2013 में 2 करोड़ रुपए की पूंजी से शुरू हुआ कारोबार 13 साल में करीब 600 करोड़ रुपए तक पहुंच गया। जांच एजेंसियों के अनुसार, इसके पीछे मिलावट-फर्जीवाड़े और धोखाधड़ी का नेटवर्क था। यह कहानी ‘जयश्री गायत्री फूड्स लिमिटेड’ के मालिक किशन मोदी की है, जो पिछले तीन महीने से जेल में हैं।
जयश्री गायत्री फूड्स लिमिटेड के मालिक किशन मोदी फिलहाल जेल में हैं।
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जांच में जुटाए गए सबूतों के आधार पर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने हाल ही में उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी। जनवरी 2025 में ईडी ने किशन मोदी के खिलाफ कार्रवाई शुरू की थी। एजेंसी को शिकायत मिली थी कि पाम ऑयल और रसायनों से तैयार करीब 19 करोड़ रुपए मूल्य के डेयरी उत्पाद विदेशों में निर्यात किए गए।
एक सोशल एक्टिविस्ट ने लिट्टी चोखा में डले घी के आधार पर इस पूरे मामले का खुलासा किया। अब जांच इस बात पर केंद्रित है कि किशन मोदी ने कथित तौर पर मिलावटी डेयरी उत्पादों का नेटवर्क कैसे खड़ा किया और जांच एजेंसियों की नजरों से बचते हुए मामला ईडी की कार्रवाई तक कैसे पहुंचा?

फैक्ट्री का नाम बदला, स्वामित्व बरकरार
भास्कर टीम के बिलकिसगंज स्थित प्लांट पहुंचने पर पता चला कि जयश्री गायत्री फूड्स का नाम बदलकर ‘हेल्थ ब्रिज एग्रो प्राइवेट लिमिटेड’ कर दिया गया है। हालांकि, सरकारी रिकॉर्ड में कंपनी के निदेशक अब भी किशन मोदी और उनकी पत्नी पायल मोदी हैं।
टीम को फैक्ट्री के बॉयलर से धुआं निकलता दिखा। कर्मचारियों ने कहा कि मशीनों के रखरखाव के लिए उन्हें समय-समय पर चालू किया जाता है। इसी दौरान किशन मोदी के पिता राजेंद्र मोदी फैक्ट्री पहुंचे, लेकिन उन्होंने मीडिया से बात करने से इनकार कर दिया।

फैक्ट्री का नाम बदल दिया है, लेकिन स्वामित्व मोदी परिवार के ही पास है।जांच की कार्रवाई कैसे आगे बढ़ी?जाच एजेंसियों से बचने के लिए किशन मोदी ने कई दांव चले, मगर वे उन्हीं में उलझ गए…
1. सीईओ और कर्मचारियों के खिलाफ FIR
वर्ष 2023 में हबीबगंज थाने में कंपनी के सीईओ सुनील त्रिपाठी और अन्य कर्मचारियों के खिलाफ धोखाधड़ी की शिकायत दर्ज कराई गई। पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार किया। बाद की जांच में मामले के अन्य पहलुओं की भी पड़ताल शुरू हुई।
2. ईओडब्ल्यू की जांच और हाईकोर्ट का फैसला
इसी दौरान व्हिसल ब्लोअर भगवान सिंह ने दस्तावेजों के साथ ईओडब्ल्यू में शिकायत दर्ज कराई। जांच के बाद ईओडब्ल्यू ने किशन मोदी, राजेंद्र मोदी और पायल मोदी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की। बाद में हाईकोर्ट ने तकनीकी आधार पर इस एफआईआर को निरस्त कर दिया।
3. ईडी की कार्रवाई
ईओडब्ल्यू की एफआईआर निरस्त होने के बावजूद हबीबगंज थाने की एफआईआर और प्रारंभिक जांच के आधार पर ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज किया। जांच में फर्जी लैब रिपोर्ट्स और निर्यात संबंधी दस्तावेजों के उपयोग के आरोप सामने आए। ईडी के अनुसार, 19.69 करोड़ रुपए की राशि अपराध से अर्जित आय से जुड़ी है।इसी मामले में 13 मार्च से जेल में बंद किशन मोदी की जमानत याचिका अदालत ने खारिज कर दी है।

अनट्रीटेड केमिकल खेतों में ही छोड़ा
मामले की शिकायत करने वाले भगवान सिंह ने बताया कि दो-तीन साल पहले मैं भोपाल के 11 नंबर स्टॉप के पास लिट्टी चोखा खा रहा था। मुझे उसका स्वाद अजीब लगा। मैंने दुकानदार से पूछा तो उसने मुझे जयश्री-गायत्री फूड प्रोडेक्ट्स का घी दिखाया। जब मैंने तफ्तीश की तो पता चला कि सीहोर में इसकी फैक्ट्री है।
मैंने जब पड़ताल की तो पता चला कि फैक्ट्री के आसपास जिन किसानों के खेत हैं, वो फैक्ट्री से निकलने वाले अपशिष्ट पदार्थों से परेशान हैं। फैक्ट्री से निकलने वाला अनट्रीटेड केमिकल खेतों में ही छोड़ा जाता था। गांवों का ग्राउंड वाटर लेवल खराब हो गया। मैंने आरटीआई से भी कुछ दस्तावेज हासिल किए। मुझे पता चला कि प्रोडेक्ट बनाने में पाम ऑयल और रसायनों का इस्तेमाल हो रहा है।

जांच में दर्ज बयानों के प्रमुख बिंदु
ईडी की चार्जशीट और जांच रिपोर्ट में दर्ज बयानों में कई महत्वपूर्ण दावे सामने आए हैं। जांच के दौरान पूर्व सीईओ सुनील त्रिपाठी ने कथित तौर पर बयान दिया कि फैक्ट्री की गतिविधियां शीर्ष प्रबंधन की जानकारी में संचालित होती थीं। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि कर्मचारियों की मदद से लैब रिपोर्ट्स तैयार कर उन्हें एक्सपोर्ट क्लियरेंस के लिए भेजा गया था।अकाउंटेंट अखिलेश राठौर ने अपने बयान में दावा किया कि फैक्ट्री के लिए 5 से 6 लाख किलोग्राम पाम ऑयल खरीदा गया था, जिसका उपयोग डेयरी उत्पादों के निर्माण में किया जाता था।
क्या होगी आगे की कानूनी प्रक्रिया
किशन मोदी फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं। ईओडब्ल्यू ने हाईकोर्ट द्वारा एफआईआर निरस्त किए जाने के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (SLP) दायर की है। शिकायतकर्ता भगवान सिंह ने भी इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। ऐसे में मामले की अगली सुनवाई और कानूनी प्रक्रिया शीर्ष अदालत में आगे बढ़ेगी।