अब सीजेपी के मंतर को नहीं चलने देगी मोदी सरकार… कौशल किशोर चतुर्वेदी

अब सीजेपी के मंतर को नहीं चलने देगी मोदी सरकार…

जंतर मंतर पर सीजेपी के पहले प्रदर्शन के बाद केंद्र की मोदी सरकार ने तय कर लिया था कि भविष्य में दूसरी बार अभिजीत दिपके और उनके समर्थकों
को इस्तीफे का मंतर पढ़ने का मौका नहीं दिया जाएगा। धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफे के बाद जहाँ सीजेपी का हौसला बुलंद है, तो मोदी सरकार ने भी सीजेपी की पूरी सुध लेने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। जंतर मंतर पर सीजेपी का कोई परिंदा भी पर नहीं मार पाए, ऐसी पूरी व्यवस्था की गई है। वहीं पूरे देश में मोदी सरकार एलर्ट मोड पर है। और तय रणनीति के मुताबिक ही सीजेपी के नाम पर मोदी सरकार को घेरने का अब कोई मौका दीपके एंड कंपनी को नहीं दिया जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट में शनिवार को दो याचिका दायर कर अधिकारियों के खिलाफ अवमानना कार्रवाई की मांग की गई है।
एक याचिका में याचिका में आरोप लगाया गया है कि 10 अक्टूबर को ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (सीजेपी) के प्रदर्शन के मद्देनजर दिल्ली में मेट्रो और ट्रेनों की आवाजाही पूरी तरह बंद न करने के सुप्रीम कोर्ट के आदेश का खुला उल्लंघन किया गया है। दूसरी याचिका में विपक्षी नेताओं, वकीलों और पत्रकारों की हिरासत को चुनौती देने वाली बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका है। दोनों याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट 11 अक्टूबर रविवार को विशेष सुनवाई करेगा। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची और वी मोहना की पीठ इन मामलों की सुनवाई करेगी। एडवोकेट शैलेंद्र मणि त्रिपाठी द्वारा दायर इस याचिका में केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन, दिल्ली पुलिस कमिश्नर अनुराग कुमार और डीएमआरसी अध्यक्ष डी. थारा को प्रतिवादी बनाया गया है। याचिका में इसे नागरिकों के मौलिक अधिकारों पर क्रूर हमला करार दिया गया है।
विरोध प्रदर्शन के मद्देनजर 57 मेट्रो स्टेशनों को बंद करने और दिल्ली आने वाली ट्रेनों को रद करने के खिलाफ एक अलग याचिका की सुनवाई के दौरान प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने 9 अक्टूबर को अपने आदेश में कहा था कि कानून लागू करने वाली एजेंसियों को व्यवस्था बनाए रखने का अधिकार है। लेकिन प्रदर्शन के नाम पर नागरिकों को अत्यधिक परेशान नहीं किया जा सकता और दिल्ली आने वाली ट्रेनों एवं मेट्रो की आवाजाही पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं होना चाहिए। याचिका में इसी निर्देश की अवहेलना का दावा किया गया है।
खैर दिपके ने कहा है कि दिल्ली में कई ट्रेनों को रद्द करने सहित अभूतपूर्व बंद के बीच सरकार “डरी हुई” है। पुलिस ने मुंबई एयरपोर्ट पर ही दीपके और उनके साथियों को गिरफ्तार कर लिया है। मोदी सरकार उसी तर्ज पर काम कर रही है कि दूध का जला छाछ भी फूंक फूंक कर पीता है। अगर सीजेपी की मांग पर मोदी सरकार इस्तीफों का बाज़ार चलने देगी तब सरकार अपना अस्तित्व ही खोने को मजबूर हो जाएगी। ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा यदि होता है, तब एक तरह से मोदी सरकार पूरी तरह से बैकफुट पर चली जाएगी। और ऐसी स्थिति में भाजपा, सरकार में रहते हुए भी बेसहारा साबित होगी। वहीं दूसरी तरफ सीजेपी के नाम पर अभिजीत दीपके और उनकी टीम देश को बचाने के नाम पर सत्ता में आने का कोई मौका नहीं छोड़ेगी। और फिर उसके आगे वही होगा जिस तरह केजरीवाल दिल्ली के दो बार मुख्यमंत्री रहने के साथ साथ प्रधानमंत्री बनने की हसरत लिए ही सत्ता से विदा हुए।
मोदी सरकार अब सीजेपी के मंतर को नहीं चलने देगी…लेकिन सबकी नजर छुट्टी के दिन सुप्रीम कोर्ट के सीजेपी से संबंधित याचिकाओं पर सुनवाई और फैसले को लेकर है। और तभी साफ होगा किसी सीजेपी का मन्तर इस बार चल पाएगा अथवा नहीं…।

कौशल किशोर चतुर्वेदी

कौशल किशोर चतुर्वेदी मध्यप्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार हैं। प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में पिछले ढ़ाई दशक से सक्रिय हैं। पांच पुस्तकों व्यंग्य संग्रह “मोटे पतरे सबई तो बिकाऊ हैं”, पुस्तक “द बिगेस्ट अचीवर शिवराज”, ” सबका कमल” और काव्य संग्रह “जीवन राग” के लेखक हैं। वहीं काव्य संग्रह “अष्टछाप के अर्वाचीन कवि” में एक कवि के रूप में शामिल हैं। इन्होंने स्तंभकार के बतौर अपनी विशेष पहचान बनाई है।वर्तमान में भोपाल और इंदौर से प्रकाशित दैनिक समाचार पत्र “एलएन स्टार” में कार्यकारी संपादक हैं। इससे पहले इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में एसीएन भारत न्यूज चैनल में स्टेट हेड, स्वराज एक्सप्रेस नेशनल न्यूज चैनल में मध्यप्रदेश‌ संवाददाता, ईटीवी मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ में संवाददाता रह चुके हैं। प्रिंट मीडिया में दैनिक समाचार पत्र राजस्थान पत्रिका में राजनैतिक एवं प्रशासनिक संवाददाता, भास्कर में प्रशासनिक संवाददाता, दैनिक जागरण में संवाददाता, लोकमत समाचार में इंदौर ब्यूरो चीफ दायित्वों का निर्वहन कर चुके हैं। नई दुनिया, नवभारत, चौथा संसार सहित अन्य अखबारों के लिए स्वतंत्र पत्रकार के तौर पर कार्य कर चुके हैं।

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