देश में चार बच्चे जन्म लेते हैं तो उनमें से केवल एक हिंदू का होता है… अगर डेमोग्राफी बचानी है तो युवाओं को पांच-पांच बच्चे पैदा करने होंगे।
3 अक्टूबर को बड़वानी के कालिका माता मंदिर परिसर में हुई बैठक में खरगोन के BJP सांसद गजेंद्र सिंह पटेल ने युवाओं से पांच बच्चे पैदा करने की अपील की। उन्होंने कहा कि 30-35 साल की उम्र में शादी और एक बच्चे तक परिवार सीमित रखने से हिंदू समाज की आबादी घट रही है।
पिछले एक दशक में कई नेताओं, कथावाचकों और धर्मगुरुओं ने भी दो से अधिक बच्चे पैदा करने की सलाह दी है। सवाल है कि इनकी अपनी पारिवारिक स्थिति क्या है? क्या देश और मध्य प्रदेश में वाकई जनसंख्या संतुलन बिगड़ रहा है? पांच बच्चों की परवरिश आर्थिक और चिकित्सीय रूप से कितनी व्यावहारिक है?
बड़े परिवार की सलाह देने वाले नेताओं और कथावाचकों की पारिवारिक स्थिति

गजेंद्र सिंह पटेल, सांसद: 31 की उम्र में शादी, दो बेटों के पिता
- बयान: पटेल के मुताबिक, युवा 30-37 साल की उम्र में शादी कर रहे हैं और एक ही बच्चा पैदा कर रहे हैं, जिससे धर्मांतरण और जनसंख्या संतुलन प्रभावित हो रहा है।
- पारिवारिक स्थिति: संसद के आधिकारिक रिकॉर्ड के मुताबिक, पटेल का जन्म 16 फरवरी 1975 को हुआ था। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, उन्होंने 9 मई 2006 को बसंती पटेल से शादी की। उनके दो बेटे हैं।
रामेश्वर शर्मा, विधायक: दो बेटों के पिता हैं
- बयान: शर्मा ने हिंदू परिवारों से कम से कम तीन बच्चे पैदा करने की अपील की।
- पारिवारिक स्थिति: विधानसभा के रिकॉर्ड के मुताबिक, उनकी पत्नी का नाम संगीता शर्मा हैं और उनके दो बेटे हैं।

देवकीनंदन ठाकुर, कथावाचक: एक बेटा, तीन बेटियों के पिता हैं
- बयान: ठाकुर ने पांच बच्चे पैदा करने और कानून बनने तक हर हिंदू परिवार में कम से कम पांच बच्चे होने की अपील की। उनके एक बयान में कहा गया, “5 बच्चे पैदा करो और 25 बच्चों के दादा बनो।”
- पारिवारिक स्थिति: सार्वजनिक बयानों के मुताबिक, ठाकुर के चार बच्चे हैं-एक बेटा और तीन बेटियां।
धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री : अविवाहित हैं
- बयान: शास्त्री ने हिंदू परिवारों से चार बच्चे पैदा करने और एक बच्चे को RSS को समर्पित करने की अपील की।
- पारिवारिक स्थिति: अगस्त 2026 के साक्षात्कार के मुताबिक, शास्त्री अविवाहित हैं और उनकी कोई संतान नहीं है।
महामंडलेश्वर प्रेमानंद पुरी: संन्यासी हैं
निरंजनी अखाड़े के महामंडलेश्वर प्रेमानंद पुरी ने चार बच्चे पैदा करने और उनमें से दो आश्रम को सौंपने की अपील की थी। वे स्वयं संन्यासी हैं।

