
सूर्यकांत ने जेन-ज़ी को खुश किया… मोदी भी करेंगे सीधी बात…
सोनम वांगचुक ने एक पॉडकास्ट में अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका पर निशाना साधते हुए कहा था कि ये लोग “संत नहीं हैं” और इनकी अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षाएं हैं। तो भले ही कल के दिन अभिजीत दीपके सहित राजनैतिक महत्वाकांक्षा रखने वाले युवाओं को कोई याद करे या न करे लेकिन जेन-जी और जेन अल्फा सहित युवाओं की बातों को न्यायपालिका, कार्यपालिका और विधायकों के स्तर पर गंभीरता से लिया जाएगा। जंतर मंतर पर हुए प्रदर्शन के बाद युवाओं ने सभी का ध्यान अपनी तरफ खींचने में सफलता हासिल कर ली है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने जंतर मंतर प्रदर्शन में जेन-जी के प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज की गई सभी एफआईआर रद्द कर अपनी पुरानी कथित भूल को पूरी तरह से सुधारने की कवायद की है। इसे डैमेज कंट्रोल और जेन-ज़ी का दिल जीतने के तौर पर भी देखा जा सकता है। और अब यह भी महत्वपूर्ण है कि 5 सितंबर को शिक्षक दिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी युवाओं से सीधी बात कर जेन-जी के प्रति सम्मान के भाव को व्यक्त करेंगे।
सुप्रीम कोर्ट ने 20 से 25 जुलाई के बीच हुए स्टूडेंट प्रोटेस्ट से जुड़ी सभी एफआईआर को रद्द करने और इस मामले को बंद करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा कि किसी भी राज्य या केंद्र शासित प्रदेश में दर्ज की गई एफआईआर पर आगे कोई जांच या कार्रवाई नहीं की जाएगी। इन सभी केसों को हमेशा के लिए बंद माना जाएगा। इस पर कॉकरोच जनता पार्टी के प्रवक्ता सौरव दास ने हाथ जोड़कर जजों को धन्यवाद कहा। जिसके बाद चीफ जस्टिस ने उन्हें शुभकामनाएं दीं। इस मामले पर सुनवाई पूरी हो गई है।
सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि केंद्र सरकार ने छात्रों से जो वादे किए उसे पूरा करना चाहती है, जिसमें मुकदमे वापस लेने, भविष्य में इन मामलों के लिए एफआईआर न करने और आत्महत्या करने वाले छात्रों के लिए मुआवजा देने जैसी बातें शामिल हैं। कोर्ट ने कहा कि 3 महीने में नीति बने, जिसके तहत आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिजन को मुआवजा मिल सके। चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जोयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने आर्टिकल-142 के तहत अपनी विशेष शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए ये फैसला सुनाया है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश और सरकार के आश्वासन के बाद सीजेपी के सौरव दास ने कहा, ‘हम इस आदरणीय कोर्ट और सभी वकीलों को धन्यवाद देते हैं। 5 सितंबर के मार्च का आह्वान वापस लिया जा रहा है।’ चीफ जस्टिस ने उनके इस फैसले की तारीफ की। अभिजीत दीपके ने फैसले को न्याय की जीत बताया।
वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शिक्षक दिवस पर 5 सितंबर को दिल्ली यूनिवर्सिटी के श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स में युवाओं और जेन-ज़ी के साथ सीधे बातचीत करेंगे। यह कार्यक्रम कॉलेज के 100 साल पूरे होने के मौके पर रखा गया है। तो यह माना जा सकता है कि जेन-ज़ी अब पूरी तरह से प्रासंगिक हो चुके हैं। और सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार की मंशा के मुताबिक जेन-ज़ी की भावनाओं के अनुरूप फैसला सुनाकर कहीं न कहीं कॉकरोच शब्द का इस्तेमाल किये जाने की भरपाई करने की कोशिश की है। हालांकि जिस तरह सोनम वांगचुक ने दीपके और साथियों पर निशाना साधा है, उससे यही लगता है कि दीपके और उनके साथियों का राजनैतिक भविष्य भले ही न हो, लेकिन जेन-ज़ी का महत्व अब भारतीय राजनीति में हमेशा बना रहेगा… इसीलिए चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने जेन-ज़ी को खुश किया है… और इसीलिए मोदी भी सीधी बात करने का मन बना चुके हैं…।

कौशल किशोर चतुर्वेदी
कौशल किशोर चतुर्वेदी मध्यप्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार हैं। प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में पिछले ढ़ाई दशक से सक्रिय हैं। पांच पुस्तकों व्यंग्य संग्रह “मोटे पतरे सबई तो बिकाऊ हैं”, पुस्तक “द बिगेस्ट अचीवर शिवराज”, ” सबका कमल” और काव्य संग्रह “जीवन राग” के लेखक हैं। वहीं काव्य संग्रह “अष्टछाप के अर्वाचीन कवि” में एक कवि के रूप में शामिल हैं। इन्होंने स्तंभकार के बतौर अपनी विशेष पहचान बनाई है।वर्तमान में भोपाल और इंदौर से प्रकाशित दैनिक समाचार पत्र “एलएन स्टार” में कार्यकारी संपादक हैं। इससे पहले इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में एसीएन भारत न्यूज चैनल में स्टेट हेड, स्वराज एक्सप्रेस नेशनल न्यूज चैनल में मध्यप्रदेश संवाददाता, ईटीवी मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ में संवाददाता रह चुके हैं। प्रिंट मीडिया में दैनिक समाचार पत्र राजस्थान पत्रिका में राजनैतिक एवं प्रशासनिक संवाददाता, भास्कर में प्रशासनिक संवाददाता, दैनिक जागरण में संवाददाता, लोकमत समाचार में इंदौर ब्यूरो चीफ दायित्वों का निर्वहन कर चुके हैं। नई दुनिया, नवभारत, चौथा संसार सहित अन्य अखबारों के लिए स्वतंत्र पत्रकार के तौर पर कार्य कर चुके हैं।