महाकाल सेना ने अखाड़ा परिषद को एक औपचारिक स्मरण-पत्र भेजा है। इस पत्र में स्पष्ट किया गया है कि चैत्र मास की नवरात्रि में ‘नगर पूजा’
का कोई उल्लेख वेद-शास्त्रों में नहीं मिलता है। पत्र की एक प्रति भी सार्वजनिक हुई है।

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उज्जैन का चौबीस खंभा मंदिर।
पहले भी पूछा पर जवाब नहीं मिला
संगठन ने बताया कि इस विषय पर पहले भी अखाड़ा परिषद को पत्र भेजकर पूछा गया था कि यह पूजा शास्त्र सम्मत है या नहीं, लेकिन तब कोई जवाब नहीं मिला था। इसी कारण अब दोबारा स्मरण-पत्र भेजकर स्थिति स्पष्ट करने की मांग की गई है।
महाकाल सेना ने आशंका व्यक्त की है कि यदि शास्त्रों के विरुद्ध इस तरह की परंपराएं शुरू की जाती हैं, तो इससे उज्जैन की धार्मिक व्यवस्था और आम जनता में भ्रम की स्थिति पैदा हो सकती है।
नगर पूजा आश्विन नवरात्रि की अष्टमी पर
महाकाल सेना के संरक्षक महेश पुजारी ने बताया कि परंपरागत रूप से नगर पूजा आश्विन नवरात्रि की अष्टमी पर शासकीय स्तर पर होती है, जिसमें प्रशासन की भागीदारी रहती है और विधि-विधान से आयोजन किया जाता है। चैत्र नवरात्रि में इस तरह की किसी शासकीय मान्यता का उल्लेख नहीं मिलता है।

समाज तय करेगा ऐसा नेतृत्व स्वीकार योग्य या नहीं
संगठन प्रमुख राम शर्मा ने बताया कि स्मरण-पत्र में अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष से अपील की गई है कि वे सनातन धर्म और वेद-शास्त्रों के ज्ञाता होने के नाते इस विषय पर स्पष्ट जवाब दें और सही परंपरा को सामने रखें। उन्होंने यह भी कहा कि यदि इस मुद्दे पर धर्मसम्मत स्थिति स्पष्ट नहीं की गई, तो समाज को यह तय करना पड़ेगा कि ऐसे नेतृत्व को स्वीकार किया जाए या नहीं।
लोकप्रियता के लिए ऐसा का रहे
इस पूरे मामले में रविंद्र पूरी महाराज से जब चर्चा की गई तो उन्होंने कहा कि ये जो भी है लोकप्रियता के लिए ये इस तरह का कार्य कर रहे हैं, कौन हैं ये क्या हैं में इनको जानता तक नहीं।