डॉ. प्रवीण तोगड़िया (अंतरराष्ट्रीय हिंदू परिषद) : दो बच्चों के पिता हैं
- बयान: तोगड़िया ने ‘तीन बच्चे-हिंदू सच्चे’ अभियान चलाया। मंडला में उन्होंने तीसरे बच्चे की स्कूल फीस भरवाने की बात कही।
- पारिवारिक स्थिति: उपलब्ध जानकारी के अनुसार, तोगड़िया की पत्नी रश्मी तोगड़िया हैं और उनके दो बच्चे, एक बेटा और एक बेटी हैं।
विष्णु राजोरिया, पूर्व अध्यक्ष परशुराम कल्याण बोर्ड: 1 लाख इनाम पाओ
मध्य प्रदेश परशुराम कल्याण बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष विष्णु राजोरिया ने पिछले साल जनवरी में चार बच्चे पैदा करने वाले परिवार को ₹1 लाख इनाम देने की घोषणा की थी। उन्होंने कहा था कि देश में विधर्मियों की संख्या बढ़ रही है।
जनसंख्या के आंकड़े क्या बताते हैं?
राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण और प्यू (Pew) रिसर्च सेंटर के आंकड़ों के मुताबिक, पिछले तीन दशकों में हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदायों की कुल प्रजनन दर घटी है।
आंकड़ों के अनुसार, हिंदू महिलाओं की औसत प्रजनन दर 1992 में 3.3 से घटकर 2019-21 में 1.9 और मुस्लिम महिलाओं की 4.4 से घटकर 2.4 रह गई। इन आंकड़ों में दोनों समुदायों के बीच प्रजनन दर का अंतर कम होने का संकेत मिलता है।

आर्थिक गणित: ₹1.69 लाख सालाना प्रति व्यक्ति आय
पांच बच्चों की परवरिश का खर्च समझने के लिए मुख्यमंत्री बाल आशीर्वाद योजना की सहायता राशि को आधार माने, तो योजना के तहत पात्र बच्चों को ₹4,000 मासिक, यानी ₹48,000 सालाना दिए जाते हैं।
इस दर से तीन बच्चों के लिए सालाना ₹1.44 लाख और पांच बच्चों के लिए ₹2.40 लाख की राशि बनती है। इसके मुकाबले मध्य प्रदेश के आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के मुताबिक प्रति व्यक्ति औसत वार्षिक आय ₹1,69,050 है।
हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि योजना की सहायता राशि को बच्चों की वास्तविक परवरिश का न्यूनतम खर्च माना नहीं जा सकता। प्रत्येक परिवार अपनी आर्थिक हैसियत के हिसाब से बच्चों की परवरिश करता है।

एक्सपर्ट बोले: पांच बच्चों की शिक्षा और रोजगार की जिम्मेदारी कौन उठाएगा?
समाजशास्त्री प्रोफेसर हेमंत खंडई के मुताबिक, बच्चों की संख्या तय करना पति-पत्नी का निजी फैसला है, लेकिन बड़े परिवार की योजना बनाते समय आर्थिक संसाधनों पर भी विचार करना चाहिए।
उन्होंने सवाल उठाया कि ₹20 हजार मासिक कमाने वाला व्यक्ति पांच बच्चों की परवरिश कैसे करेगा, खासकर तब जब स्वास्थ्य सेवाओं और प्रसव संबंधी सुविधाओं की उपलब्धता भी चुनौती हो सकती है।
उन्होंने यह भी पूछा कि बच्चों की शिक्षा और भविष्य की जिम्मेदारी कौन उठाएगा?

‘बार-बार या कम अंतराल में गर्भधारण से एनीमिया का जोखिम बढ़ सकता है’
स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. श्रद्धा अग्रवाल के मुताबिक, बार-बार या कम अंतराल में गर्भधारण से महिलाओं में एनीमिया का जोखिम बढ़ सकता है। इससे समय से पहले प्रसव और प्रसव के दौरान अत्यधिक रक्तस्राव जैसी जटिलताओं का खतरा भी बढ़ सकता है।
कई बार महिलाएं अनचाहे गर्भ को गिराने के लिए अप्रशिक्षित लोगों के पास चली जाती हैं, जिससे इंफेक्शन बढ़ता है। आजादी से पहले देश में प्रजनन दर 6.5 थी जो घटकर 2 पर आ चुकी है।
