ऑपरेशन लोकायुक्त’ के पहले पार्ट में लोकायुक्त के टेक्नीशियन, आरक्षक और रीडर ट्रैप केस कमजोर करने के बदले रिश्वत मांगते कैमरे में कैद हुए थे। उन्होंने डीएसपी स्तर के दो अधिकारियों के लिए 3 से 5 लाख रुपए की रिश्वत डील की थी। टेक्नीशियन अमित विश्वकर्मा ने पूरी बातचीत में डीएसपी मैडम और डीएसपी सर का नाम लिया था।
अमित ने दावा किया कि वह दोनों से मुलाकात कराएगा। उसने 19 मई की तारीख दी थी। तय समय पर लोकायुक्त दफ्तर पहुंचा और अमित से मिला।

चोरी सब करते हैं, पकड़ा गया वो ही चोर’
अमित को डीएसपी मंजू सिंह के चेंबर में ले गया। मंजू सिंह ने बताया कि उनके पास के कथित रिश्तेदार के खिलाफ पद के दुरुपयोग की शिकायत आई है, जो शाहजहांपुर के एक व्यक्ति ने की है। शिकायत में पद पर रहते हुए गंभीर अनियमितताओं के आरोप हैं।मदद के सवाल पर मंजू सिंह ने कहा कि सब कुछ जल्दी करवाना पड़ेगा। चोरी सब करते हैं, जो पकड़ा गया वही चोर होता है।मंजू: मेरा एक लेटर 12 मई को गया है। अभी जानकारी नहीं आई है, फॉलोअप करवा कर जल्दी करवा लो।मैं जाकर बात करता हूं।
मंजू: जितनी जल्दी आएगी, उतनी जल्दी उनकी हेल्प होगी। जितना टाइम लगेगा, उतना उनका नुकसान हो जाएगा। कलेक्टर ऑफिस से एक बार बात करनी पड़ेगी, मैं एक बार जाकर आता हूं।मंजू: आप देख लेना।फिर वो जानकारी आपको भिजवा दूं, बाद में ही मदद होगी।मंजू: जानकारी के ऊपर ही सब डिपेंड करता है, फिर जो होगा देख लेंगे।बाहर आने के बाद अमित ने बताया कि डीएसपी मंजू सिंह की जांच में “क्लीन चिट” भी दिलवाई जा सकती है और उनका हिस्सा 3 लाख रुपए है

‘सर वॉयस रिकॉर्डिंग में मदद कर सकते हैं’
लोकायुक्त कार्यालय पहुंचने पर अमित ने रिपोर्टर को वेटिंग एरिया में बैठाया और खुद डीएसपी बीएम द्विवेदी के चेंबर में गया। अमित ने लौटकर बताया कि साहब का ट्रांसफर होने वाला है।अमित ने कहा, ‘नया अधिकारी आएगा तो उससे डील करेंगे। फिलहाल सर वॉयस रिकॉर्डिंग वाली एक मदद कर सकते हैं।’
इसी बीच अमित को द्विवेदी का फोन आया। उसने बताया कि 27 तारीख को नोटिस निकाला जाएगा, जिसके बाद वॉयस सैंपल लिया जाएगा। ने सीधी मुलाकात की मांग की तो अमित ने समझाया, ‘अधिकारी पैसों की बात सीधे नहीं करते। केस के बारे में बात होगी, बाकी सब बाहर आकर मुझसे डील करना।’ समझा-बुझाकर अमित ने रिपोर्टर को द्विवेदी के चेंबर में भेजा। क्या नाम है आपका और क्या करते हैं?: श्याम साहू नाम है, लैब चलाता हूं।द्विवेदी: हम वॉयस सैंपल का नोटिस देंगे।कब देंगे नोटिस: दो-तीन दिन पहले बता देंगे। इस हफ्ते नहीं होगा। अगले सोमवार या मंगलवार को देंगे, 28 या 29 को। तब तक तैयारी कर लो, बता दूंगा।बाकी अमित से बात हो गई है?
द्विवेदी: ठीक है। मैं किसी को धोखे में नहीं रखता। आंख में आंख डालकर बात करता हूं, झूठ बोलकर काम नहीं करता। डीएसपी द्विवेदी के चेंबर से बाहर आया। अमित बाहर खड़ा था। अमित ने कहा कि द्विवेदी जी के 5 लाख और मैडम 3 लाख रुपए मांग रही हैं। ने कहा- यानी 8 लाख, ये ज्यादा नहीं होंगे।अमित ने कहा, “यहां तो लोग 20-20 लाख देते हैं। एक अधिकारी थे, उन्होंने जांच रुकवाने के लिए 1 करोड़ रुपए दिए थे। अभी आरटीओ कॉन्स्टेबल सौरभ शर्मा के केस की चालान डायरी पेश होगी। उसमें तो सारे अफसर करोड़ों कमाएंगे।”

