मध्यप्रदेश में ABPAS 3.0 लागू: एक क्लिक में पता चलेगी कॉलोनी की वैधता, घर बैठे मिलेगी बिल्डिंग परमिशन और नक्शे की ऑनलाइन मंजूरी

मध्यप्रदेश में लोग अब घर बैठे जांच सकेंगे कि जिस कॉलोनी में वे मकान या फ्लैट खरीद रहे हैं, वह वैध है या नहीं। बिल्डिंग परमिशन और नक्शा स्वीकृति जैसी सुविधाएं भी ऑनलाइन मिलेंगी।

सरकार ने नगरीय निकायों में लागू ऑटोमैटिक बिल्डिंग प्लान अप्रूवल सिस्टम (ABPAS) को अपग्रेड कर ABPAS 3.0 लागू किया है। विधानसभा के मानसून सत्र में कॉलोनाइजर एक्ट को मंजूरी मिलने के बाद यह सिस्टम पूरी तरह प्रभावी हो जाएगा।नए प्लेटफॉर्म पर कॉलोनाइजर लाइसेंस, रेरा रजिस्ट्रेशन और संबंधित विभागों की मंजूरियों को इंटिग्रेटेड किया जाएगा। इसके लिए सात विभागों के सिस्टम आपस में जोड़े जाएंगे। हालांकि एक्सपर्ट का कहना है कि डिजिटलाइजेशन के बाद आने वाली दिक्कतों को दूर करने की जरूरत है।

व्यक्ति नहीं, नियम करेंगे फैसला’: पुरानी व्यवस्था में भवन के नक्शों की जांच इंजीनियर और तकनीकी अधिकारी करते थे। बिल्डिंग बायलाज की व्याख्या और आपत्तियों पर उनके व्यापक विवेकाधिकार के कारण समान मामलों में अलग-अलग निकायों के फैसले अलग होते थे। इससे प्रक्रिया की पारदर्शिता प्रभावित होती थी।

सॉफ्टवेयर आधारित जांच: पहले चरण की तकनीकी

जांच पूरी तरह सॉफ्टवेयर करेगा। यदि ड्राइंग निर्धारित नियमों के अनुरूप होगी, तो सिस्टम उसे तुरंत स्वीकार करेगा। पारदर्शिताः यदि नक्शे में कोई कमी होगी, तो सॉफ्टवेयर ऑनलाइन बताएगा कि किस नियम का पालन नहीं हुआ। इससे मनमाने ढंग से आपत्तियां लगाने की गुंजाइश कम होगी।

प्रक्रिया तेज होगी, समय बचेगाः पुरानी व्यवस्था में फाइल कई स्तरों से गुजरती थी। किसी भी स्तर पर तकनीकी आपत्ति आने पर फाइल वापस भेज दी जाती थी। त्रुटि सुधारकर दोबारा प्रक्रिया शुरू करने में कई सप्ताह, कभी-कभी महीनों लग जाते थे।ABPAS 3.0 में ऑटो स्क्रूटनीः नई व्यवस्था में आवेदन के साथ ही प्रारंभिक जांच और ऑटो स्क्रूटनी होगी। इससे नक्शे की अधिकांश तकनीकी त्रुटियां

1. पूरी प्रक्रिया होगी ऑनलाइन: आवेदन से अंतिम अनुमति तक पूरी प्रक्रिया डिजिटल होगी। नगर निगम या नगर पालिका के दफ्तरों के चक्कर लगाने और कागजी फाइलें जमा करने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

2. सॉफ्टवेयर करेगा तकनीकी जांचः अपलोड किए गए नक्शे में सेटबैक, एफएआर (FAR), भवन की ऊंचाई, पार्किंग और ग्राउंड कवरेज समेत सभी तकनीकी मानकों की जांच सॉफ्टवेयर करेगा। नियमों का उल्लंघन मिलने पर आपत्तियां तुरंत ऑनलाइन दिखाई देंगी।

