इंदौर में सड़क चौड़ीकरण से हजारों प्रभावित, मुआवजा-टीडीआर पर सवाल; वहीं उज्जैन में 10 परिवारों को राहत, स्मार्ट सिटी के फैसले से भेदभाव के आरोप


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इंदौर में वर्षों से सड़कों के चौड़ीकरण के नाम पर मकान-दुकानें तोड़ी जा रही हैं और प्रभावितों को मुआवजा देने में भी भेदभाव किया जा रहा है। लोगों को सिर्फ ट्रांसफरेबल डेवलपमेंट राइट्स (टीडीआर) के सपने दिखाए गए। वहीं उज्जैन में स्मार्ट सिटी कंपनी 10 परिवारों को मुआवजा देने जा रही है। शहर में 2016 से टोरी कॉर्नर-बियाबानी रोड, एमजी रोड सहित कई इलाकों में सड़क बनाने के नाम पर कार्रवाई हुई, लेकिन किसी को मुआवजा नहीं दिया गया। कई लोगों की रोजी-रोटी इन जगहों से जुड़ी थी।

एबीडी एरिया में चार सड़कों के लिए 1100 से ज्यादा संपत्तियां तोड़ी गईं, जहां अब तक मुआवजे या टीडीआर प्रक्रिया ही लंबित है। एक साल में ही मास्टर प्लान की सड़कों पर 1000 से ज्यादा बाधक चिह्नित किए गए। कई जगह बिना किसी अंतिम निर्णय के ही कार्रवाई कर दी गई। बीते सोमवार को सुभाष मार्ग पर नोटिस देने पहुंची निगम टीम के सामने परिवार बिलख पड़ा, कॉर्नर मकान दोनों तरफ से जा रहा लेकिन मुआवजे के नाम पर कुछ नहीं मिल रहा।

ये कैसी स्मार्टनेस… उज्जैन में राहत, हमारे यहां किसी को टीडीआर भी नहीं मिला

उधर, उज्जैन में सिंहस्थ क्षेत्र में महाकाल पार्किंग से चौबीस खंभा रोड तक बनने वाली सड़क के लिए उज्जैन स्मार्ट सिटी लिमिटेड 10 प्रभावित संपत्तियों को मुआवजा देगी। इसका विज्ञापन भी जारी किया गया है, जिसमें स्पष्ट किया गया है कि भूमि अर्जन, पुनर्वासन एवं पुनर्व्यवस्थापन में उचित प्रतिकर व पारदर्शिता अधिकार अधिनियम 2013 लागू होगा।

2,975 निर्माण सिर्फ मास्टर प्लान की सड़कों में बाधक

स्कीम फॉर स्पेशल असिस्टेंस टू स्टेट 2023-24 के तहत 34.75 किमी लंबी 23 सड़कों पर 468 करोड़ रुपए खर्च किए जा रहे हैं, जिनमें 2,975 बाधक चिह्नित हैं। चंदन नगर-कालानी नगर मार्ग पर करीब 300 निर्माण प्रभावित होंगे। आरई-2, एमआर-4 सहित अन्य सड़कों पर काम जारी हैं, लेकिन निगम ने किसी को मुआवजा नहीं दिया है।

दो साल बाद भी जमीनी हकीकत शून्य

टीडीआर पोर्टल व खरीदी-बिक्री को लेकर दो साल से दावे, लेकिन जमीन पर कोई काम नहीं हुआ। दर्जनों बैठकें हुई, लेकिन सिस्टम नहीं बना।

सिंहस्थ मद से उज्जैन को मिल रहा पैसा

बजट में सिंहस्थ के लिए ₹3,060 करोड़ का प्रावधान, जो पिछले साल से ₹1,055 करोड़ अधिक है। अब तक कुल ₹5,570 करोड़ स्वीकृत।

आईडीए भी जिम्मेदारी से बच रहा, निगम पर छोड़ा

मुआवजा देने में आईडीए भी जिम्मेदारी से बचता नजर आता है। मुआवजा देने में आईडीए पूरा मामला निगम पर छोड़ देता है। केवल निर्माण राशि देकर अलग हो जाता है। एमआर-5, आरडब्ल्यू-1 व एमआर-3 में यही स्थिति सामने आई है। यह तय नहीं कि भुगतान कौन करेगा।

निगम एक्ट में मुआवजे का प्रावधान नहीं

नगर निगम एक्ट में मुआवजा देने के प्रावधान नहीं है। सड़क निर्माण में जो भी संपत्तियां ली जा रही है, उनको टीडीआर का लाभ दिया जा रहा है। – अभय राजनगांवकर, अपर आयुक्त

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