दतिया में चुनावी शांति…भोजशाला फिर चर्चा में … कौशल किशोर चतुर्वेदी

दतिया में चुनावी शांति…भोजशाला फिर चर्चा में …
दतिया विधानसभा उपचुनाव फिलहाल शांति के दौर से गुजर रहा है। वहीं शांति की तरफ बढ़ चुकी भोजशाला एक बार फिर चर्चा में है। दतिया विधानसभा उपचुनाव में डॉ. नरोत्तम मिश्रा को टिकट न मिलने के बाद नाराज हुए उनके समर्थक कार्यकर्ता अब पूरी तरह से शांत नजर आ रहे हैं। हालांकि कार्यकर्ताओं की यह खामोशी कहर ढा सकती है, इसमें कोई संदेह नहीं है। लेकिन चुनावी हार में भी भाजपा विचारधारा की जीत का संदेश अवश्य हर कार्यकर्ता तक पहुंचाकर ही रहेगी। वहीं हाईकोर्ट द्वारा भोजशाला को हिन्दू स्थल घोषित करने के बाद निराश हुए मुस्लिम संप्रदाय को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम व्यवस्था के जरिए संतुलन बनाने की कोशिश की है। हालांकि इससे मुस्लिम संतुष्ट होंगे, यह उम्मीद कम ही है क्योंकि मुस्लिम संप्रदाय परिसर के पास नहीं बल्कि भोजशाला परिसर में नमाज पढ़ने की बात कर रहा है। फिर भी, सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के चलते भोजशाला एक बार फिर चर्चा में है।
भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रभारी डॉ. महेंद्र सिंह एवं क्षेत्रीय संगठन महामंत्री अजय जामवाल ने 14 जुलाई 2026 को दतिया में आयोजित चुनावी बैठक को संबोधित किया। डॉ. महेंद्र सिंह ने अपील की कि प्रत्येक कार्यकर्ता को पूरी ताकत के साथ मैदान में उतरना होगा। प्रधानमंत्री के विकसित भारत के सपने को साकार करने भाजपा को विजयी बनाएं। बूथ को जिम्मेदारी मानकर कार्यकर्ता योजनाबद्ध तरीके से कार्य करें। हर कार्यकर्ता अपना बूथ भारी मतों से जीतने का लक्ष्य लेकर चुनाव कार्य में जुटे। हालांकि दतिया के कार्यकर्ताओं की निराशा ऐसी नसीहतों से कितनी दूर हो पाती है यह देखने वाली बात होगी।
वहीं मध्य प्रदेश के धार स्थित भोजशाला परिसर को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने 14 जुलाई 2026 को अहम निर्देश दिया है। सीजेआई सूर्यकांत ने मध्य प्रदेश सरकार से कहा कि कोई अंतरिम व्यवस्था राज्य सरकार की ओर से की जाए, ताकि दोनों पक्षों को कोई परेशानी नहीं हो और नमाज भी अदा की जा सके। इस मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट में सीजेआई सूर्यकांत ने अंतरिम व्यवस्था करते हुए कहा कि भोजशाला परिसर से सटी एक खुली जगह मुस्लिम पक्ष को शुक्रवार की नमाज अदा करने के लिए उपलब्ध कराई जाए। सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि यह केवल अंतरिम व्यवस्था है और इससे किसी भी पक्ष के अधिकारों या दावों पर अंतिम फैसला नहीं माना जाएगा। कोर्ट ने कहा कि इस व्यवस्था का उद्देश्य मामले के अंतिम निपटारे तक शांति और सौहार्द बनाए रखना है। जिससे किसी भी पक्ष को असुविधा न हो और मुस्लिम पक्ष पहले की तरह नमाज भी अदा कर सके। सीजेआई सूर्यकांत की बेंच ने मध्य प्रदेश सरकार और धार प्रशासन से कहा कि वे कॉम्प्लेक्स के पास कोई वैकल्पिक जगह उपलब्ध कराएं, ताकि मुसलमान शुक्रवार को नमाज पढ़ सकें। सुप्रीम कोर्ट ने इसके साथ ही कहा कि एएसआई कॉम्प्लेक्स में कोई ढांचागत बदलाव नहीं करेगा और न ही सुप्रीम कोर्ट की इजाजत के बिना कोई ढांचा खड़ा करेगा। वहीं मध्य प्रदेश सरकार की ओर से पेश एसजी तुषार मेहता ने कहा कि हाईकोर्ट के 15 मई के आदेश के बाद कुछ घटनाएं हुई थीं, जिन्हें काबू में कर लिया गया और वहां पर शांति बनी हुई है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जमीनी हालात में किसी भी बदलाव से तनाव बढ़ सकता है और कानून-व्यवस्था की स्थिति पैदा हो सकती है। सुप्रीम कोर्ट 15 दिन के बाद मामले पर विस्तृत सुनवाई करेगा।
गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुनवाई हुई, जिसमें भोजशाला को मां सरस्वती को समर्पित मंदिर मानने संबंधी निष्कर्षों पर सवाल उठाए गए हैं। हिंदू पक्ष का दावा है कि भोजशाला मां सरस्वती का प्राचीन मंदिर है,जबकि मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौला मस्जिद बताता है। बहस के दौरान सीजेआई सूर्यकांत की पीठ ने दोनों पक्षों के वरिष्ठ वकीलों से कहा कि यह अत्यंत संवेदनशील मामला है, इसलिए दलील देते समय शब्दों का चयन बेहद सावधानी से किया जाए। बेंच ने यह भी कहा कि इस मामले की अंतिम सुनवाई उस दिन तय की जाएगी, जब दोनों पक्षों के वरिष्ठ वकीलों के पास पर्याप्त समय हो। अदालत ने संकेत दिया कि जरूरत पड़ने पर पूरे दिन इस मामले की सुनवाई की जाएगी। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहन की पीठ ने मामले की सुनवाई की। हालांकि, कोर्ट ने फिलहाल अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया। यानी पहले जैसी व्यवस्था बहाल नहीं होगी, जिसके तहत शुक्रवार को मुस्लिम समुदाय को नमाज और निर्धारित दिनों में हिंदू पक्ष को पूजा की अनुमति थी।

