125 एकड़ गोशाला जमीन आवंटन में कथित सौदेबाजी: शिकायत के बाद मुख्यमंत्री ने मंत्री लखन पटेल से छीना पशुपालन विभाग

मप्र में बड़ी स्वावलंबी गोशालाओं के लिए 125 एकड़ जमीन आवंटन की एलओआई (लेटर ऑफ इंटेंट) जारी करने में कथित सौदेबाजी की शिकायत पशुपालन एवं डेयरी विभाग के राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) लखन पटेल पर भारी पड़ गई

सूत्रों के अनुसार, शिकायत दिल्ली तक पहुंची। रात 9 बजे संगठन का संदेश मिलते ही कार्रवाई शुरू हुई और 11 बजे राज्यपाल से मंजूरी मिल गई। कुछ ही घंटों में उनसे पशुपालन विभाग छीन लिया गया।मोहन सरकार में यह पहला मामला है, जब किसी मंत्री का विभाग इतनी तेजी से बदला गया। फेरबदल के बाद पटेल को आनंद विभाग का प्रभार दिया गया। इससे वे 2365 करोड़ के बजट वाले पशुपालन विभाग से सीधे 12 करोड़ के आनंद विभाग में पहुंच गए।

प्रदेश में ऐसी 14 गौशालाएं स्थापित की जानी हैं। अब तक सात परियोजनाओं के टेंडर प्रक्रिया में लिए गए, जबकि चार के लिए एलओआई जारी की गई थी। इन्हीं एलओआई जारी करने की प्रक्रिया में कथित अनियमितता और सौदेबाजी की शिकायत दिल्ली तक पहुंची। इसके बाद सरकार ने तत्काल विभागीय बदलाव का निर्णय लिया।एलओआई (लेटर ऑफ इंटेंट) किसी संस्था या आवेदक की ओर से परियोजना या जमीन आवंटन की प्रक्रिया में प्रारंभिक सहमति और शर्तों को दर्ज करने वाला दस्तावेज होता है। इसी चरण को लेकर उठे विवाद ने विभागीय कार्रवाई की भूमिका तैयार की।

हटाने के पीछे बताए जा रहे चार बड़े कारण… चार घंटे में बदलाव की पूरी कहानी

1. डेयरी प्रोजेक्ट में सुस्ती एनडीडीबी के 1,500 करोड़ रु. के डेयरी प्रोजेक्ट में अपेक्षित प्रगति नहीं हो सकी। सांची दुग्ध संघ राज्य सरकार की गारंटी पर कर्ज भी नहीं ले पाया। इस मुद्दे पर सीएम पहले ही समीक्षा बैठक में नाराजगी जता चुके थे।

2. गोशाला योजना पर शिकायतें मुख्यमंत्री स्वावलंबी गोशाला योजना के क्रियान्वयन में लापरवाही और धीमी प्रगति की शिकायतें संघ व सरकार तक पहुंचीं। समन्वय, मॉनिटरिंग और कार्यों में देरी को लेकर लगातार सवाल उठे, जिससे असंतोष बढ़ता गया।

3. एनडीडीबी समझौते में देरी मप्र राज्य सहकारी डेयरी संघ और छह दुग्ध संघों का प्रबंधन एनडीडीबी को सौंपने के फैसले के बाद भी फाइलें लंबित रहीं। निर्णय लागू करने में देरी की शिकायत केंद्र सरकार तक पहुंच गई थी।

4. जमीन आवंटन पर विवाद मुख्यमंत्री स्वावलंबी गोशाला योजना में पात्र संस्थाओं के बजाय अपात्रों को जमीन आवंटित करने की शिकायतें सामने आईं। विवाद बढ़ने पर एक अधिकारी हटाया गया और मामला संघ व सरकार के शीर्ष स्तर तक पहुंच गया।

मोहन सरकार में इतनी तेजी मंत्री को भी पता नहीं चला…

  • मंगलवार 9 बजे दिल्ली से मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के पास फोन आया। उस समय भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल भी सीएम के साथ थे।
  • दस बजे के करीब मुख्य सचिव अनुराग जैन को मैसेज गया। सीएस ने सामान्य प्रशासन विभाग को ई-नोटिफिकेशन की प्रक्रिया के निर्देश दिए।
  • रात 11 बजे राज्यपाल मंगुभाई पटेल को जगा कर उनसे मंजूरी ली गई।
  • मध्यरात्रि बाद करीब 1 बजे विभाग छीनने का नोटिफिकेशन जारी हो गया।