शिलॉन्ग की अदालत ने शुक्रवार को चर्चित राजा रघुवंशी हत्याकांड में आरोपी राज कुशवाहा की जमानत याचिका खारिज कर दी। वहीं, सोनम को मिली जमानत को आधार बनाकर जेल में बंद अन्य आरोपी विशाल चौहान, आनंद कुर्मी और आकाश राजपूत ने भी कोर्ट में जमानत के लिए आवेदन दायर कर दिया है।

बता दें की राजा रघुवंशी हत्याकांड की मुख्य आरोपी सोनम मंगलवार रात को जेल से रिहा हो चुकी है और फिलहाल शिलांग के एक होटल में ठहरी हुई है। ऐसे में वह सुरक्षा कारणों का हवाला देकर शिलॉन्ग से बाहर जाने की अनुमति के लिए नई अर्जी दाखिल कर सकती है।
राज के वकील फुयोसा योबिन के अनुसार, सेशन कोर्ट ने जमानत याचिका को ‘तकनीकी आधार’ पर निरस्त किया। आवेदन में पिछले बेल आवेदन का उल्लेख नहीं किया गया था, जिसे कोर्ट ने गंभीर माना। हालांकि, यह खारिजी मामले के गुण-दोष (मेरिट) के आधार पर नहीं हुई। अब सोमवार को नई जमानत अर्जी दायर की जाएगी।

सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का हवाला देकर खारिज की याचिका
जमानत याचिका खारिज करते हुए शिलॉन्ग कोर्ट ने अपने आदेश में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का हवाला दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि आरोपी राज के वकील ने याचिका में उसके आपराधिक रिकॉर्ड का उल्लेख नहीं किया, जो नियमों का उल्लंघन है। इसी आधार पर जमानत अर्जी निरस्त कर दी गई।
कोर्ट ने अपने आदेश में अप्रैल 2025 के चर्चित फैसले मुनेश बनाम उत्तरप्रदेश का उल्लेख किया। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने साफ निर्देश दिए थे कि अब नियमित या अग्रिम जमानत मांगने वाले हर याचिकाकर्ता को अपने आपराधिक इतिहास का पूरा खुलासा करना अनिवार्य होगा।

सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के मुताबिक इन शर्तों को मानना जरूरी
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया था कि यदि कोई याचिकाकर्ता जानकारी छुपाता है या गलत तथ्य पेश करता है, तो उसकी जमानत याचिका तुरंत खारिज की जा सकती है। कोर्ट के अनुसार, यह व्यवस्था न्यायिक प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाने और जमानत प्रावधानों के दुरुपयोग को रोकने के उद्देश्य से लागू की गई है।
- याचिकाकर्ता को बताना होगा कि उसका पिछला रिकॉर्ड साफ है या नहीं
- यदि किसी भी आपराधिक मामले में संलिप्तता रही है, तो उसका पूरा विवरण देना होगा
- संबंधित मामलों की वर्तमान स्थिति भी स्पष्ट करनी होगी
परिवार दूर, वकील ही कर रहे प्रक्रिया
राज की गिरफ्तारी के बाद उसका परिवार इंदौर से उत्तर प्रदेश स्थित गांव चला गया है। फिलहाल कोई भी परिजन उससे मिलने नहीं आ रहा है और कोर्ट संबंधी दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करवाने के लिए वकील ही शिलॉन्ग जेल पहुंचते हैं।
बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि लंबे समय तक जेल में रखना आरोपी के अधिकारों का उल्लंघन है, लेकिन कोर्ट ने अपराध की गंभीरता को देखते हुए राहत देने से इनकार कर दिया। इससे अन्य आरोपियों की जमानत राह भी कठिन मानी जा रही है।
सोनम की जमानत को हाईकोर्ट में चुनौती
मेघालय हाई कोर्ट में शिलॉन्ग पुलिस सोनम की जमानत को चुनौती देने की तैयारी कर रही है। पुलिस का दावा है कि सोनम इस हत्याकांड की मास्टरमाइंड है और उसकी रिहाई से गवाहों पर प्रभाव पड़ सकता है। शिलॉन्ग एसपी विवेक सियेम ने कहा कि जांच कानून के अनुसार जारी रहेगी और आवश्यक कानूनी कदम उठाए जाएंगे।
10 महीने से जारी है SIT जांच
इंदौर निवासी राजा रघुवंशी की हत्या के मामले में विशेष जांच दल (SIT) पिछले 10 महीनों से जांच कर रहा है। सत्र न्यायालय ने सोनम को जमानत देते समय पुलिस जांच में खामियों की ओर इशारा किया था। कोर्ट ने पाया कि गिरफ्तारी के दौरान सही धाराएं नहीं लगाई गईं और आरोपी को उसके खिलाफ आरोपों की स्पष्ट जानकारी भी नहीं दी गई, जो कि मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है। साथ ही, अब तक सभी गवाहों के बयान भी दर्ज नहीं किए जा सके हैं।