एमपी में तबादला विवाद: ‘सिर्फ फायदे वाले ट्रांसफर किए’, मंत्री नारायण सिंह कुशवाह ने सचिव जॉन किंग्सली पर लगाए गंभीर आरोप, CM-CS को लिखी नोटशीट

मध्य प्रदेश में तबादलों का सीजन खत्म हो चुका है। वहीं, इसी मुद्दे पर एक नया विवाद खड़ा हो गया है। यह विवाद मोहन सरकार के एक वरिष्ठ मंत्री और उनके ही विभाग के सचिव के बीच है। मामला इतना बढ़ गया कि सीधे मुख्यमंत्री तक पहुंच गया है।

सामाजिक न्याय एवं उद्यानिकी मंत्री नारायण सिंह कुशवाह ने इस विवाद की शुरुआत की। उन्होंने मुख्यमंत्री मोहन यादव और मुख्य सचिव अनुराग जैन को एक नोटशीट लिखी है। इसमें उन्होंने उद्यानिकी विभाग के सचिव जॉन किंग्सली पर गंभीर आरोप लगाए हैं। किंग्सली साल 2004 बैच के आईएएस (Indian Administrative Service) अधिकारी हैं।

मंत्री का आरोप

तबादलों के दौरान मंत्री का कहना है कि सचिव ने मनमानी की। उनकी शिकायत है कि सचिव ने सिर्फ वही ट्रांसफर किए जिनमें उनका अपना इंट्रेस्ट था। मंत्री ने जो सूची भेजी थी, उसे पूरी तरह रोक दिया गया।नोटशीट में मंत्री ने यह भी लिखा कि उनकी और तीन विधायकों की सिफारिशें भी नहीं मानी गईं। इनमें प्रदेश भाजपा (Bharatiya Janata Party) अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल की सिफारिश भी शामिल थी। यह सिफारिश भी ट्रांसफर सूची में जगह नहीं पा सकी।मामला यहीं नहीं रुका। मंत्री ने अपनी लोटशीट के साथ एक इस चैट में कथि की तरफ से पैसों की मांग की गई थी। यह आरोप मामले को और गंभीर बना देता है।

सचिव का जवाब

दूसरी तरफ सचिव आईएएस जॉन किंग्सली एआर ने मंत्री के सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। उनका कहना है कि मंत्री के साथ बैठक में कुछ खास नामों पर सहमति बनी थी। वहीं, ट्रांसफर के लिए उन नामों की जगह दूसरे नामों की सूची भेजी गई।सचिव के मुताबिक यही वजह थी कि उन्होंने वह सूची रोक दी। उनका कहना है कि यह गंभीर मामला है और इस पर बात करना जरुरी है। पैसों की मांग वाले आरोप पर सचिव ने कहा कि जिस व्यक्ति के नाम पर शिकायत बताई जा रही है, उसके खिलाफ पहले ही आईटीएक्ट (Information Technology के तहत एफआई Information Report) पणा पुपग है।

सीएम-सीएस की पड़ताल

जब यह पूरा मामला मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव (CS) तक पहुंचा, तो उन्होंने इसे हल्के में नहीं लिया। शासन स्तर पर तुरंत गोपनीय तरीके से पड़ताल शुरु कर दी गई है। सूत्रों का कहना है कि उद्यानिकी सचिव से मंत्री की शिकायत पर लिखित जवाब मांगा गया है।यानी अब सचिव को अपनी सफाई कागज पर देनी होगी। यह जांच बताएगी कि तबादलों में असल में क्या गड़बड़ी हुई। साथ ही यह भी साफ होगा कि किसकी सिफारिश पर कौन सा फैसला लिया गया।

पहली बार ऐसा विवाद

तबादला सीजन को लेकर मध्य प्रदेश में हर साल कुछ न कुछ खींचतान होती रहती है। मंत्री और अफसरों के बीच नाराजगी की खबरें आम बात हैं। वहीं, इस बार मामला काफी आगे बढ़ गया है।इससे पहले भी कुछ मंत्रियों की अपने अधिकारियों से तबादलों को लेकर अनबन हुई थी। महिला बाल विकास मंत्री, राजस्व मंत्री और पर्यावरण राज्यमंत्री के मामलों में भी विवाद हुआ था। वहीं, वे सभी विवाद मौखिक स्तर पर ही रह गए थे।इस बार पहली बार किसी मंत्री ने लिखित शिकायत भेजी है। पहली बार सचिव से लिखि गया है। यही वजह है कि यह मामला प्रशासनिक हलकों में भी चर्चा का विषय बन गया है।

आगे क्या होगा

अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सचिव अपने जवाब में क्या लिखते हैं। जांच पूरी होने के बाद ही साफ होगा कि गलती किसकी है। तब तक मंत्री और सचिव के बीच तनातनी बनी रहने की आशंका है।यह मामला सिर्फ एक तबादले का नहीं है। यह बताता है कि मंत्री और अफसरों के बीच तालमेल कितना जरुरी है। जब यह तालमेल बिगड़ता है, तो असर आम कामकाज पर भी पड़ता है।

यह आम जनता के लिए इसलिए जरुरी है क्योंकि यह सरकारी कामकाज में पारदर्शिता से जुड़ी है। जब मंत्री और अफसर आपस में तालमेल नहीं बिठाते, तो इसका सीधा असर जनता के कामों पर पड़ता है। तबादलों में मनमानी की शिकायत गंभीर विषय है, क्योंकि इससे प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल उठते हैं।

साथ ही पैसों की मांग जैसे भागेप

पार से जुड़ी चिंता लात हैं। जनता को यह जानन का पूटा अधिकार है कि उनके क्षेत्र के अफसर और जनप्रतिनिधि कैसे काम कर रहे हैं।