देखना यह है कि दतिया का मतदाता दिल से फैसला लेता है या दिमाग से… कौशल किशोर चतुर्वेदी

देखना यह है कि दतिया का मतदाता दिल से फैसला लेता है या दिमाग से…
दतिया विधानसभा सीट उपचुनाव के लिए आज यानि 30 जुलाई 2026 को मतदान होना है। वैसे तो यहां सीधा-सीधा सा मुकाबला कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम सिंह और भाजपा के आशुतोष तिवारी के बीच में है। और दोनों ही दल अपनी-अपनी जीत के दावे भी कर रहे हैं। मध्य प्रदेश में भाजपा की सरकार है लेकिन दतिया में उपचुनाव कांग्रेस विधायक राजेन्द्र भारती की विधानसभा सदस्यता खत्म होने की वजह से हो रहा है। और दतिया विधानसभा उपचुनाव चर्चा में इसलिए भी है क्योंकि यहाँ प्रबल दावेदार नरोत्तम मिश्रा की जगह भाजपा ने नए नवेले आशुतोष तिवारी को अपना प्रत्याशी बनाया है। तो माना जा रहा है कि 15 साल तक लगातार तीन बार दतिया से विधायक रहे डॉ.नरोत्तम मिश्रा के समर्थकों को नाराजगी इस बार भाजपा प्रत्याशी पर भारी पड़ सकती है। हालांकि, भाजपा ने खुद को कैडर बेस पार्टी साबित करते हुए आशुतोष तिवारी को चुनाव में जीत दिलाने की बड़ी जिम्मेदारी डॉ. नरोत्तम मिश्रा को ही सौंपकर उनके समर्थकों को अपना मन बदलने के लिए भावनात्मक तौर पर मजबूर करने की कोशिश की है। लेकिन दिल से दादा यानि नरोत्तम मिश्रा से जुड़े दतिया के मतदाता शायद अभी भी असमंजस में नजर आ रहे हैं। मामला यही है कि यदि भाजपा जीती तो संगठन और सरकार सभी के खाते में जीत दर्ज होगी और यदि भाजपा हारी तो डॉ नरोत्तम मिश्रा की नम हुई आंखों और उनके समर्थकों के आक्रोश को कहीं न कहीं हार की वजह मानकर सरकार और संगठन निष्कर्षों की नई इबारत लिखेगा। माना यह भी जाएगा कि भाजपा की जीत और हार का दारोमदार इस बात पर भी है कि दतिया का मतदाता दिल की बात मानता है या दिमाग की। दिमाग की सुनेगा तो सरकार के साथ जाएगा और दिल की सुनेगा तो घनश्याम को जीत की माला पहनते देखकर मन ही मन खुशी मनाएगा।
कोई कितने भी दावे कर ले, लेकिन मतदाता जब मौन रहता है या फिर अति मुखर रहता है, तब-तब सही निष्कर्ष निकालने में कोई भी सफल नहीं हो पाया है। एग्जिट पोलों का हाल किसी से छिपा नहीं है। यह बात सही है कि किसी विधानसभा में यदि सत्तारूढ़ दल का विधायक होता है तब वह क्षेत्रीय विकास के लिए सरकार से जी खोलकर मदद लेने में कोई कसर नहीं छोड़ता है। और सरकार भी पूरी तरह से अपनी पार्टी के विधायकों के प्रति प्रेम बरसाती है। ढाई साल में दतिया और यहां के मतदाता इसका भली-भांति अनुभव कर चुके हैं। लेकिन इस अनुभव
को आधार बनाकर मतदाता अपनी मनोस्थिति को भुलाकर मतदान करने को मजबूर नहीं हो सकते हैं। हालांकि, यदि वह दिमाग की बात मानेंगे, तब निश्चित तौर पर सरकार और सत्तारूढ़ दल के हिस्से में खड़े होते दिखाई देंगे। लेकिन ऐसा ही होगा, इसका दावा कतई नहीं किया जा सकता है। इसका मनोवैज्ञानिक पहलू यह है कि ढाई साल पहले डॉ. नरोत्तम मिश्रा को हार का स्वाद चखाकर मतदाताओं ने अपने मन को संतुष्ट कर लिया था। लेकिन जब इस सीट पर उपचुनाव होना तय हो गया और डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने भाजपा का टिकट घोषित होने के पहले ही मतदाताओं के बीच जाकर माफ़ी मांगने से लेकर हर तरह की मान-मनुहार पूरी कर ली थी। लेकिन जब ऐसी स्थितियों में पार्टी ने उनकी जगह दूसरा प्रत्याशी दतिया को सौंप दिया, तब समर्थकों में डॉ. नरोत्तम मिश्रा के प्रति सहानुभूति की लहर पैदा हुई थी। इसकी भरपाई भाजपा ने डॉ. नरोत्तम मिश्रा को मनाकर और उन्हें दतिया उपचुनाव का एक प्रमुख चेहरा बनाकर करने की कोशिश की थी। अब इस कोशिश पर खरे उतरने का पूरा प्रयास ही डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने करने की कोशिश की है। पर इन कोशिशों के बीच में मतदाताओं का मन प्रभावी भूमिका में है। भाजपा ने यहां पूरा जोर लगाया है तो कांग्रेस ने भी कोई कसर नहीं छोड़ी है। अब फैसला मतदाताओं को लेना है जिन पर कभी भी किसी का भी वश नहीं रहा है। यह अवश्य कहा जा रहा है कि भाजपा के आशुतोष तिवारी और कांग्रेस के घनश्याम सिंह में कांटे की टक्कर है। और यह कांटे की टक्कर कब किस तरफ लुढ़क जाए, इसका कोई भी भरोसा नहीं किया जा सकता है।
दतिया उपचुनाव में मतदान से पहले बीजेपी और कांग्रेस ने प्रचार तेज किया। चुनाव प्रचार थमने के पहले मुख्यमंत्री मोहन यादव ने रोड शो और कुशवाहा सम्मेलन किया, जबकि जीतू पटवारी ने घर-घर जाकर प्रचार किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस गुटबाजी में बंटी है और बांटने की राजनीति करती है, जबकि बीजेपी का एजेंडा केवल विकास, सुशासन और जनसेवा है। उन्होंने जनता से आशुतोष तिवारी की ‘ऐतिहासिक जीत’ सुनिश्चित करने की अपील की। दूसरी ओर, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने दतिया के अलग-अलग इलाकों में छोटी जनसभाएं कीं और घर-घर जाकर वोट मांगे। जीतू पटवारी ने बीजेपी पर हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ दल को जनता का समर्थन नहीं मिल रहा है, इसलिए वह धनबल और सरकारी तंत्र का दुरुपयोग कर रही है।दतिया उपचुनाव को लेकर मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने
कहा कि यह चुनाव अब कांग्रेस बनाम भाजपा का नहीं, बल्कि जनता बनाम सरकार का चुनाव बन चुका है। जीतू पटवारी ने कहा कि नरोत्तम मिश्रा और भाजपा एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। उन्होंने दावा किया कि यह चुनाव जनता की साख का चुनाव है और कांग्रेस को अपनी मेहनत पर पूरा भरोसा है। उनके अनुसार, दतिया की जनता इस बार हाथ के पंजे को 25 हजार वोटों से जीत दिलाएगी।
कुल मिलाकर प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट पर उपचुनाव के लिए मतदान 30 जुलाई 2026 को 291 मतदान केंद्रों पर कड़ी सुरक्षा के बीच हो रहा है, जिसके नतीजे 3 अगस्त 2026 को घोषित किए जाएंगे।दतिया विधानसभा चुनाव 2026 के तहत गुरुवार, 30 जुलाई को मतदान होगा। पिछली बार यानी 2023 के चुनाव में यहां रिकॉर्ड 80.20 फीसदी मतदान हुआ था, ऐसे में सवाल है कि क्या इस बार भी क्षेत्र की जनता रिकॉर्ड मतदान कर अपना पिछला फैसला पलटेगी या रिकॉर्ड मतदान का लाभ भाजपा को नहीं, कांग्रेस को ही मिलेगा। तीन अगस्त को मतगणना के बाद इन सारे सवालों का जवाब मिल जाएगा।
दतिया विधानसभा क्षेत्र में वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में अभी तक का सर्वाधिक 80.20 फीसदी मतदान का रिकॉर्ड बना था। यह 1957 के बाद का सर्वाधिक था। सबसे कम मतदान 1957 में 41.51 प्रतिशत हुआ था। अब ऐतिहासिक जीत-हार के लिए दतिया विधानसभा उपचुनाव का मतदान भी निर्णायक साबित होने वाला है। बात वही है कि भाजपा की जीत-हार का फैसला कैडर बेस पार्टी के कार्यकर्ता ही करेंगे। तो घनश्याम सिंह पर राज परिवार ने ही आरोप लगाते हुए यह अपील कर डाली है कि दतिया का सम्मान और प्रतिष्ठा बचानी है तो फैसला सोच-समझ कर लें। मूल बात यही है कि यदि भाजपा कार्यकर्ताओं ने दिल की मानी तो परिणाम साफ नजर आ रहा है और यदि दिमाग से फैसला लिया, तो भी परिणाम साफ नजर आ रहा है…देखना यह है कि दतिया का मतदाता दिल से फैसला लेता है या दिमाग से…।

