भोपाल में 1 लाख रिहाइशी प्रॉपर्टी पर ताला लगने का खतरा, घर में ब्यूटी पार्लर, किराना या कोचिंग चलाने वाले निगम के रडार पर; 21 जोन में सर्वे, कमर्शियल यूज मिलने पर नोटिस-सीलिंग की तैयारी

अगर आपने अपने घर से ब्यूटी पार्लर, किराना दुकान, कोचिंग सेंटर, बुटीक, क्लिनिक या कोई अन्य कमर्शियल एक्टिविटि कर रखी है, तो सावधान हो जाइए। भोपाल नगर निगम ऐसे सभी मकानों का सर्वे कराने जा रहा है।

शुरुआती आकलन के मुताबिक शहर में करीब 1 लाख ऐसी प्रॉपर्टी हैं, जहां रिहाइशी मकानों का कमर्शियल यूज हो रहा है। जांच में नियमों का उल्लंघन मिलने पर नोटिस जारी होंगे।कार्रवाई नहीं करने वालों की प्रॉपर्टी सील हो सकती है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद नगर निगम ने कार्रवाई तेज कर दी है।

पूरे शहर का होगा सर्वे

नगर निगम को 15 सितंबर तक सुप्रीम कोर्ट में कार्रवाई की रिपोर्ट प्रस्तुत करनी है। इसके लिए भोपाल को 21 जोन में बांटकर विशेष सर्वे दल गठित किए गए हैं। नगर निगम आयुक्त संस्कृति जैन ने सर्वे टीमों का गठन कर दिया है।

ये टीमें हर जोन में गली-मोहल्लों से लेकर बड़ी कॉलोनियों तक उन रिहाइशी भवनों की जांच करेंगी, जहां व्यावसायिक गतिविधियां संचालित हो रही हैं। नगर निगम के डिप्टी कमिश्नर एवं कॉलोनी सेल प्रभारी भुवन गुप्ता ने बताया कि प्रारंभिक सर्वे रिपोर्ट कोर्ट में प्रस्तुत की थी।

अब पूरे शहर में सर्वे के लिए टीमें बना दी गई हैं। वाटर बॉडी और ग्रीन बेल्ट एरिया में भी सर्वे होगा। नगर निगम प्रॉपर्टी टैक्स रिकॉर्ड, सड़क की चौड़ाई और भवन के उपयोग का मिलान कर वास्तविक स्थिति का सत्यापन करेगा।

10 से 15 दिन में सर्वे, उसी दिन मिलेगा नोटिस

नगर निगम ने 10 से 15 दिनों में सर्वे पूरा करने का लक्ष्य रखा है। जहां नियमों का उल्लंघन मिलेगा, संबंधित संपत्ति मालिक को मौके पर ही नोटिस दिया जाएगा। निगम का अनुमान है कि करीब एक लाख नोटिस जारी हो सकते हैं।

नगर निगम के रिकॉर्ड में करीब 65 हजार व्यावसायिक संपत्तियां पंजीकृत हैं। वहीं, हजारों ऐसे मकान हैं जहां व्यवसाय चल रहा है, लेकिन व्यावसायिक कर जमा नहीं किया जा रहा और उपयोग परिवर्तन की अनुमति भी नहीं ली गई है।

सुप्रीम कोर्ट ने कार्रवाई जारी रखने को कहा

5 अगस्त की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में कार्रवाई जारी रखने के निर्देश दिए। साथ ही मध्य प्रदेश हाईकोर्ट से दुकान संचालकों को मिले सभी अंतरिम राहत आदेश (स्टे) निरस्त कर दिए। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उसके निर्देशों के समानांतर कोई दूसरी जांच प्रक्रिया या समिति कार्रवाई में बाधा नहीं बन सकती।

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने राज्य सरकार की ओर से पेश पक्ष पर नाराजगी जताई और कहा कि अवैध निर्माण तथा रिहाइशी भवनों के व्यावसायिक उपयोग के मामलों में कानून का सख्ती से पालन कराया जाए। इसके बाद नगर निगम ने शहर में व्यापक सर्वे और कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी है।

सर्वे के बाद सीलिंग तय

एक्सपर्ट का कहना है कि सर्वे और कोर्ट में रिपोर्ट पेश होने के बाद सीलिंग की कार्रवाई होना तय है। हालांकि, सरकार तीन पहलुओं पर काम करे तो व्यापारियों को राहत मिल सकती है।

