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सबक सिखाती त्रासदी…
मध्य प्रदेश में 30 अप्रैल 2026 का दिन बहुत ही त्रासदी भरा रहा। 30 अप्रैल 2026 को मध्य प्रदेश में भीषण गर्मी के बीच मौसम बदलने का पूर्वानुमान था। इनमें जबलपुर जिला भी शामिल था। इसके बावजूद बरगी डैम में पर्यटकों को लुभाने के लिए क्रूज का संचालन किया गया और आँधी के साथ बदले मौसम ने क्रूज को काल बनने पर मजबूर कर दिया। सरकारी आंकड़ों में क्रूज पर सवार होने के लिए 29 टिकट जारी करने की बात कही गई है। 15 लोगों को बचाने और 4 की मौत का आंकड़ा बताया गया है। चर्चाओं में क्रूज पर 40 लोगों के सवार होने और मौत का आंकड़ा ज्यादा होने की बातें सामने आती रहीं। मन दु:खी होता रहा और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सहित सभी जिम्मेदारों ने पीड़ा जाहिर करते हुए
इस दु:ख में सहभागिता भी की। लेकिन सबसे बड़ी विडम्बना यह है कि इस त्रासदी का जिम्मेदार कौन है? मौसम
गुनहगार है या मौसम की परवाह न करने वाले। इसमें क्रूज परिचालन के जिम्मेदारों के साथ ही और किस-किस की जिम्मेदारी बनती है।
सरकारी खबर पर एक नजर डालते हैं।मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने जबलपुर में तेज आंधी-तूफान के कारण बरगी डैम में हुए क्रूज हादसे पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा कि यह हादसा पीड़ादायक है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह और पर्यटन मंत्री धर्मेंद्र सिंह लोधी को तत्काल प्रभावित क्षेत्र में पहुंचने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जबलपुर संभाग प्रभारी एसीएस, एडीजी और स्थानीय जनप्रतिनिधियों को भी मौके पर पहुंचने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस हादसे में दिवंगत नागरिकों के परिजन को 4-4 लाख रुपए की आर्थिक सहायता स्वीकृत की है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि संकट की इस घड़ी में राज्य सरकार पूरी संवेदनशीलता के साथ प्रभावित परिवारों के साथ खड़ी है। प्रभावित व्यक्तियों और परिवारों को हर संभव सहायता सुनिश्चित की जा रही है।
स्थानीय प्रशासन की सहायता से रेस्क्यू फोर्स सक्रिय है। त्वरित बचाव कार्य से 15 नागरिकों को सकुशल बचा लिया गया है। जो नागरिक लापता हैं, उन्हें जल्द से जल्द ढूंढने का प्रयास किया जा रहा है। प्राप्त जानकारी के अनुसार पर्यटन विभाग और क्रूज संचालन का प्रबंधन और पर्यटकों के भ्रमण का दायित्व संभालने वाले व्यक्तियों द्वारा लाइफ सेविंग जैकेट की व्यवस्था से जानें बचाने में सफलता मिली। उल्लेखनीय है कि जबलपुर में तेज आंधी तूफान के कारण हुए क्रूज हादसे के पश्चात 15 व्यक्तियों को सुरक्षित बचा लिया गया है। हादसे में चार व्यक्तियों की मृत्यु की पुष्टि हुई है। शेष व्यक्ति की तलाश और बचाव कार्य युद्ध स्तर पर चल रहा है। जबलपुर कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक सहित एसडीआरएफ एवंअन्य बचाव दल घटना स्थल पर मौजूद रहकर राहत और बचाव कार्य में सक्रिय हैं।
