उज्जैन में महामंडलेश्वर शांति स्वरूपानंद को हनीट्रैप में फंसाकर बदनाम करने और वसूली की साजिश का खुलासा, 50 हजार का लालच देकर बनारस से बुलाई गई महिला; साध्वी मंदाकिनी पुरी और घनश्याम पटेल पर केस दर्ज

उज्जैन के प्रसिद्ध चारधाम मंदिर के महामंडलेश्वर शांति स्वरूपानंद महाराज को हनी ट्रैप में फंसाकर ब्लैकमेल करने की साजिश का पर्दाफाश हुआ है। मामले में पुलिस ने पूर्व महामंडलेश्वर साध्वी मंदाकिनी पुरी और उनके साथी घनश्याम पटेल के खिलाफ केस दर्ज किया है।

दोनों पर आरोप है कि उन्होंने शांति स्वरूपानंद की छवि खराब करने और उनसे अवैध वसूली के मकसद से यह जाल बुना था। जांच में ये बात सामने आई है कि आरोपियों ने साजिश को अंजाम देने बनारस की एक महिला को पैसों का लालच देकर अपनी टीम में शामिल किया था।

योजना ये थी कि महिला के जरुए महामंडलेश्वर पर बलात्कार का झूठा आरोप लगवाया जाए और फिर केस वापस लेने के बदले उन्हें ब्लैकमेल किया जाए। पुलिस की सक्रियता के कारण यह साजिश समय रहते उजागर हो गई और मुख्य आरोपियों की भूमिका स्पष्ट हो गई।

पूछताछ के दौरान यह भी पता चला है कि साध्वी मंदाकिनी पुरी का पुराना आपराधिक रिकॉर्ड रहा है और वह पहले भी किसी अन्य मामले में जेल की हवा खा चुकी हैं।

वर्तमान में पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है और इस नेटवर्क से जुड़े अन्य पहलुओं की गहराई से पड़ताल की जा रही है ताकि इस षड्यंत्र की पूरी सच्चाई सामने आ सके।

साध्वी मंदाकिनी पुरी पर साजिश रचने के आरोप हैं।

अश्लील फोटो वायरल करने की धमकी

महाकाल थाना प्रभारी गगन बादल के अनुसार, रंगपंचमी के दिन दत्त अखाड़ा परिसर में कुछ संदिग्ध लोगों के पकड़े जाने की सूचना मिली थी। महंत आनंदपुरी महाराज ने पकड़े गए लोगों को पुलिस के हवाले किया। पुलिस ने मौके से एक महिला को पूछताछ के लिए थाने लाकर वीडियो फुटेज और अन्य तथ्यों की जांच की।

महिला ने पुलिस को बताया कि 27 फरवरी को घनश्याम पटेल उससे मिलने बनारस आया था। उसने 50 हजार रुपए देने का लालच देकर उज्जैन आकर महामंडलेश्वर के खिलाफ झूठा रेप केस दर्ज कराने को कहा। जब महिला ने मना किया तो उसे धमकाया गया कि उसके अश्लील फोटो वायरल कर दिए जाएंगे।

डर के कारण महिला घनश्याम से संपर्क में रही। घनश्याम ने उसके बेटे के मोबाइल पर 2000 रुपए भेजे और उज्जैन आने के लिए संजय ट्रैवल्स से टिकट भी बुक कराया।

काली शर्ट में दूसरा आरोपी घनश्याम पटेल।

रंगपंचमी पर अखाड़े में पकड़े गए आरोपी

8 मार्च को रंगपंचमी के दिन घनश्याम पटेल अपने साथियों के साथ उज्जैन के दत्त अखाड़ा परिसर पहुंचा था। आरोप है कि यहां वह महिला के बयान रिकॉर्ड कर रहा था। इसी दौरान आनंदपुरी महाराज, पंडित लोकेश शर्मा और संजय गोस्वामी वहां पहुंच गए। उन्हें पूरे मामले की जानकारी मिली तो उन्होंने तुरंत पुलिस अधीक्षक प्रदीप शर्मा को सूचित किया। इसके बाद पुलिस ने जांच शुरू की।

महिला के बयान और मोबाइल की जांच के बाद पुलिस ने साध्वी मंदाकिनी पुरी निवासी गढ़कालिका और घनश्याम पटेल के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया है। थाना प्रभारी गगन बादल ने बताया कि मामले की जांच जारी है और कुछ अन्य लोगों के नाम भी सामने आए हैं।

आरोप लगाने वाली महिला के वीडियो भी आए सामने

इधर एफआईआर दर्ज होने के बाद घनश्याम पटेल ने भी महिला के कुछ वीडियो वायरल किए, जिसमें वो महामंडलेश्वर शांति स्वरूपानंद महाराज पर गंभीर आरोप लगा रही है। एक पत्र सोशल मीडिया पर जारी किया है।

उसने उसी महिला पर आरोप लगाते हुए कहा कि महिला का इंटरव्यू नहीं चलाने और एक लाख रुपए एक्सटॉर्शन मनी नहीं देने के कारण मेरे खिलाफ महिला ने अपने साथियों के साथ मिलकर षड्यंत्र पूर्वक फर्जी FIR कराई है।

पटेल ने कहा कि वीडियो एविडेंस एक्ट की धारा 64C के सर्टिफिकेट के साथ भेजा है। पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच के आदेश देकर दोषी महिला के विरुद्ध FIR दर्ज की जाना चाहिए।

