इंदौर-भोपाल हाईवे: 25 साल में 4 प्लान, फिर भी सिक्स लेन का इंतजार; निर्माण, टोल और खराब सर्विस रोड से बढ़ी परेशानी, सिंहस्थ 2028 से पहले 6-लेन की जरूरत

सुबह 7:05 बजे राजबाड़ा से कार से निकलने पर उम्मीद थी कि भोपाल का सफर 4 घंटे में पूरा हो जाएगा। राजबाड़ा से रेडिसन तक ही 9 से 10 सिग्नल मिलते हैं। एमआर-10 रोड से खराब सर्विस रोड के जरिए बायपास पर आने पर ओवरब्रिज निर्माण कार्य और मांगलिया टोल की लंबी लाइन का सामना करना पड़ता है।

अर्जुन बड़ौदा ब्रिज के पास डामर और सीमेंटेड सड़क का निर्माण कार्य अधूरा है। देवास बायपास पर भी फ्लाईओवर निर्माण के कारण वाहन 20 से 30 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से ही चल पाते हैं। लगभग 10 किमी आगे फिर टोल आता है। देवास-मक्सी-भोपाल फ्लाईओवर के नीचे की सर्विस रोड खराब है। आगे ग्रामीण क्षेत्रों के स्पीड ब्रेकर्स के कारण रफ्तार बार-बार धीमी करनी पड़ती है।

मार्ग की 5 प्रमुख समस्याएं

निर्माण कार्य से बॉटलनेक : मांगलिया से देवास के बीच ओवरब्रिज निर्माण से सड़क संकरी है।कस्बों का स्थानीय ट्रैफिक : देवास, सोनकच्छ, आष्टा और सीहोर के स्थानीय ट्रैक्टर, बाइक, ऑटो और बसें अचानक हाईवे पर आ जाते हैं। गांवों के स्पीड ब्रेकर रफ्तार तोड़ते हैं।ओवरटेकिंग में जोखिम : फास्ट लेन में ट्रकों के चलने से ओवरटेक करना मुश्किल होता है।सड़क पर अनियंत्रित रुकावटें : रात के समय सड़क किनारे खड़े खराब ट्रक और आवारा मवेशी हादसों का मुख्य कारण बनते हैं।बार-बार टोल रुकावट : इंदौर-भोपाल मार्ग पर 5 टोल प्लाजा हैं, जहां समय और पैसा दोनों खर्च होते हैं।

सिंहस्थ 2028 में दबाव बढ़ना तय

वर्तमान में इस कॉरिडोर से रोजाना 30 से 45 हजार वाहन गुजरते हैं। अनुमान है कि सिंहस्थ के दौरान यह संख्या 1 से 1.5 लाख प्रतिदिन और शाही स्नान के दिनों में 2.5 से 3 लाख वाहन प्रतिदिन तक पहुंच सकती है। यदि नई हाई-स्पीड सड़क समय पर तैयार नहीं हुई, तो मौजूदा 4-लेन मार्ग पर दबाव कई गुना बढ़ना तय है।

25 साल में बदले प्रस्ताव

पहला चरण (2000-2004) : 4-लेन बनाने की स्वीकृति दी गई।दूसरा चरण (2007-2012) : 188 किमी लंबे मार्ग को 4-लेन बनाया। यात्रा का समय 6 घंटे से घटाकर 3.5 से 4 घंटे रह गया।

तीसरा चरण (2018-2019) : 11 करोड़ से 146 किमी लंबे 6-लेन ‘ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे’ की डीपीआर सौंपी गई।चौथा चरण (2020-2023) : केंद्र सरकार की ‘भारतमाला परियोजना’/हाई-स्पीड कॉरिडोर में शामिल करने की रूपरेखा बनी।पांचवां चरण (2024-2026) : 12,000 करोड़ के 160 किमी लंबे 6-लेन हाई-स्पीड कॉरिडोर का प्रस्ताव तैयार किया गया है।

मौजूदा 4-लेन को 6-लेन करना राहत का विकल्प

इंदौर-भोपाल मार्ग को जब 2-लेन से 4-लेन किया गया था, तब भविष्य में इसे 6-लेन करने के लिए दोनों तरफ पर्याप्त जगह रखी गई थी। नया ग्रीनफील्ड कॉरिडोर बनाने में कम से कम 4 से 5 साल लगेंगे। सिंहस्थ की दृष्टि से सरकार को मौजूदा 4-लेन मार्ग में ही दोनों तरफ एक-एक लेन बढ़ाकर इसे 6-लेन करना चाहिए। इससे तुरंत राहत मिलेगी। सिंहस्थ में बढ़ने वाले ट्रैफिक दबाव को भी कंट्रोल किया जा सकेगा

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