पहले अमीर लोगों की तलाश, फिर दोस्ती का दिखावा, कमरे में मुलाकात और फिर शुरू होता था ब्लैकमेलिंग का गंदा खेल। भिंड पुलिस ने एक ऐसे ही हाईप्रोफाइल हनीट्रैप रैकेट का पर्दाफाश किया है।
दो महिलाओं ने अपने साथियों के साथ मिलकर कई व्यापारियों और रसूखदार लोगों को अपने जाल में फंसाया, उनके आपत्तिजनक वीडियो बनाए और फिर लाखों रुपए की उगाही की।

इस मामले में पुलिस ने दो महिलाओं समेत चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। चौंकाने वाली बात यह है कि इनमें से एक महिला HIV पॉजिटिव है। उसे 3 साल पहले ही अपनी बीमारी का पता चल गया था, लेकिन इसके बावजूद उसने यह धंधा बंद नहीं किया।

समझौते के बाद रुपए लेती हुई महिला।
इन 4 तरीकों से काम करता था यह पूरा सिंडिकेट
यह नेटवर्क बेहद सुनियोजित तरीके से चलाया जा रहा था। इसके काम करने का तरीका कुछ इस तरह था।पहचान बढ़ानाः महिलाएं सरकारी काम, दस्तावेज बनवाने या मदद के बहाने रसूखदार लोगों से संपर्क करती थीं।जाल में फंसानाः धीरे-धीरे भरोसा जीतकर निजी पलों का वीडियो गुप्त कैमरे से रिकॉर्ड कर लिया जाता था।
धमकी और वसूलीः घटना के 1-2 दिन बाद 20 से 50 हजार रुपए की मांग होती थी। मना करने पर वीडियो क्लिप मोबाइल पर भेजकर दबाव बनाया जाता था।लीगल एग्रीमेंट का ड्रामा: सबसे हैरान करने वाली बातयह थी कि रकम वसूली के लिए 100 रुपए के स्टाम्प पेपर पर बाकायदा समझौता लिखा जाता था। गवाहों के दस्तखत होते थे, ताकि पीड़ित बाद में मुकर न सके।
सामने आया ऑडियो- यह कोई सब्जी-भाजी का सौदा नहीं है…”

मैं आपके कहने पर अभी तक रुकी हुई थी। अब मैं कल कोर्ट जाऊंगी। बाद में यह मत कहना कि मैंने पहले नहीं बताया। जो बड़ी-बड़ी मूंछ वाला आदमी आया था, उसे भी बता देना।सहयोगी: मैं तो सिर्फ इसलिए कोशिश कर रहा थाकि उम्र का लिहाज करते हुए मामला सुलझ जाए। परिवार वालों ने जब उनसे बात की तो वह कहने लगे कि उनका कोई मामला ही नहीं है, तब मैंने साफ बता दिया कि महिला के पास उनके वीडियो हैं।महिला: अब आप टेंशन मत लो, मैं खुद देख लूंगी

सहयोगी: जो आदमी 10 हजार रुपए की नौकरी करता है, वह दो लाख रुपए कहां से देगा?
महिलाः जब उसकी हैसियत नहीं थी तो उसने यह सब किया ही क्यों? 50-60 साल की उम्र में 20 साल की लड़की के साथ क्या कर रहा था?सहयोगी: यह सब दोनों की रजामंदी से हुआ था। कोई जबरदस्ती नहीं हुई थी।महिलाः बुजुर्ग के साथ रजामंदी थी तो दूसरे आदमी के साथ भी थी क्या? दोनों ने गलत किया है।

सहयोगी: अगर बुजुर्ग का वीडियो है तो दूसरे व्यक्ति का भी होगा?
महिलाः हां, उसका भी वीडियो है। दोनों जेल जाएंगे। मैंने पहले ही बता दिया है। बाद में मत कहना कि सूचना नहीं दी।सहयोगी: मेरी बात मानिए, जितना मैंने कहा है, उतने में समझौता हो जाए तो ठीक रहेगा।महिला: नहीं, इतने में कुछ नहीं होगा।सहयोगी: लाख-दो लाख उसके बस की बात नहीं है। वह तो मरने की बात कर रहा।महिलाः यह कोई दस-पचास हजार का मामला नहीं है। कोई सब्जी-भाजी का सौदा नहीं चल रहा।
सहयोगी:फिर भी मामला निपटाना हो तो निपटा लो।महिलाः पचास हजार में कुछ नहीं होगा।सहयोगी: मैंने तो बीस हजार रुपए की बात की थी।महिलाः मैंने वीडियो वकील को दिखाया है। वह कल केस दर्ज कराने की बात कह रहा है।सहयोगी: इससे किसी की इज्जत नहीं बचेगी, न आपकी और न उनकी।