कुछ लोग कब्जा करना चाहते हैं, साजिश रच रहे : महामंडलेश्वर

मामले में महामंडलेश्वर शांति स्वरूपानंद ने कहा कि कुछ लोग चार धाम मंदिर पर कब्जा करना चाहते हैं। इसी वजह से वे साजिश रचकर बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं।

महामंडलेश्वर शांति स्वरूपानंद।

महामंडलेश्वर की उपाधि दिलाने के नाम पर लाखों की ठगी के आरोप

6 मई 2024 की रात निरंजनी अखाड़े के महंत सुरेश्वरानंद पुरी ने उज्जैन के चिमनगंज मंडी थाने में मंदाकिनी पुरी उर्फ ममता जोशी के खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज कराया था। उन्होंने पुलिस को बताया कि मंदाकिनी पुरी ने उन्हें श्री पंचायती निरंजनी अखाड़े में महामंडलेश्वर की उपाधि दिलाने का भरोसा दिया था।

इसके बदले 15 अप्रैल 2024 को उन्होंने मंदाकिनी को करीब साढ़े सात लाख रुपए दिए। जब उन्होंने अखाड़ा मुख्यालय से संपर्क किया तो वहां से पता चला कि अखाड़े में उपाधि के लिए पैसे नहीं लिए जाते। इसके बाद उन्होंने मंदाकिनी से अपने पैसे वापस मांगे, लेकिन मंदाकिनी ने पैसे लौटाने से मना कर दिया।

10 मई को जयपुर के महामंडलेश्वर नर्मदाशंकर ने भी उज्जैन के महाकाल थाने में एफआईआर दर्ज कराई। उन्होंने आरोप लगाया कि मंदाकिनी पुरी ने उन्हें आचार्य महामंडलेश्वर बनाने का झांसा देकर उनसे 8 लाख 90 हजार रुपए लिए। यह रकम उन्होंने सात महीनों में अलग-अलग किस्तों में ऑनलाइन ट्रांसफर की थी।

नर्मदाशंकर के मुताबिक मंदाकिनी ने कहा था कि अखाड़े में प्रमोशन हो जाएगा, लेकिन इसके लिए 10 से 12 लाख रुपए खर्च होंगे। उन्होंने बताया कि वे पहले निजी स्कूल में शिक्षक थे और बाद में संत बने, इसलिए उनके पास इतनी बड़ी रकम नहीं थी, तब मंदाकिनी ने उनसे कहा कि जितने पैसे हो सकें, धीरे-धीरे भेजते रहें।

इसी दौरान मंदाकिनी ने उन्हें कुछ अन्य लोगों के बैंक खाते में भी पैसे भेजने के लिए कहा, लेकिन उन्होंने ऐसा करने से मना कर दिया।

कीटनाशक पीकर सुसाइड करने की कोशिश

अस्पताल से छुट्टी मिलते ही पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया था।

उपाधि दिलाने के नाम पर पैसे लेने के आरोप सामने आने के बाद अखाड़े ने मंदाकिनी पुरी को निकाल दिया। इसके बाद 7 मई की सुबह करीब 11 बजे मंदाकिनी ने कीटनाशक पी लिया था। आईसीयू में उनका इलाज चला। उस समय उनकी हालत ऐसी थी कि वे किसी को पहचान भी नहीं पा रही थीं, इसलिए पुलिस उनके बयान नहीं ले सकी थी। अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद पुलिस उन्हें अपने साथ ले गई थी।

हर्बल प्रोडक्ट मामले में भी शिकायत

इसके अलावा जयपुर के एक व्यापारी ने भी मंदाकिनी पुरी पर धोखाधड़ी का आरोप लगाया है। व्यापारी ने अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष रवींद्र पुरी से शिकायत की कि मंदाकिनी ने उसकी कंपनी से हर्बल जूस खरीदे और उन पर अपनी फोटो लगाकर मां आरोग्यम मंदाकिनी नाम से स्टॉक तैयार कराया। आरोप है कि उन्होंने इस सामान के पैसे नहीं दिए और एक्सपाइरी डेट निकलने के बाद पूरा माल वापस कंपनी को भेज दिया। व्यापारी का कहना है कि इस वजह से उसे करीब 2 लाख रुपए का नुकसान हुआ।

जानिए मंदाकिनी कैसे बनी महामंडलेश्वर

ममता जोशी उर्फ मंदाकिनी पहले संतों के धार्मिक आयोजनों में रसोई बनाने का काम करती थीं। इस दौरान वे साधु-संतों के संपर्क में आईं। खुद को संन्यासी बताकर अनंतानंद महाराज की मदद से तत्कालीन अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष नरेंद्र गिरि महाराज से संपर्क बढ़ाया।

2016 में उज्जैन सिंहस्थ के दौरान खुद को अविवाहित बताकर संन्यासी बताया। मंगलनाथ रोड पर जमीन, रेस्टॉरेंट और आश्रम की झूठी जानकारी भी संतों को दी। सभी संत उनकी बातों में आ गए। इसके बाद सिंहस्थ के दौरान निरंजनी अखाड़े में हुए पट्‌टाभिषेक कार्यक्रम के दौरान मौजूद अखाड़ा परिषद अध्यक्ष रवींद्र पुरी महाराज ने उन्हें महामंडलेश्वर बना दिया।

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