एअर इंडिया और एअर इंडिया एक्सप्रेस के सभी पायलटों की अब रोज जांच होगी कि उन्होंने प्रतिबंधित दवाओं या नशीले पदार्थों का नशा तो नहीं किया है।
सूत्रों के हवाले से यह जानकारी दी है। यह टेस्ट आज से अनिवार्य कर दिया गया है। दोनों एयरलाइंस में 5 हजार से ज्यादा पायलट हैं।
पिछले हफ्ते फुकेट-दिल्ली फ्लाइट के एक पायलट का ड्रग टेस्ट पॉजिटिव आने के बाद यह फैसला लिया गया। दरअसल, इस फ्लाइट के भुवनेश्वर से गुजरते समय अचानक टर्बुलेंस जैसे हालात बने और यह करीब 300 फीट नीचे आ गई थी। जिससे यात्रियों और क्रू मेंबर्स को चोटें आई थीं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस घटना के बाद पायलट (कैप्टन) के दो ड्रग्स टेस्ट हुए थे। दोनों टेस्ट पॉजिटिव थे। दूसरे में गांजा पीने की पुष्टि हुई थी। फ्लाइट के पैसेंजर ने आरोप लगाया था कि पायलट नशे में था।

तस्वीर 4 अगस्त की है, जब फुकेट-दिल्ली फ्लाइट दिल्ली एयरपोर्ट पर लैंड हुई तो उसमें से कई घायल यात्री बाहर आए।
एयरलाइंस ने कहा- भरोसा जीतने के लिए कदम
दोनों एयरलाइंस ने पायलटों से कहा है कि मौजूदा नियमों के तहत प्रतिबंधित सभी नशीले पदार्थों और दवाओं की जांच की जाएगी।
पायलटों का टेस्ट गुरुग्राम की अकादमी में ट्रेनिंग के दौरान होगा। इसके अलावा फ्लाइट के बाद ब्रीफिंग सेंटर, एयरलाइंस के ऑफिस और संबंधित बेस पर भी टेस्ट किए जाएंगे
एयरलाइंस ने कहा कि यह कदम यात्रियों की सुरक्षा और उनका भरोसा बनाए रखने के लिए उठाया गया है।
इन पॉइंट्स पर AAIB की जांच शुरू
एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टीगेशन ब्यूरो (AAIB) ने मामले की जांच शुरू कर दी है। AAIB ने कहा कि जांच पूरी होने तक कोई नतीजा नहीं निकाला जाना चाहिए। यह पता लगाने की कोशिश करेगा…
- विमान की ऊंचाई अचानक क्यों बदली।
- उस समय विमान के सिस्टम किस स्थिति में थे।
- मौसम और टर्बुलेंस की क्या भूमिका थी।
- पायलटों ने क्या एक्शन लिया।
- विमान के मेन्टेनेंस रिकॉर्ड में क्या जानकारी है।
- यात्रियों और क्रू को किस तरह की चोटें आईं।
- फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर और कॉकपिट वॉइस रिकॉर्डर में क्या दर्ज है।
पायलट उड़ान से 12 घंटे पहले तक किसी भी तरह का नशा नहीं कर सकता
पायलट्स के लिए अल्कोहल को लेकर डीजीसीए (DGCA) के नियम बेहद सख्त हैं। एयरक्राफ्ट रूल्स, 1937 के नियम 24 के तहत, किसी भी पायलट या क्रू मेंबर को उड़ान से 12 घंटे पहले तक किसी भी तरह के मादक पदार्थ या अल्कोहल का सेवन करने की मनाही है। उड़ान के दौरान भी इसका सेवन पूरी तरह प्रतिबंधित है।

एविएशन सेक्टर में पायलटों के लिए अनिवार्य मेडिकल टेस्ट
- क्लास 2 मेडिकल: यह स्टूडेंट पायलट लाइसेंस (SPL) के लिए जरूरी है और फ्लाइट ट्रेनिंग शुरू करने से पहले अनिवार्य है।क्लास 1 मेडिकल: यह कमर्शियल पायलट लाइसेंस (CPL) और एयरलाइन पायलटों के लिए जरूरी है। इसमें शारीरिक, मानसिक, विजन, हियरिंग और हार्ट से जुड़ी जांच की जाती है।
- ब्रीथ-एनालाइजर टेस्ट: फ्लाइट से पहले और लैंडिंग के बाद पायलटों का ब्रीथ-एनालाइजर टेस्ट किया जाता है। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि पायलट के शरीर में अल्कोहल (शराब) का लेवल जीरो हो, क्योंकि एविएशन सेक्टर में इसे लेकर ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाई जाती है।
- साइकोएक्टिव सब्सटेंस (ड्रग) टेस्ट: पायलटों के लिए नशीले पदार्थों या साइकोएक्टिव सब्सटेंस की जांच भी अनिवार्य है। इसके तहत रैंडम ड्रग टेस्टिंग की जाती है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि पायलट किसी भी प्रतिबंधित दवा या नशीले पदार्थ के प्रभाव में नहीं हैं।
ड्रग टेस्ट पॉजिटिव होने पर पायलट के खिलाफ कार्रवाई
- टेस्ट और एक्शन: नमूने को दो हिस्सों में बांटा जाता है। स्क्रीनिंग टेस्ट ‘नॉन-नेगेटिव’ आने पर पायलट को तुरंत ड्यूटी से हटा दिया जाता है और दूसरे नमूने की पुष्टि के लिए लैब में जांच होती है
- पहली बार पॉजिटिव: कन्फर्मेटरी टेस्ट में पहली बार पॉजिटिव आने पर पायलट को रिहैब भेजा जाता है। दोबारा टेस्ट नेगेटिव और मेडिकल फिटनेस सर्टिफिकेट मिलने तक वह उड़ान नहीं भर सकता।
- बार-बार उल्लंघन: दूसरी बार पॉजिटिव पाए जाने पर लाइसेंस 3 साल तक निलंबित किया जा सकता है। तीसरी बार पॉजिटिव होने पर लाइसेंस रद्द किया जा सकता है।
- नौकरी से बर्खास्तगी: लाइसेंस रद्द होना रेगुलेटरी एक्शन है, जबकि नौकरी से बर्खास्तगी एयरलाइन की पॉलिसी पर निर्भर करता है।