– इसके बाद दोनों के बीच बातचीत समाप्त हो जाती है और फोन कट जाता है।
वकील और पीड़ित के दोस्त के बीच बातचीतवकील: हेलो, मैं वकील बोल रहा हूं। मेरे पास पीड़िता आई थी। उसने आवेदन लिखवाया था और इस नंबर का जिक्र किया था। उसी मामले में बात करनी है।
सहयोगी: मैं महिला से मिलने गया था। उसने तीन
लाख रुपए मांगे थे। मैंने बुजुर्ग से बात की तो उन्होंने कहा कि मेरे पास इतने पैसे नहीं हैं। मैं तो फांसी लगाकर मर जाऊंगा।वकील: ठीक है, अगर आपका कोई रिश्तेदार है तो समझा लेना। नहीं तो मुकदमा हो जाएगा। मामला निपट जाए तो बेहतर रहेगा। कोशिश करो।
सहयोगी: मेरा उनसे कोई रिश्तेदारी नहीं है। मोहल्ले में रहते हैं। मैं उनसे संपर्क करने की कोशिश कर रहा हूं, लेकिन उनका मोबाइल बंद जा रहा है।वकील: मैं नहीं चाहता कि किसी पर इस तरह का मुकदमा हो। इसलिए मैंने आपसे संपर्क किया है।सहयोगी: दोनों का मामला आपसी रजामंदी का है। वह दस हजार रुपए की नौकरी करता है। आखिर

सहयोगी: अगर दस-बीस हजार रुपए में बात बनती हो तो बताइए।
वकील: वह आवेदन लिखवाने और केस की तैयारी केलिए ही मुझे पांच हजार रुपए दे चुकी है। वह इतनी कम रकम में कैसे मानेगी? केस दर्ज हो गया तो पुलिस का खर्च अलग होगा और वकील का अलग। इसलिए पहले ही मामला निपटा लीजिए।वकील: अब आप बताइए। मैं क्या करूं? एक-दो दिन आवेदन रोकूं या फिर पुलिस और कोर्ट में भेज दूं?सहयोगी: वकील साहब, पार्टी का नंबर बंद जा रहा है। उनसे बातचीत होगी, तब ही मैं कुछ बता पाऊंगा।

जाल में फंसे शहर के ये 4 बड़े नाम
जांच के दौरान सामने आया है कि इस गैंग ने शहर के कई प्रतिष्ठित लोगों को निशाना बनाया।सराफा कारोबारी: महिला की शिकायत के बादबदनामी के डर से बड़ी रकम देकर समझौता करना पड़ा।. सेवानिवृत्त शिक्षकः एक आरोपी महिला ने इनके खिलाफ दुष्कर्म का मामला भी दर्ज कराया था, जो अब जांच के घेरे में है। प्रतिष्ठित परिवार का सदस्यः इस मामले में भी लाखों रुपए की मांग के बाद मामला दबा दिया गया।. शहर का एक वकील: दोस्ती के बाद जाल में फंसे और वीडियो बनने के बाद विवाद खड़ा हुआ।
कर्ज लेकर चुकाई कीमत: बदनामी के डर से कई
पीड़ितों ने बैंक से लोन लिया, रिश्तेदारों से उधार मांगा तो कुछ ने साहूकारों से भारी ब्याज पर पैसे लेकर इस गैंग को दिए। कुछ लोग तो आज भी इस ब्लैकमेलिंग के
पुलिस की अपील- बदनामी का डर छोड़ें, सामने आएं
देहात थाना प्रभारी शिव प्रताप सिंह राजावत के मुताबिक, हनीट्रैप के मामलों में सबसे बड़ी चुनौती यह है कि समाज में थू-थू होने के डर से पीड़ित सामने नहीं आते। पुलिस को अंदेशा है कि पीड़ितों की संख्या बहुत अधिक हो सकती है। पुलिस ने साफ कहा है कि यदि किसी के पास भी इस गैंग के खिलाफ सबूत हैं, तो वे बिना डरे सामने आएं, उनकी पहचान गुप्त रखी जाएगी।