वायरल गर्ल केस: पति की अग्रिम जमानत याचिका खारिज, कोर्ट बोला- फरार आरोपी जांच में सहयोग नहीं कर रहा, सबूतों से छेड़छाड़ की आशंका; ट्रायल में तय होगी उम्र

खरगोन में मंडलेश्वर के स्पेशल पॉक्सो कोर्ट ने वायरल गर्ल के पति की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी है। विशेष न्यायाधीश रवि झारोला ने कहा- फरार होने और सबूतों से छेड़छाड़ की आशंका को देखते हुए आरोपी को राहत नहीं दी जा सकती।

कोर्ट ने कहा- आरोपी जांच में सहयोग नहीं कर रहा है। वह फरार है। ऐसे में जमानत का आधार नहीं बनता।

मामला वायरल गर्ल के पिता द्वारा 25 मार्च को दर्ज कराई गई उस FIR से जुड़ा है, जिसमें उन्होंने कहा है कि आरोपी उनकी नाबालिग बेटी को फिल्मों में काम दिलाने का झांसा देकर केरल ले गया था। कुछ समय तक साथ रखने के बाद आरोपी ने बहला-फुसलाकर उससे शादी कर ली।

बुधवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से सुनवाई में जुड़े बचाव पक्ष के वकील जैरी लोपेज और कोर्ट में मौजूद वकील लखन भावरे ने दलील दी कि वायरल गर्ल अपनी इच्छा से आरोपी के साथ गई थी और दोनों ने आपसी सहमति से विवाह किया था। उसने केरल के थंपानूर थाने में खुद को बालिग साबित किया था, इसलिए उसके पति पर लगा आरोप झूठा है। ऐसे में आरोपी को अग्रिम जमानत दी जानी चाहिए।

वहीं, विशेष लोक अभियोजक पीएस अलावा और पीड़िता की मां के वकील विजय जोशी ने कोर्ट में उसका जन्म प्रमाण पत्र पेश किया। दलील दी कि शादी के समय वह नाबालिग थी और आरोपी द्वारा उम्र निर्धारण के लिए पेश किए गए अन्य दस्तावेज कानूनी रूप से मान्य नहीं हैं।

जांच की स्थिति को देखते हुए जमानत का आधार नहीं

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और केस डायरी पढ़ने के बाद कोर्ट ने कहा- मामले में पुलिस जांच पूरी नहीं हुई है। पीड़िता के बयान दर्ज होना बाकी है। आरोपी जांच में सहयोग नहीं कर रहा है। वह फरार है। अग्रिम जमानत मिलने पर वह साक्ष्यों से छेड़छाड़ या गवाहों को प्रभावित कर सकता है।

अदालत ने यह भी कहा कि वायरल गर्ल की वास्तविक उम्र का निर्धारण ट्रायल के दौरान साक्ष्यों के आधार पर किया जाएगा।

केरल हाईकोर्ट ने दे रखी है ट्रांजिट बेल

इससे पहले 3 जून को केरल हाईकोर्ट ने वायरल गर्ल को प्रथम दृष्टया बालिग मानते हुए उसके पति को एक महीने की ट्रांजिट बेल दे दी थी। हाईकोर्ट के जज कौसर एडप्पागथ ने कहा था- युवती के जन्म प्रमाणपत्र में उसके पैदा होने की तारीख 1 जनवरी 2008 दर्ज है, इसलिए वह बालिग है। इस पर मध्य प्रदेश पुलिस की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने दावा किया था कि ये प्रमाणपत्र फर्जी है। असलियत में वायरल गर्ल नाबालिग है।

जज ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया और कहा था- जन्म प्रमाणपत्र के अतिरिक्त आवेदक क्रमांक-2 (वायरल गर्ल) का वोटर आईडी और बैंक पासबुक भी कोर्ट में पेश किए गए हैं। जिनसे यह स्पष्ट होता है कि वह बालिग है। वह स्वयं भी बालिग होने का दावा कर रही है। वायरल गर्ल ने शपथपत्र भी दिया है कि उसने आवेदक क्रमांक-1 के साथ विवाह किया है।

दलील- युवती हिंदू और युवक मुसलमान, मंदिर में शादी जायज नहीं

केरल हाईकोर्ट के सामने वायरल गर्ल और उसके पति ने अपनी संयुक्त याचिका में दावा किया था कि यदि वे मध्य प्रदेश जाते हैं तो अलग-अलग धर्मों से होने के कारण कट्टरपंथी तत्वों द्वारा उनकी ऑनर किलिंग की जा सकती है। उन्होंने यह भी कहा था कि गिरफ्तारी से संरक्षण के आदेश के बिना वे न तो यात्रा कर सकते हैं और न ही मध्य प्रदेश में जमानत याचिका दायर करने के लिए किसी वकील से संपर्क कर सकते हैं।

