जो कहोगे, वही पद देंगे। महामंडलेश्वर बना देंगे। जगतगुरु भी बना सकते हैं। बस 20 लाख रुपए का व्यवहार करना होगा। आश्रम खोलना है, जमीन अखाड़े के नाम पर होगी। देखरेख और संचालन आप ही करना।’
ये ऑफर हमें देश के तीन बड़े अखाड़ों में ऊंचे पदों पर बैठे महंतों ने अलग-अलग मुलाकातों में दिया। हमने खुद को अमेरिका से लौटा IT प्रोफेशनल बताया। कहा कि पिछले 15-20 साल से अमेरिका के क्यूपर्टिनो में नौकरी की। वाइस प्रेसिडेंट बना। खूब पैसा कमाया।
उज्जैन और मेरठ में जमीन भी है। अब कॉर्पोरेट लाइफ से मन भर गया। सब छोड़कर धर्म की राह पर चलना है। सामान्य साधु नहीं, सीधे महामंडलेश्वर बनना है। इसके लिए पैसा या जमीन कुछ भी दे सकते हैं।
पड़ताल जूना, निर्वाणी और निर्मोही अखाड़े में हुई। तीनों अखाड़ों के महंत-श्रीमहंत से फोन पर बात की। मिलने का वक्त तय हुआ। नासिक और हरिद्वार में मुलाकात हुई। हर अखाड़े की महामंडलेश्वर बनाने की अपनी-अपनी शर्तें और प्रक्रिया है, लेकिन में पता चला कि ये अखाड़े पैसों और जमीन के बदले महामंडलेश्वर का पद दे रहे हैं।

जूना अखाड़ा के महंत हरी गिरी महाराज महादेव की आरती करते