‘ट्रांसक्रिप्ट के मेन पॉइंट्स देख लो’
इस पूरे ऑपरेशन का सबसे चौंकाने वाला पहलू तब सामने आया, जब अमित विश्वकर्मा ने इन्वेस्टिगेशन चल रहे केस की पूरी ट्रांसक्रिप्ट दे दी। देते वक्त अमित ने समझाया, “इसमें मेन-मेन पॉइंट देख लो। जिन-जिन लोगों की बातचीत इसमें है, वो सब इस केस में आरोपी बनेंगे। यह विश्वास की बात है, ये ट्रांसक्रिप्ट बाहर नहीं जानी चाहिए।वॉट्सएप पर ही बात करो, मेरे पास एक ही नंबर है। लोकायुक्त के सभी कर्मचारियों के नंबर एसपी साहब के पास रिकॉर्डिंग पर हैं।” इसके बाद अमित ने अपना रेट बताया, “एक कागज की जानकारी देने के 10 से 20 हजार लेता हूं। मेरे हिसाब से यह थोड़ा कम है।

जिनसे डील हुई, वे पैसा देने का दबाव बनाने लगे
लोकायुक्त के अफसरों और कर्मचारियों से डील की पूरी बातचीत कैमरे में कैद करने के बाद ने उनसे न संपर्क किया और न ही रुपए पहुंचाए। इसके कुछ दिन बाद उन्होंने को कॉल और वॉट्सएप मैसेज करना शुरू कर दिया। अमित विश्वकर्मा ने मैसेज कर केस बिगाड़ने की धमकी तक दे दी।डीएसपी मंजू सिंह के रीडर गौरव साहू ने कहा कि दो लाख रुपए लोकायुक्त दफ्तर के बाहर आकर दे दो। इसके बाद के मोबाइल पर एक कॉल आया। जिसे डीएसपी मंजू सिंह का नंबर बताया जाता है। महिला ने रिपोर्टर से पूछा कि लेटर का जवाब कब तक दिलाओगे। जल्दी करवा दो तो प्रतिवेदन जल्दी तैयार होगा।

4 महीने में लोकायुक्त की एक भी खात्मा रिपोर्ट कोर्ट में स्वीकार नहीं
भोपाल की स्पेशल कोर्ट ने इस साल जनवरी से अप्रैल के बीच लोकायुक्त संगठन की ओर से पेश की गई सभी 35 खात्मा खारिज कर दीं। इन में सबूतों की कमी का हवाला देकर मामलों को बंद करने की मांग की गई थी।कोर्ट ने पाया कि कई मामलों में जांच अधूरी थी और इसमें गलतियां थीं। जांच के दौरान जरूरी दस्तावेज नहीं जुटाए गए थे। अहम गवाहों के बयान भी दर्ज नहीं किए गए। इसी वजह से कोर्ट ने किसी भी खात्मा को मंजूरी नहीं दी।
3 साल में ट्रैप कार्रवाई बढ़ी, लेकिन सजा के मामलों में गिरावट
लोकायुक्त पुलिस ने साल 2025 में, 2023 की तुलना में 28 फीसदी ज्यादा रिश्वतखोरी के मामलों को ट्रैप किया। 2023 में 180 ट्रैप केस दर्ज हुए थे, जबकि 2025 में यह संख्या बढ़कर 230 हो गई।हालांकि, दोषसिद्धि (सजा) के मामलों में लगातार गिरावट आई। 2023 में 163 मामलों में सजा हुई थी, जो 2025 में घटकर सिर्फ 71 रह गई। यानी ट्रैप कार्रवाई बढ़ी, लेकिन सजा पाने वाले मामलों की संख्या आधे से भी कम हो गई।
इसे आंकड़ों से भी समझिए…
| वर्ष | ट्रैप केस | दोषसिद्धि |
| 2023 | 180 | 163 |
| 2024 | 196 | 102 |
| 2025 | 230 | 71 |
सिंघार बोले- आम जनता न्याय की उम्मीद किससे करे?
एमपी विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने खुलासे को लेकर अपने अकाउंट पर लिखा- मध्य प्रदेश में भ्रष्टाचार अब सिर्फ सरकारी दफ्तरों तक सीमित नहीं रहा, अब भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई करने वाली लोकायुक्त पर ही भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लग रहे हैं।डीएसपी स्तर तक की भूमिका, वॉयस सैंपल, ट्रांसक्रिप्ट, जांच और केस को प्रभावित करने के लिए लाखों रुपये के कथित सौदों का खुलासा, यह स्थिति बेहद चिंताजनक है। जब लोकायुक्त में ही रिश्वत का नेटवर्क सक्रिय हो जाए, तो आम जनता न्याय की उम्मीद किससे करे?