कुल मिलाकर, अब दतिया चुनाव
में भाजपा कसौटी पर है। यदि भाजपा को सर्वे में डॉ. नरोत्तम मिश्रा की स्थिति बेहतर नजर नहीं आ रही थी तब उनके चुनाव प्रचार से कमल की जीत जैसी उम्मीद शायद एक दिखावा है। पर यह बात तय है कि दतिया का चुनाव शांति से ही संपन्न होने वाला है। वहीं, भोजशाला में भी सुप्रीम कोर्ट, मुस्लिम संप्रदाय की उस इच्छा से पल्ला झाड़ चुका है जिसमें भोजशाला परिसर में नमाज पढ़ने का प्रावधान था। पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के साथ भोजशाला एक बार फिर चर्चा में जरूर है…।

कौशल किशोर चतुर्वेदी

कौशल किशोर चतुर्वेदी मध्यप्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार हैं। प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में पिछले ढ़ाई दशक से सक्रिय हैं। पांच पुस्तकों व्यंग्य संग्रह “मोटे पतरे सबई तो बिकाऊ हैं”, पुस्तक “द बिगेस्ट अचीवर शिवराज”, ” सबका कमल” और काव्य संग्रह “जीवन राग” के लेखक हैं। वहीं काव्य संग्रह “अष्टछाप के अर्वाचीन कवि” में एक कवि के रूप में शामिल हैं। इन्होंने स्तंभकार के बतौर अपनी विशेष पहचान बनाई है।वर्तमान में भोपाल और इंदौर से प्रकाशित दैनिक समाचार पत्र “एलएन स्टार” में कार्यकारी संपादक हैं। इससे पहले इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में एसीएन भारत न्यूज चैनल में स्टेट हेड, स्वराज एक्सप्रेस नेशनल न्यूज चैनल में मध्यप्रदेश‌ संवाददाता, ईटीवी मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ में संवाददाता रह चुके हैं। प्रिंट मीडिया में दैनिक समाचार पत्र राजस्थान पत्रिका में राजनैतिक एवं प्रशासनिक संवाददाता, भास्कर में प्रशासनिक संवाददाता, दैनिक जागरण में संवाददाता, लोकमत समाचार में इंदौर ब्यूरो चीफ दायित्वों का निर्वहन कर चुके हैं। नई दुनिया, नवभारत, चौथा संसार सहित अन्य अखबारों के लिए स्वतंत्र पत्रकार के तौर पर कार्य कर चुके हैं