दिल्ली एम्स की टीम ने मॉडल-एक्ट्रेस ट्विशा शर्मा की मौत को आत्महत्या बताया है। टीम के मुताबिक, ट्विशा के शव पर ऐसी कोई चोट नहीं थी, जिससे मेडिकोलीगल (कानूनी और चिकित्सीय) नजरिए से हमले या संघर्ष का संकेत मिलता हो।
CBI ने करीब 150 गवाहों से पूछताछ करने के बाद चार्जशीट तैयार की है।
दिल्ली के ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (AIIMS) के पांच सदस्यों वाले मेडिकल बोर्ड ने CBI को सौंपी 11 पन्नों की अपनी रिपोर्ट में ये बात कही है। सीलबंद लिफाफे में 10 जुलाई को दी गई ये फाइनल फोरेंसिक रिपोर्ट सोमवार को सामने आई।
इधर, मामले में CBI ने कोर्ट में 636 पेज की चार्जशीट पेश कर दी है। इसमें दोनों आरोपियों- ट्विशा की सास रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह और पति समर्थ सिंह के खिलाफ दहेज हत्या का आरोप लगाया गया है।
CBI ने दोनों पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 80 (2) यानी दहेज हत्या, धारा 85 यानि पति या उसके रिश्तेदार द्वारा महिला के साथ क्रूरता, धारा 108 यानी आत्महत्या के लिए उकसाना, 3 (5) दहेज के लेनदेन के अलावा दहेज प्रतिषेध अधिनियम, 1961 की धारा 3 और 4 लगाई है। ट्विशा के चचेरे भाई आशीष शर्मा ने कहा- चार्जशीट में क्रूरता के आरोपों की पुष्टि हुई है।

24 मई को डेडबॉडी का दूसरा पोस्टमॉर्टम किया था
बता दें कि मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के 22 मई के आदेश पर दिल्ली एम्स के मेडिकल बोर्ड ने 24 मई को ट्विशा की डेडबॉडी का दोबारा पोस्टमॉर्टम किया था। एम्स में फोरेंसिक मेडिसिन विभाग के प्रमुख डॉ. सुधीर गुप्ता ने कहा- किसी नतीजे पर पहुंचने से पहले बोर्ड ने सभी संभावित पहलुओं से मामले की विस्तार से जांच की।
उन्होंने कहा- यह आत्महत्या का मामला था और शव पर मारपीट का कोई निशान नहीं मिला।
12 मई को हुई थी ट्विशा की मौत
ट्विशा शर्मा 12 मई 2026 की रात भोपाल के कटारा हिल्स स्थित अपने ससुराल में मृत मिली थीं। ससुराल पक्ष ने इसे आत्महत्या बताया था, जबकि मायके पक्ष ने हत्या का आरोप लगाया। पहले पोस्टमॉर्टम पर सवाल उठने के बाद हाईकोर्ट ने दिल्ली AIIMS से दोबारा पोस्टमॉर्टम कराने के निर्देश दिए थे।

सीबीआई ने ट्विशा के वजन के बराबर भार वाली डमी के साथ सीन रिक्रिएट किया था।
लैपटॉप का पासवर्ड देने में आपत्ति नहीं
इससे पहले 3 अगस्त को हुई सुनवाई में सीबीआई ने आरोपी समर्थ सिंह का वॉइस सैंपल लेने और उसके लैपटॉप का पासवर्ड उपलब्ध कराने की मांग की थी।
समर्थ सिंह की ओर से उनके वकील ने लैपटॉप का पासवर्ड देने पर कोई आपत्ति नहीं जताई। वहीं, वॉइस सैंपल को लेकर शर्त रखी कि वॉइस सैंपल की एक कॉपी सुरक्षित रूप से कोर्ट में भी रखी जाए।
इस पर सीबीआई का कहना था कि डिजिटल साक्ष्यों की जांच और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के विश्लेषण के लिए लैपटॉप का पासवर्ड और वॉइस सैंपल महत्वपूर्ण हैं।