
अमेरिका बता रहा है कि लोकतन्त्र
अराजकता को खत्म करने में सक्षम है…
भारत में इन दिनों लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ, रैलियां सबका ध्यान अपनी ओर खींच रही हैं। बड़ी बात यह है कि भारत में सत्तारूढ़ दल भारतीय जनता पार्टी द्वारा ही लोकतंत्र बचाओ के जरिए पूरे देश में कांग्रेस द्वारा
वोट चोरी और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे को लेकर चलाई जा रही मुहिम के खिलाफ जन-जन को जागरूक करते हुए लोकतंत्र बचाने की अपील की जा रही है। जबकि दुनिया के बड़े लोकतंत्रों में से एक, संयुक्त राज्य अमेरिका में हुए मिड टर्म इलेक्शन ने यह साबित कर दिया है कि लोकतन्त्र सबसे ज्यादा ताकतवर है। और
जब-जब लोकतंत्र को कमजोर करने की कोशिश हुई है, तब-तब लोकतंत्र ने
यह साबित कर दिया है कि उसे कोई कमजोर नहीं कर सकता। भारत में आपातकाल के बाद इंदिरा सरकार की विदाई इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। तो दस साल राज करने के बाद भाजपा के चार सौ पार के नारे को भी लोकतंत्र ने गलत साबित कर दिया था। बात फिर अमेरिका की करें तो ट्रंप ने पूरी दुनिया में आपातकाल जैसी स्थिति निर्मित कर दी थी। अमेरिका में हुए मिड टर्म इलेक्शन में मतदाताओं ने ट्रंप को आईना दिखाते हुए रिपब्लिकन पार्टी को बुरी तरह से नकार दिया है। और अमेरिका के दोनों सदनों में डेमोक्रेट्स का बहुमत हो गया है। ट्रंप अब
ऐसी दादागिरी नहीं कर पाएंगे जैसा उन्होंने दो साल में पूरी दुनिया को परेशान कर रखा था। दूसरी बार राष्ट्रपति बनने के बाद ऐसा लगने लगा था कि ट्रंप दुनिया के सबसे ताकतवर नेता हैं और अमेरिका का लोकतन्त्र कमजोर नजर आ रहा था। मिड टर्म इलेक्शन के बाद ट्रंप कमजोर नजर आ रहे हैं और अमेरिकी लोकतंत्र ताकतवर दिख रहा है। यह लोकतन्त्र के साथ खिलवाड़ का नतीजा ही ट्रंप को भुगतना पड़ रहा है।
तो अमेरिकी मिडटर्म चुनाव में डेमोक्रेट्स ने जीत हासिल की है। उन्होंने कांग्रेस में बहुमत हासिल कर लिया है। आम तौर पर इन चुनावों में मौजूदा राष्ट्रपति की पार्टी का प्रदर्शन खराब रहता है लेकिन रिपब्लिकन पार्टी की इस हार को अलग नजरिए से देखा जा रहा है। अमेरिकी वोटर घरेलू सामान की बढ़ती क़ीमतों से जूझ रहे हैं। इन चुनावों में अमेरिकी मतदाताओं ने इसका हिसाब चुका दिया है। बढ़ती महंगाई का एक बड़ा कारण ईरान के साथ युद्ध है। इसे अमेरिका और इजराइल ने फरवरी में शुरू किया था। इसके बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई में होर्मुज स्ट्रेट को बंद कर दिया। इससे ईंधन की कीमतें तेजी से बढ़ गईं। युद्ध का ये फैसला ज्यादातर अमेरिकियों को पसंद नहीं आया। ‘अमेरिका फर्स्ट’ अभियान में ट्रंप ने भविष्य में कोई युद्ध न करने का वादा किया था,लेकिन ऐसा नहीं हुआ। अमेरिकी मतदाताओं ने वादा तोड़ने और अमेरिका की शांति भंग करने का करारा जवाब ट्रंप को दे दिया है। जिन दो मुद्दों यानी बढ़ती कीमतें और ईरान युद्ध पर वोटर सबसे ज्यादा नाखुश थे वो सीधे राष्ट्रपति ट्रंप से जुड़े थे। इससे रिपब्लिकन वोटरों के बीच भी उनकी लोकप्रियता रेटिंग गिर गई थी। इससे 2024 में जिन राज्यों में उनकी जीत हुई थी। वहां भी पार्टी अच्छा नहीं कर पाई।
अमेरिका के मध्यावधि चुनाव में डोनाल्ड ट्रंप की पार्टी की करारी हार पर ईरान ने उनपर बहुत बड़ा प्रतिक्रियात्मक हमला बोला है। भारत में ईरानी दूतावास ने अपने एक्स हैंडल पर एक एआई वीडियो शेयर किया है। इसके कैप्शन में जोरदार ठहाके वाले इमोजी लगाकर डोनाल्ड ट्रंप की खिल्ला उड़ाई गई है। वीडियो में दिख रहा है कि चार लोग अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को व्हाइट हाउस से निकालकर कूड़े के डिब्बे में फेंक रहे हैं। कूड़े के डिब्बे पर लिखा है ‘खतरनाक कूड़ा।’ कैप्शन में लिखा है, ‘द यूएस मिडटर्म इलेक्शन। ठहाके वाला इमोजी।’
