महाकाल मंदिर में ‘पुष्पा’ गेटअप में युवक को VIP दर्शन: साड़ी-ब्लाउज, पायल-चूड़ियां पहनकर पहुंचा, कर्मचारियों ने खिंचवाई फोटो; वायरल VIDEO के बाद सुपरवाइजर हटाया गया

मध्य प्रदेश के उज्जैन के महाकाल मंदिर में एक युवक फिल्म पुष्पा के अभिनेता अल्लू अर्जुन के स्टाइल में साड़ी-ब्लाउज पहनकर दर्शन करने पहुंचा। उसके पैरों में पायल, गले में नींबू की माला और हार, कानों में टॉप्स, नाक में नथनी और हाथों में चूड़ियां थीं। मंदिर में VIP दर्शन को लेकर विवाद खड़ा गया। मंदिर प्रबंधन ने सुपरवाइजर को हटा दिया है।

वायरल वीडियो के मुताबिक, सुरक्षाकर्मियों और मंदिर समिति के कर्मचारियों ने युवक को नहीं रोका। उसके साथ फोटो भी खिंचवाई, जबकि महाकाल मंदिर परिसर में फोटोग्राफी और वीडियो बनाने पर पहले से प्रतिबंध है। इसकी निगरानी की जिम्मेदारी भी कर्मचारियों और सुरक्षाकर्मियों की होती है।

ये 5 तस्वीरें देखिए…

मंदिर समिति के कर्मचारी और सुरक्षाकर्मी भी उसके साथ फोटो खिंचवाते नजर आए।

पुष्पा स्टाइल में एक्ट करते नजर आ रहा है युवक।

युवक को VIP दर्शन कराने ले जाते कर्मचारी।

महाकाल मंदिर में VIP दर्शन के दौरान की तस्वीर।

फिल्म पुष्पा के वेशभूषा में दर्शन करने आए युवक को प्रोटोकॉल भी मिला।

VIP दर्शन कराने ले गए मंदिर के कर्मचारी

बताया जा रहा है कि युवक को सामान्य श्रद्धालु की तरह नहीं, बल्कि विशेष सुविधा के साथ प्रवेश मिला। वायरल वीडियो में वह मंदिर के अलग-अलग हिस्सों में घूमता दिख रहा है। मंदिर का एक कर्मचारी उसे वीआईपी श्रद्धालु की तरह गणेश मंडपम तक दर्शन कराने ले गया।

मंदिर परिसर में बनाए वीडियो

युवक ने मंदिर परिसर के भीतर वीडियो भी बनाए, जबकि सामान्य श्रद्धालुओं को इसकी अनुमति नहीं होती। महाकाल मंदिर में मोबाइल से वीडियो और फोटोग्राफी को लेकर पहले भी विवाद हो चुके हैं। वायरल वीडियो में सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े कर्मचारी ही युवक के साथ फोटो और वीडियो बनाते नजर आ रहे

सोशल मीडिया पर भड़के यूजर्स।

सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो

जानकारी के अनुसार, वीडियो इंस्टाग्राम और फेसबुक पर Ankit Astoliya नाम की आईडी से अपलोड किए गए हैं। संबंधित अकाउंट पर इसी वेशभूषा में बने कई अन्य वीडियो भी बताए जा रहे हैं। इनके वायरल होने के बाद मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था और नियमों के पालन पर सवाल उठे हैं।

जांच के बाद सुपरवाइजर हटाया गया

महाकाल मंदिर के प्रशासक प्रथम कौशिक ने बताया कि वायरल वीडियो 5 फरवरी का है। वीडियो सामने आने के बाद जांच की गई थी और संबंधित सुपरवाइजर को पद से हटा दिया गया था। उन्होंने कहा कि मंदिर परिसर में किसी को विशेष अनुमति देना और फोटोग्राफी या वीडियोग्राफी होने देना निर्धारित व्यवस्था और मर्यादा के विपरीत है।

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