राष्ट्रहित में आवश्यक सुधार के लिए लोकतांत्रिक एवं शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखना है। आगे की जानकारी और निर्णय के संबंध में शीघ्र ही आधिकारिक रूप से सूचित किया जाएगा।’ ये भी बताया गया है कि हमने कभी आरक्षण खत्म करने की बात नहीं की, हमने जेपी नड्डा से भी आरक्षण रिफॉर्म की बात की है।
नड्डा की बैठक के बाद आम आदमी पार्टी और कॉकरोच जनता पार्टी की ओर से सवाल उठाए गए। सीजेपी के संयोजक अभिजीत दीपके ने पूछा कि नड्डा ने 21 अगस्त के जंतर-मंतर आंदोलन का नाम स्पष्ट रूप से क्यों नहीं लिया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का इस आंदोलन पर क्या रुख है।
आप नेता सौरभ भारद्वाज ने भी नड्डा से सरकार की आरक्षण नीति पर स्पष्टता मांगी और पूछा कि बीजेपी से जुड़े इस सवर्ण आंदोलन की आरक्षण पर मुख्य मांग के बारे में सरकार का क्या रुख है।सांसद चंद्रशेखर आजाद कहते हैं, “आरक्षण को खत्म करने का सबसे आसान तरीका है समाज से जातियों को खत्म कर दिया जाए, जिस दिन गैर बराबरी खत्म हो जाएगी उस दिन आरक्षण अपने आप खत्म हो जाएगा।”
केंद्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष चिराग पासवान ने कहा कि इन दो अनुसूचित जाति और जनजाति को शेड्यूल किया गया है, जिसकी वजह से आरक्षण दिया गया है। जब इनको आरक्षण देने का आधार ही भेदभाव रहा है तो इसमें आर्थिक व्‍यवस्‍था कैसे जोड़ी जा सकती है। आज एकजुट हैं, तब इस वर्ग को इतना संघर्ष करना पड़ रहा है। सोचिए, जब ये बंट कर तीन-चार प्रतिशत रह जाएंगे तो इनकी बात कौन सुनेगा? आज एक हैं तो आवाज बन रहे हैं, बटेंगे तो कोई सुनेगा नहीं।
हिन्दुस्तानी अवाम मोर्चा (से.) के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं बिहार सरकार के लघु जल संसाधन मंत्री डॉ. संतोष कुमार सुमन ने कहा कि आरक्षण की समीक्षा की बात को आरक्षण समाप्त करने की मांग के रूप में देखना पूरी तरह गलत है। आरक्षण दलितों, आदिवासियों और वंचित वर्गों का संवैधानिक अधिकार है और इसका उद्देश्य समाज के सबसे वंचित लोगों को बराबरी के अवसर उपलब्ध कराना है। उन्होंने चिराग पासवान से बिल्कुल उलट स्टैंड लेते हुए ये साफ कहा है कि आरक्षण की समीक्षा में कोई बुराई नहीं है।
हालांकि अगर साफ मन से बात की जाए तो सभी नेताओं को वोट बैंक की राजनीति से दूर हटकर राष्ट्रहित में वंचित वर्ग के साथ खड़े होकर आरक्षण में समुचित संशोधन के विषय पर खुले मन से बात करनी चाहिए। तभी वास्तव में वोट बैंक के नाम पर आरक्षण के साथ हो रहे खिलवाड़ को खत्म किया जा सकेगा और वास्तव में पात्र वंचित और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को आरक्षण के जरिए समाज की मुख्य धारा में लाने में सफलता मिल सकेगी। और वंचितों को आरक्षण का लाभ मिले, यही 21वीं सदी की मांग है…।

कौशल किशोर चतुर्वेदी

कौशल किशोर चतुर्वेदी मध्यप्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार हैं। प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में पिछले ढ़ाई दशक से सक्रिय हैं। पांच पुस्तकों व्यंग्य संग्रह “मोटे पतरे सबई तो बिकाऊ हैं”, पुस्तक “द बिगेस्ट अचीवर शिवराज”, ” सबका कमल” और काव्य संग्रह “जीवन राग” के लेखक हैं। वहीं काव्य संग्रह “अष्टछाप के अर्वाचीन कवि” में एक कवि के रूप में शामिल हैं। इन्होंने स्तंभकार के बतौर अपनी विशेष पहचान बनाई है।वर्तमान में भोपाल और इंदौर से प्रकाशित दैनिक समाचार पत्र “एलएन स्टार” में कार्यकारी संपादक हैं। इससे पहले इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में एसीएन भारत न्यूज चैनल में स्टेट हेड, स्वराज एक्सप्रेस नेशनल न्यूज चैनल में मध्यप्रदेश‌ संवाददाता, ईटीवी मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ में संवाददाता रह चुके हैं। प्रिंट मीडिया में दैनिक समाचार पत्र राजस्थान पत्रिका में राजनैतिक एवं प्रशासनिक संवाददाता, भास्कर में प्रशासनिक संवाददाता, दैनिक जागरण में संवाददाता, लोकमत समाचार में इंदौर ब्यूरो चीफ दायित्वों का निर्वहन कर चुके हैं। नई दुनिया, नवभारत, चौथा संसार सहित अन्य अखबारों के लिए स्वतंत्र पत्रकार के तौर पर कार्य कर चुके हैं।

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