कौशल किशोर चतुर्वेदी

कौशल किशोर चतुर्वेदी मध्यप्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार हैं। प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में पिछले ढ़ाई दशक से सक्रिय हैं। पांच पुस्तकों व्यंग्य संग्रह “मोटे पतरे सबई तो बिकाऊ हैं”, पुस्तक “द बिगेस्ट अचीवर शिवराज”, ” सबका कमल” और काव्य संग्रह “जीवन राग” के लेखक हैं। वहीं काव्य संग्रह “अष्टछाप के अर्वाचीन कवि” में एक कवि के रूप में शामिल हैं। इन्होंने स्तंभकार के बतौर अपनी विशेष पहचान बनाई है।वर्तमान में भोपाल और इंदौर से प्रकाशित दैनिक समाचार पत्र “एलएन स्टार” में कार्यकारी संपादक हैं। इससे पहले इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में एसीएन भारत न्यूज चैनल में स्टेट हेड, स्वराज एक्सप्रेस नेशनल न्यूज चैनल में मध्यप्रदेश‌ संवाददाता, ईटीवी मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ में संवाददाता रह चुके हैं। प्रिंट मीडिया में दैनिक समाचार पत्र राजस्थान पत्रिका में राजनैतिक एवं प्रशासनिक संवाददाता, भास्कर में प्रशासनिक संवाददाता, दैनिक जागरण में संवाददाता, लोकमत समाचार में इंदौर ब्यूरो चीफ दायित्वों का निर्वहन कर चुके हैं। नई दुनिया, नवभारत, चौथा संसार सहित अन्य अखबारों के लिए स्वतंत्र पत्रकार के तौर पर कार्य कर चुके हैं