दरअसल, अमेरिकी मिडटर्म चुनाव में अमेरिकी संसद में हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव और सीनेट दोनों जगहों पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी का कंट्रोल खत्म हो गया है और दोनों सदनों में विपक्षी डेमोक्रेट्स हावी हो गए हैं। 100 सीटों वाली सीनेट और हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव में डेमोक्रेट्स का न सिर्फ कब्जा हो गया है, बल्कि बराक ओबामा की पार्टी को 2008 के बाद सबसे बड़ी बढ़त मिली है। पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के अनुसार अमेरिकी जनता ने स्पष्ट संदेश दिया है। वे ऐसी राजनीति चाहते हैं, जो लोगों को साथ लाए, न कि उन्हें बांटे और ऐसा नेता को चाहते हैं, जो उनके सामने आने वाली चुनौतियों का ठोस समाधान करके दें। यूएसस्टॉक मार्केट डोनाल्ड ट्रंप की हार के बाद अचानक तूफानी तेजी पकड़े हुए दिखे। डाउ जोन्स ने तो ऐसा गदर काटा कि इसमें आई रैली बीते 18 महीने में सबसे तेज रही।
तो अमेरिका में हुए मिड टर्म इलेक्शन में ट्रंप की रिपब्लिकल पार्टी, डेमोक्रेटिक पार्टी से हार गई है और प्रतिनिधि सभा में अपना बहुमत गवां चुकी है। सभी 435 सीटों पर चुनाव हुए थे और इसमें डेमोक्रेटिक पार्टी ने 228 सीटें जीतीं, जबकि रिपब्लिकन पार्टी को 139 सीटें मिलीं। बता दें कि सदन में बहुमत के लिए 218 सीटों की जरूरत होती है।
तो मूल बात यही है कि लोकतंत्र दुनिया में कहीं भी खतरे में नहीं है। तानाशाही लोकतंत्र की दुश्मन है। और तानाशाही से लिए गए फैसले लोकतंत्र में हास्यास्पद ही साबित होते हैं। इसलिए लोकतंत्र को बचाने की जरूरत नहीं है बल्कि लोकतन्त्र से ताकत मिलने पर खुद को संतुलित रखने की जरूरत है।अमेरिका बता रहा है कि लोकतन्त्र
अराजकता को खत्म करने में सक्षम है… और लोकतंत्र ही सबसे ज्यादा ताकतवर है।

कौशल किशोर चतुर्वेदी
कौशल किशोर चतुर्वेदी मध्यप्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार हैं। प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में पिछले ढ़ाई दशक से सक्रिय हैं। पांच पुस्तकों व्यंग्य संग्रह “मोटे पतरे सबई तो बिकाऊ हैं”, पुस्तक “द बिगेस्ट अचीवर शिवराज”, ” सबका कमल” और काव्य संग्रह “जीवन राग” के लेखक हैं। वहीं काव्य संग्रह “अष्टछाप के अर्वाचीन कवि” में एक कवि के रूप में शामिल हैं। इन्होंने स्तंभकार के बतौर अपनी विशेष पहचान बनाई है।वर्तमान में भोपाल और इंदौर से प्रकाशित दैनिक समाचार पत्र “एलएन स्टार” में कार्यकारी संपादक हैं। इससे पहले इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में एसीएन भारत न्यूज चैनल में स्टेट हेड, स्वराज एक्सप्रेस नेशनल न्यूज चैनल में मध्यप्रदेश संवाददाता, ईटीवी मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ में संवाददाता रह चुके हैं। प्रिंट मीडिया में दैनिक समाचार पत्र राजस्थान पत्रिका में राजनैतिक एवं प्रशासनिक संवाददाता, भास्कर में प्रशासनिक संवाददाता, दैनिक जागरण में संवाददाता, लोकमत समाचार में इंदौर ब्यूरो चीफ दायित्वों का निर्वहन कर चुके हैं। नई दुनिया, नवभारत, चौथा संसार सहित अन्य अखबारों के लिए स्वतंत्र पत्रकार के तौर पर कार्य कर चुके हैं।