  • पहला- छोटे कारोबारी जैसे- ब्यूटी पार्लर, सैलून, कोचिंग, किराना दुकानों को छूट के दायरे में रख दें। आम तौर पर ये छोटे बिजनेस है।
  • दूसरा- लिंक रोड नंबर-1, 2-3, कोलार रोड, होशंगाबाद रोड, हमीदिया रोड, बैरागढ़ रोड, रायसेन रोड, 10 नंबर मार्केट, बिट्‌ठन मार्केट में मिक्स लैंड यूज व्यवस्था हो सकती है। इसमें आवासीय और व्यवसायिक दोनों ही तरीके से निर्माण हो सकेंगे। भोपाल चैंबर ऑफ कॉमर्स के सचिव अजय देवनानी का कहना है कि गुजरात में बड़ी सड़कों पर सरकार ने मिक्स लैंड यूज की व्यवस्था कर रखी है। ऐसी ही व्यवस्था यहां भी हो।
  • तीसरा- भोपाल का मास्टर प्लान जल्दी लागू हो जाए। कांग्रेस विधायक भी सरकार से यही मांग कर रहे हैं

मास्टर प्लान लागू नहीं होने पर कांग्रेसियों ने निगम गेट के सामने प्रदर्शन किया था।

पूर्व मंत्री बोले-मास्टर प्लान नहीं, इसलिए यह स्थिति बनी

पूर्व मंत्री पीसी शर्मा का कहना है कि भोपाल का विकास बिना मास्टर प्लान के हो रहा है। पिछले 20 साल से मास्टर प्लान लागू नहीं है। यदि मास्टर प्लान होता तो आज यह स्थिति नहीं बनती। इसलिए सरकार तुरंत मास्टर प्लान लाए। व्यापारियों को राहत देने के लिए मिक्स लैंड यूज व्यवस्था होनी चाहिए।

साल 2005 में लागू हुआ था मास्टर प्लान

भोपाल चैंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष गोविंद गोयल ने बताया कि भोपाल विकास योजना (मास्टर प्लान) का अंतिम प्रकाशन वर्ष 2005 में हुआ था। इसके बाद नया मास्टर प्लान आज तक लागू नहीं हुआ है।

इस वजह से शहर के कई क्षेत्रों में व्यापारिक गतिविधियों के अनुरूप पर्याप्त कमर्शियल भूखंड उपलब्ध नहीं हो पाए हैं। ऐसे में हजारों व्यापारी वर्षों से आवासीय भूखंडों से ही व्यवसाय चला रहे हैं।

आवासीय भवनों में कमर्शियल एक्टिविटी होने के चलते अरेरा कॉलोनी के लोगों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। इसके बाद निगम ने कार्रवाई शुरू की।

शासन को मिल रहा करोड़ों का राजस्व

इन क्षेत्रों में अस्पताल, बैंक, क्लीनिक, शोरूम एवं अन्य सेवा प्रदाता संस्थान वर्षों से संचालित होकर नागरिकों को जरूरी सुविधाएं दे रहे हैं।

सभी व्यवसायी नगर निगम को व्यावसायिक दर से संपत्ति कर, मध्यप्रदेश विद्युत वितरण कंपनी को कमर्शियल दर से विद्युत शुल्क और शासन द्वारा निर्धारित अन्य करों एवं शुल्कों का नियमित भुगतान कर रहे हैं। इससे शासन को करोड़ों रुपए का राजस्व मिल रहा है।

चैंबर के सचिव अजय देवनानी ने बताया कि भोपाल के प्रमुख मार्गों और मुख्य सड़कों पर वर्षों से चल रही व्यावसायिक गतिविधियों को देखते हुए जनहित एवं शहरी जरूरतों के लिए मिक्स लैंड यूज नीति लागू की जा सकती है। भोपाल चैंबर ऑफ कॉमर्स भी व्यापारियों के समर्थन में है और मिक्स लैंड यूज व्यवस्था की मांग कर रहा है।

भोपाल चैंबर ऑफ कॉमर्स भी व्यापारियों के समर्थन में उतरा है और मिक्स लैंड यूज व्यवस्था की मांग की है।

5 लाख से अधिक का रोजगार प्रभावित

इन्हें बंद करने पर करीब 5 लाख लोगों का रोजगार प्रभावित हो सकता है। रिकॉर्ड में नर्मदापुरम रोड पर करीब 2,500 और कोलार रोड पर लगभग 2,000 कमर्शियल प्रॉपर्टी दर्ज हैं। नए मास्टर प्लान में प्रमुख सड़कों के लिए अलग प्रावधान होंगे।

18 मीटर से अधिक चौड़ी सड़कों पर पर्याप्त पार्किंग, ट्रैफिक प्रबंधन और नागरिक सुविधाओं की शर्तों के साथ नियंत्रित कमर्शियल गतिविधियों को मंजूरी दी जा सकती है। इससे नर्मदापुरम रोड और कोलार रोड जैसे विकसित बाजारों को व्यावहारिक समाधान मिल सकता है।

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