ब्लिंकिट, जेप्टो जैसे क्विक-कॉमर्स एप्स से अब ग्राहक एक बार में 2 से 5 किलो तक ही चीनी खरीद पाएंगे। देश में त्योहारी सीजन की शुरुआत से ठीक पहले चीनी की सप्लाई घटने और कीमतों में अचानक आई तेजी के बाद यह फैसला लिया गया है।
उपभोक्ता मामले विभाग के मुताबिक, 26 अगस्त को देश में चीनी की औसत खुदरा कीमत 65.05 रुपए किलो पर पहुंच गई है। महज एक महीने पहले 26 जुलाई को यह 48 रुपए प्रति किलो थी। यानी 30 दिनों में चीनी 35.5% से महंगी हुई है।

डीमार्ट और रिलायंस रिटेल ने भी कैपिंग लगाई
ऑफलाइन बाजार में डीमार्ट और रिलायंस रिटेल जैसे सुपरमार्केट्स ने प्रति ग्राहक 2 से 3 किलो चीनी खरीदने की सीमा तय की है। प्रमुख चीनी ब्रांड्स के एक सीनियर एग्जीक्यूटिव के मुताबिक, रिटेलर्स यह कदम जमाखोरी रोकने और हर ग्राहक को स्टॉक उपलब्ध कराने के लिए उठा रहे हैं।

थोक बाजार में भी 34% महंगी हुई चीनी
थोक बाजार में भी चीनी के दाम 45 रुपए किलो से बढ़कर 60.36 रुपए किलो तक पहुंच गए हैं। पीआईबी के आंकड़ों के मुताबिक, 20 जुलाई से 20 अगस्त के बीच ही चीनी के दाम 16% तक बढ़ गए थे, जो अगस्त के आखिरी हफ्ते तक और तेज हो गए।
कीमतें बढ़ने और सप्लाई घटने के 3 कारण
- उत्पादन में गिरावट का अनुमान: इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (ISMA) ने 2025-26 मार्केटिंग ईयर के लिए एथेनॉल ब्लेंडिंग के बाद देश का चीनी उत्पादन लगभग 279 लाख टन रहने का अनुमान जताया है।
- घरेलू मांग ज्यादा: भारत में चीनी की सालाना घरेलू खपत करीब 280 लाख टन है। सत्र की शुरुआत में करीब 50 लाख टन का ओपनिंग स्टॉक था, लेकिन खपत के मुकाबले नया उत्पादन कम रहने की आशंका से सप्लाई प्रेशर बढ़ा है।
- कम बच सकता है क्लोजिंग स्टॉक: ISMA के मुताबिक, सितंबर के अंत तक देश में क्लोजिंग स्टॉक घटकर महज 35 लाख टन रह जाएगा, जो पिछले सालों की तुलना में काफी कम है।
त्योहारी सीजन में आम बजट बिगड़ेगा
रक्षाबंधन और आने वाले गणेशोत्सव, नवरात्रि व दिवाली जैसे त्योहारों के दौरान मिठाइयों और चीनी आधारित व्यंजनों की मांग काफी बढ़ जाती है। ऐसे समय में चीनी की कीमतों में प्रति किलो 17 रुपए किलो तक की बढ़ोतरी से आम परिवारों के महीने के राशन का बजट सीधे तौर पर प्रभावित होगा।

10 लाख टन चीनी इंपोर्ट होगी, जमाखोरी रोकने के निर्देश
चीनी के दाम कम करने के लिए केंद्र सरकार ने पिछले हफ्ते 10 लाख टन चीनी के इंपोर्ट को मंजूरी दे दी है।
इसके साथ ही ज्यादा चीनी खरीदने वाले बड़े ग्राहकों के लिए स्टॉक की लिमिट तय कर दी गई है।
सरकार ने सभी राज्यों को सख्त निर्देश दिए हैं कि वे बाजारों में चेकिंग बढ़ाएं ताकि चीनी की जमाखोरी और सट्टेबाजी को पूरी तरह रोका जा सके।
15 दिन से ज्यादा स्टॉक रखने पर पाबंदी
सरकार चीनी व्यापारियों और डीलरों पर स्टॉक रखने की सीमा लागू कर चुकी है। नए नियमों के तहत महीने में 10 मीट्रिक टन से अधिक चीनी का कारोबार करने वाले डीलर 15 दिन से अधिक की खपत का स्टॉक जमा करके नहीं रख सकते।
इसके अलावा तीन और कदम उठाए हैं…
- चीनी के आयात को टैक्स फ्री भी कर दिया गया है।
- निर्यात पर 30 सितंबर 2026 तक रोक लगा दी गई है।
- डीलरों के लिए 30 नवंबर तक 400 टन तक की स्टॉक लिमिट तय की गई है।