MP की कॉलेज राजनीति में अब तक मुख्य मुकाबला भाजपा के छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) और कांग्रेस के NSUI के बीच रहा है। लेकिन इस बार छात्रसंघ चुनाव में पहली बार जय आदिवासी युवा शक्ति (जयस) भी सीधे मैदान में उतरने जा रहा है।
जयस ने प्रदेश के सभी कॉलेजों में उम्मीदवार उतारने की तैयारी शुरू कर दी है। संगठन की ओर से खासतौर पर आदिवासी समाज के युवाओं को उम्मीदवार बनाने की रणनीति तैयार की जा रही है। नौ साल बाद मध्य प्रदेश में छात्र संघ के चुनाव होने जा रहे हैं।
जयस की छात्र राजनीति में एंट्री से उन कॉलेजों में चुनावी समीकरण बदल सकते हैं, जहां आदिवासी विद्यार्थियों की संख्या बड़ी है। अब तक इन विद्यार्थियों को अपने साथ जोड़ने के लिए एबीवीपी और एनएसयूआई के बीच मुकाबला रहता था। जयस के सीधे मैदान में आने से पहली बार इन दोनों संगठनों के सामने आदिवासी विद्यार्थियों के बीच अपनी पकड़ बनाए रखने की चुनौती होगी।
आदिवासी दिवस पर छात्र राजनीति में उतरने का ऐलान
जयस की कॉलेज राजनीति में एंट्री का ऐलान संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष लोकेश मुजाल्दे ने रविवार को आदिवासी दिवस के मौके पर इंदौर में आयोजित कार्यक्रम में किया। सभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि जयस अब कॉलेजों में भी विद्यार्थियों की आवाज बनेगा और छात्रसंघ चुनाव में संगठन अपने उम्मीदवार उतारेगा।
जयस छात्र संगठन के प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल बघेल ने बताया कि संगठन पूरे प्रदेश के कॉलेजों में चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहा है। इसके लिए जल्द ही कॉलेज स्तर पर विद्यार्थियों से संपर्क अभियान शुरू किया जाएगा।

मालवा-निमाड़ से शुरू होगा अभियान
जयस के पदाधिकारी सबसे पहले मालवा और निमाड़ क्षेत्र के कॉलेजों का दौरा करेंगे, इन क्षेत्रों में आदिवासी विद्यार्थियों की संख्या अधिक है। यहां विद्यार्थियों से सीधे संवाद कर छात्र समस्याओं और स्थानीय मुद्दों की जानकारी ली जाएगी। इसके बाद प्रदेश के दूसरे जिलों में अभियान चलाया जाएगा।
बाबूलाल बघेल ने कहा जयस पूरे प्रदेश के सभी कॉलेजों में मजबूती के साथ चुनाव लड़ेगा। छात्रसंघ चुनाव की तैयारी लंबे समय से चल रही है। पूरे प्रदेश में जहां आदिवासी समाज के विद्यार्थी पढ़ते हैं, वहां जाएंगे और विद्यार्थियों से संपर्क करेंगे। हमें उम्मीद है कि जहां भी विद्यार्थी पढ़ रहे हैं, वहां हमारी जीत होगी।
आदिवासी विद्यार्थियों पर फोकस
जयस की रणनीति का सबसे बड़ा फोकस आदिवासी विद्यार्थियों पर रहेगा। प्रदेश के कई कॉलेजों और यूनिवर्सिटी में आदिवासी समाज के विद्यार्थी बड़ी संख्या में पढ़ते हैं। संगठन इन्हीं विद्यार्थियों के बीच अपना आधार मजबूत करने की तैयारी कर रहा है। छात्रवृत्ति, रोजगार, प्रतियोगी परीक्षाओं, बैकलॉग पदों और कॉलेजों से जुड़ी स्थानीय समस्याओं को अभियान में प्रमुखता दी जाएगी।
बैकलॉग भर्ती और पटवारी परीक्षा के मुद्दे पहले से उठा रहा जयस
छात्र राजनीति में उतरने से पहले भी जयस युवाओं से जुड़े मुद्दों पर सक्रिय रहा है। संगठन की सरकार से प्रमुख मांगों में युवाओं के लिए बैकलॉग पदों की भर्ती और पटवारी परीक्षा में नेगेटिव मार्किंग खत्म करना शामिल है। इंदौर, भोपाल समेत प्रदेश के कई जिलों में संगठन इन मुद्दों को लेकर प्रदर्शन भी कर चुका है। अब इन्हीं मुद्दों को कॉलेजों में विद्यार्थियों के बीच ले जाने की तैयारी है।

जयस के आने से एबीवीपी और एनएसयूआई के समीकरण पर असर
मध्यप्रदेश की कॉलेज राजनीति में लंबे समय से एबीवीपी और एनएसयूआई का दबदबा रहा है। दोनों संगठन कॉलेजों में छात्र मुद्दों को लेकर सक्रिय रहते हैं और छात्रसंघ चुनाव इनके लिए राजनीतिक कैडर तैयार करने का महत्वपूर्ण माध्यम भी रहे हैं। अब जयस की एंट्री से पहली बार मुकाबले में तीसरा प्रमुख छात्र संगठन सामने होगा। खासतौर पर आदिवासी बहुल इलाकों के कॉलेजों में इसका असर देखने को मिल सकता है।
2013 में बना जयस, दो साल पहले शुरू किया छात्र संगठन
जय आदिवासी युवा शक्ति यानी जयस का गठन 2013 में हुआ था। संगठन लंबे समय से आदिवासी समाज और युवाओं से जुड़े मुद्दों को लेकर सक्रिय रहा है। अब जयस ने छात्र राजनीति के लिए अलग छात्र संगठन तैयार किया है, जिसका गठन करीब दो साल पहले किया गया था।
सितंबर में चुनाव, तारीख का ऐलान बाकी
मध्यप्रदेश में 2017 के बाद छात्रसंघ चुनाव नहीं हुए हैं। अब सितंबर में चुनाव कराए जाने की तैयारी है, हालांकि सरकार ने अभी चुनाव की अंतिम तारीख घोषित नहीं की है।