शायद सरकारी जिम्मेदारी यहां पर खत्म हो जाती है। सरकार सहित इस घटना ने सबको झकझोर कर रख दिया है। पर सवाल यह है कि आखिर इतना अपडेट मौसम अलर्ट होने के बाद भी क्रूज को चलाने की अनुमति कैसे दी गई? इस घटना के बाद, मैंने भी सालों बाद मौसम बुलेटिन की खोज की और देखा कि मौसम विभाग ने जबलपुर में तेज हवाओं के चलने का येलो अलर्ट जारी किया था। 40-50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाओं के चलने का अलर्ट था। इसके बावजूद नर्मदा नदी में क्रूज चलाने दिया गया। क्रूज जब नर्मदा नदी में था तब भी तेज हवायें चल रही थीं, इसके बावजूद क्रूज का संचालन जारी रहा। और यही हादसे का कारण बना। आखिर क्या यह काल को खुली चुनौती देने जैसा दुस्साहस नज़र नहीं आ रहा है। दूसरा, यदि लाइफ जैकेट सभी लोग पहने थे, तब बड़ी संख्या में मौतों का असली कारण क्या बना? यह भी बहुत बड़ा सवाल है। या फिर लोगों की जिंदगी के साथ हर कदम पर खिलवाड़ हो रहा था। इन सभी मामलों की गहन पड़ताल करने की जरूरत है। यह कोई पहली त्रासदी नहीं है। त्रासदी आती है और सबक सिखाकर चली जाती है। लेकिन हम कुछ भी सीखने को तैयार नहीं हैं। 2028 में प्रदेश में होने वाले आस्था के पर्व सिंहस्थ को किसी भी दुर्घटना से मुक्त बनाने का संकल्प लिया गया है। फिर मौसम के बेईमानी का अलर्ट जारी होने के बाद भी हम अपना कर्तव्य ईमानदारी से क्यों नहीं निभा पा रहे हैं? समस्या यहां खत्म नहीं हो जाती कि क्रूज दुर्घटना में लापरवाही बरतने वाले अफसरों या कर्मचारियों को फांसी पर चढ़ा दिया जाए और हम फिर से अगली दुर्घटना का इंतजार करते रहें। दरअसल होता यही है। यहाँ चुनौती सिस्टम को पूरी तरह से सुधारने की है। पर यह सिस्टम कब सुधरेगा? इसकी गारंटी शायद ही कोई ले पाए। और जब तक पूरा सिस्टम नहीं सुधरता। तब तक त्रासदी सबक सिखाती रहेगी और हम त्रासदी को ठेंगा दिखाते रहेंगे। निर्दोष पर्यटक काल के गाल में समाते रहेंगे और जिम्मेदार लोग संवेदनशीलता दिखाते रहेंगे। एक बड़ा सवाल यह भी है कि कभी सागर जिले में दीवार गिरने से दबकर हुई मौतों के मामले में मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने तत्कालीन कलेक्टर और एसपी को हटाने में देर नहीं की थी। मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव अन्य जिलों में भी लापरवाही होने पर ऐसे कड़े एक्शन लेते रहे हैं। तो अब क्या जबलपुर में भी मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव का इस तरह का आक्रोश नजर आने वाला है। हालांकि, मौसम के अलर्ट की तरह मुख्यमंत्री के एक्शन का पूर्वानुमान नहीं लगाया जा सकता है, लेकिन यह बात सही है कि ऐसी घटनाओं की अनदेखी नहीं की जा सकती है और इनसे सबक लेना ही चाहिए…।

कौशल किशोर चतुर्वेदी
कौशल किशोर चतुर्वेदी मध्यप्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार हैं। प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में पिछले ढ़ाई दशक से सक्रिय हैं। पांच पुस्तकों व्यंग्य संग्रह “मोटे पतरे सबई तो बिकाऊ हैं”, पुस्तक “द बिगेस्ट अचीवर शिवराज”, ” सबका कमल” और काव्य संग्रह “जीवन राग” के लेखक हैं। वहीं काव्य संग्रह “अष्टछाप के अर्वाचीन कवि” में एक कवि के रूप में शामिल हैं। इन्होंने स्तंभकार के बतौर अपनी विशेष पहचान बनाई है।वर्तमान में भोपाल और इंदौर से प्रकाशित दैनिक समाचार पत्र “एलएन स्टार” में कार्यकारी संपादक हैं। इससे पहले इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में एसीएन भारत न्यूज चैनल में स्टेट हेड, स्वराज एक्सप्रेस नेशनल न्यूज चैनल में मध्यप्रदेश संवाददाता, ईटीवी मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ में संवाददाता रह चुके हैं। प्रिंट मीडिया में दैनिक समाचार पत्र राजस्थान पत्रिका में राजनैतिक एवं प्रशासनिक संवाददाता, भास्कर में प्रशासनिक संवाददाता, दैनिक जागरण में संवाददाता, लोकमत समाचार में इंदौर ब्यूरो चीफ दायित्वों का निर्वहन कर चुके हैं। नई दुनिया, नवभारत, चौथा संसार सहित अन्य अखबारों के लिए स्वतंत्र पत्रकार के तौर पर कार्य कर चुके हैं