वहीं, अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने अदालत को बताया था- युवती हिंदू है और उसका पति मुस्लिम, इसलिए मंदिर में हुआ उनका विवाह वैध नहीं है। इस आधार पर स्थानीय मैरिज रजिस्ट्रार को उन्हें विवाह प्रमाणपत्र जारी करने का अधिकार नहीं है।

फिल्म शूटिंग के दौरान हुई थी दोनों की मुलाकात

दरअसल, वायरल गर्ल की मुलाकात केरल में फिल्म शूटिंग के दौरान आरोपी से हुई थी। धीरे-धीरे दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ीं और मार्च 2026 में दोनों ने शादी कर ली।

मामला उस समय विवादों में आया, जब राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग ने विवाह पर आपत्ति जताई। आयोग का दावा था कि शादी के समय वायरल गर्ल की उम्र 16 वर्ष थी और विवाह के लिए फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया।

इसके बाद खरगोन पुलिस ने वायरल गर्ल के पति के खिलाफ पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज किया।

डायरेक्टर के खिलाफ केरल में दर्ज कराई थी FIR

वायरल गर्ल ने 29 अप्रैल 2026 को डायरेक्टर सनोज मिश्रा और तीन अन्य के खिलाफ पॉक्सो एक्ट में FIR कराई थी। FIR के बाद केरल की एर्नाकुलम सेंट्रल पुलिस ने केस दर्ज जांच शुरू कर दी है।

पीड़िता ने आरोप लगाया था कि जब वह नाबालिग थी, तब डायरेक्टर सनोज मिश्रा ने फिल्म ‘द डायरी ऑफ मणिपुर’ की शूटिंग के दौरान उसके साथ दुर्व्यवहार किया था। मिश्रा ने उसे एक्टिंग के मौके देने का झांसा देकर उसका शोषण किया।

आरोपियों में केरल के विहिप नेता और वकील अनिल विलायल भी शामिल हैं। पीड़िता ने उन पर सोशल मीडिया पर बदनामी करने का आरोप लगाया है। दो अन्य आरोपियों के नामों का फिलहाल खुलासा नहीं हो पाया है।

फिल्म डायरेक्टर ने कहा- मेरे खिलाफ झूठे दस्तावेजों के आधार पर केस दर्ज कराया गया है।

फिल्म डायरेक्टर बोले- आरोप सोची-समझी साजिश

उधर, फिल्म निर्देशक सनोज मिश्रा ने इन आरोपों को सोची-समझी साजिश बताया था। उन्होंने दावा किया था कि उन्हें ‘लव जिहाद’ जैसे मुद्दों पर आवाज उठाने के कारण निशाना बनाया जा रहा है।

मिश्रा ने आरोप लगाया कि उनकी फिल्म की अभिनेत्री को बहला-फुसलाकर केरल पहुंचाया गया। नाबालिग लड़की से फर्जी कागजों के आधार पर शादी की गई। अब मामले में आवाज उठाने पर उन्हें ही झूठे केस में फंसाया जा रहा है।

जन्मतिथि के दो अलग-अलग प्रमाण पत्र मिले थे

वायरल गर्ल की शादी शुरू से विवाद में है। पहले इसे ‘लव जिहाद’ बताया गया, फिर परिवार ने नाबालिग होने का दावा किया। जांच में महेश्वर नगर परिषद के जन्म प्रमाण पत्र में विसंगतियां मिली थीं।

मेडिकल रिकॉर्ड के अनुसार उसका जन्म 30 दिसंबर 2009 को हुआ था। 11 मार्च 2026 को शादी के समय उसकी उम्र 16 साल, 2 महीने और 12 दिन थी। इसके बाद प्रशासन ने 1 जनवरी 2008 वाले पुराने प्रमाण पत्र को निरस्त करने के निर्देश दिए थे।

परिजन ने कहा था- बहला-फुसलाकर शादी की

वायरल गर्ल के माता-पिता की शिकायत है कि युवक ने उसे बहला-फुसलाकर शादी के लिए राजी किया था। राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (NCST) की जांच में सामने आया कि शादी के समय वह नाबालिग थी।

इसके बाद पति पर POCSO एक्ट के तहत केस दर्ज हुआ। इस मामले में बयान के लिए उसे पुलिस के सामने पेश होना था।

वायरल गर्ल ने माता-पिता पर प्रताड़ना के आरोप लगाए थे

वायरल गर्ल ने केरल के थंपानूर पुलिस स्टेशन में बयान देकर माता-पिता पर प्रताड़ना के आरोप लगाए थे। उसने कहा था कि परिजन चाचा के लड़के से शादी का दबाव बना रहे थे, जबकि वह उसे भाई मानती है। मानसिक तनाव के दौरान युवक ने उसका साथ दिया। नजदीकियां प्रेम में बदलीं तो दोनों ने केरल के एक मंदिर में स्थानीय लोगों की मौजूदगी में शादी कर ली।

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