सोशल मीडिया पर 2 मिनट 25 सेकंड का एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें सफेद रंग की टीशर्ट और नीले रंग की जींस पहने एक महिला, कन्वेयर बेल्ट (Conveyor Belt) पर चढ़कर इंडिगो (IndiGo) ऑफिस के स्टाफ डेस्क पर कागज फेंकती हुई नजर आ रही हैं. यह वीडियो भुवनेश्वर एयरपोर्ट (Bhubaneswar Airport) का बताया जा रहा है.

वीडियो में एक यात्री को यह कहते हुए सुना जा सकता है कि महिला का बच्चा बीमार है. जब सेंट्रल इंडस्ट्रियल सिक्योरिटी फोर्स (CISF) के जवान उसे शांत करने की कोशिश करते हैं तो महिला की झड़प पर भी हो जाती है, जिसके बाद अधिकारी उसे चेतावनी देते कहते हैं कि वे एयरपोर्ट की प्रॉपर्टी को नुकसान ना पहुंचाएं.
‘6 बजे नहीं बताया फ्लाइट रद्द हो गई’
यात्रियों के मुताबिक, गुरुवार को भुवनेश्वर से कोलकाता के लिए दोपहर 2:35 बजे फ्लाइट रवाना होनी तय थी. लेकिन तकनीकी कारणों से करीब 5:30 बजे उसे रद्द कर दिया गया. एयरपोर्ट पर इंतजार कर रहे यात्रियों ने आरोप लगाया कि एयरलाइंस के ग्राउंड ड्यूटी स्टाफ ने फ्लाइट रद्द होने तक कोई जानकारी उन्हें 6 बजे तक नहीं दी. इसी फ्लाइट से ये महिला भी अपने बीमार बेटे के साथ जाने वाली थीं. लेकिन घंटे इंतजार के बाद जब फ्लाइट अचानक रद्द कर दी गई तो उनका गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया और वे बीजू पटनायक इंटरनेशनल एयरपोर्ट (BPIA) पर हंगामा करने लगीं. इस वजह से कुल 65 यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा.
एयरपोर्ट पुलिस दर्ज नहीं किया केस
सीआईएसएफ के जवानों ने जब महिला को समझाकर कन्वेयर बेल्ट से नीचे उतार दिया तब उन्होंने एयरपोर्ट पुलिस को मामले की जानकारी दी. इसके बाद एयरपोर्ट पुलिस टर्मिनल पर पहुंची और महिला को समझाया-बुझाया. एयरपोर्ट पुलिस स्टेशन के एक अधिकारी ने बताया, ‘कुछ यात्रियों ने अपने टिकट रद्द करवा लिए, जबकि महिला समेत अन्य यात्री रात 11 बजे दूसरी फ्लाइट से रवाना हुए.’ उन्होंने यह भी बताया कि इस मामले में कोई केस दर्ज नहीं किया गया है. घटना का वीडियो उसी दिन वायरल हो गया था.
लोगों ने सोशल मीडिया पर इस घटना देखकर क्या कहा?
एक यूजर ने लिखा, ‘अगर यही फ्लाइट खराब मौसम की वजह से कैंसिल हो जाती, तो क्या होता? यह बकवास है. उस महिला को गिरफ्तार किया जाना चाहिए. कोई बहाना नहीं चलेगा. व्यवहार करने का यह तरीका सही नहीं है. आप शिकायत कर सकते हैं, कोर्ट जा सकते हैं. लेकिन चिल्लाना और डराना-धमकाना हर तरह से गलत है.’
दूसरे यूजर ने लिखा, ‘मैं आपकी बात समझता हूं, लेकिन आम लोगों का इन संस्थाओं पर कोई भरोसा नहीं है. इंडिगो के खिलाफ किसी व्यक्ति का केस लड़ना मुश्किल होगा. और हमने पहले भी देखा है कि इंडिगो सरकार पर दबाव डालकर अपनी मर्जी का काम करवा लेती है. हालांकि, स्टाफ के लिए यह दुख की बात है.’
तीसरे यूजर ने लिखा, ‘मेरा इस एयरलाइन के साथ एक बार अनुभव रहा है. बड़ी फ़्लाइट से छोटी फ़्लाइट में बदलाव हुआ और बिना किसी सूचना के मेरी सीट भी बदल दी गई. मुझे इसके बारे में सिर्फ चेक-इन के समय पता चला, और जिम्मेदार स्टाफ ने आकर समझाने की जहमत भी नहीं उठाई. बैठने की जगह बहुत तंग हो गई थी. वह मेरा पहला और आखिरी अनुभव था.’