3. छोटे आवासीय प्लॉटों को डीम्ड अप्रूवलः 186 वर्गमीटर (करीब 2,000 वर्गफीट) तक के आवासीय प्लॉट पर निर्धारित शर्तें पूरी होने पर स्वतः मंजूरी मिलेगी। 300 वर्गमीटर तक के कुछ मामलों में अधिकृत आर्किटेक्ट या स्ट्रक्चरल इंजीनियर डिजिटल प्रमाणीकरण के आधार पर सीधे अनुमोदन दे सकेंगे।

4. निर्माण के हर चरण की ऑनलाइन निगरानीः भवन निर्माण के प्रमुख चरण ऑनलाइन दर्ज होंगे। इनमें कमेंसमेंट नोटिस, प्लिंथ लेवल निरीक्षण, कंप्लीशन रिपोर्ट और ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट शामिल हैं।

निर्माण कार्य के लिए विभिन्न विभागों से एनओसी (NOC) लेने में अक्सर महीनों लग जाते थे। प्रक्रिया तेज करने के लिए ABPAS 3.0 को इन विभागों से सीधे जोड़ा जा रहा है:

1. राजस्व विभागः भूखंड के स्वामित्व के सत्यापन के लिए।.टाउन एंड कंट्री प्लानिंग (T&CP): ले आउट की मंजूरी के लिए।. सम्पदा 2.0: रजिस्ट्री और संपत्ति दस्तावेजों के सत्यापन के लिए।एयरपोर्ट अथॉरिटी: ऊंचाई संबंधी एनओसी के लिए।.राष्ट्रीय स्मारक प्राधिकरण (NMA): ऐतिहासिक धरोहरों के आसपास निर्माण संबंधी मंजूरी के लिए।इस सिस्टम से किसे मिलेगा लाभ?मकान बनाने वाले नागरिकः घर बैठे पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से अनुमति मिल सकेगी।बिल्डर और डेवलपर: परियोजनाएं समय पर शुरू करने और पूरी करने में सुविधा मिलेगी।

सरकारी इंजीनियरों की भूमिका में क्या बदलाव होगा?

नया सिस्टम लागू होने के बाद सवाल उठ रहा है कि क्या सरकारी इंजीनियरों की भूमिका समाप्त हो जाएगी। जवाब है- नहीं, उनकी भूमिका बदलेगी, खत्म नहीं होगी। पहले इंजीनियरों का ज्यादातर समय फाइलों के रखरखाव और प्रारंभिक तकनीकी जांच में खर्च होता था।नई व्यवस्था में उनका फोकस कागजी प्रक्रिया के बजाय निरीक्षण, सुरक्षा और गुणवत्ता सुनिश्चित करने पर होगा। उनकी मुख्य जिम्मेदारियां होंगी

मौके पर फील्ड निरीक्षण करना।जटिल और बड़े निर्माण मामलों की जांच करना।भवनों की संरचनात्मक सुरक्षा सुनिश्चित करना।नियमों से जुड़े विशेष और अपवादात्मक मामलों पर निर्णय लेना।निर्माण कार्यों में गुणवत्ता नियंत्रण की निगरानी करना।

भोपाल क्रेडाई के अध्यक्ष मनोज सिंह मीक का कहना है कि बिल्डिंग परमिशन और अन्य सुविधाओं के लिए आने वाले ABPAS के नए वर्जन में कई अनुमतियों को इंटीग्रेटेड किया गया है। नई बात यह है कि शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के अलग-अलग नियमों को भी एक किया जा रहा है।

शहरी विकास विभाग से संबंधित मंजूरियां भी एक ही पोर्टल पर लाई जा रही हैं, जो सिंगल विंडो की तरह काम करेगा। मीक का कहना है कि सरकार की मंशा अच्छी है, लेकिन डिजिटलाइजेशन के बाद आने वाली परेशानियां दूर होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि राजस्व विभाग के नक्शों के डिजिटलाइजेशन के दौरान सिस्टम पर दर्ज नक्शों और वास्तविक जमीन में काफी फर्क था।

शिकायत के बाद उसे सुधारने में लंबा समय लग गया, जिससे उनके प्रोजेक्ट डिले हुए। रेरा की गाइडलाइन के मुताबिक उन्हें एक्स्ट्रा टाइम नहीं मिलता। सरकार की कोशिश अच्छी है, लेकिन डिजिटल एरर्स को फिक्स करना जरूरी है।