मिशन-2029 के मुद्दों का मैदानी परीक्षण जारी… शाह की सुनियोजित रणनीति बहुतों पर पड़ेगी भारी… कौशल किशोर चतुर्वेदी

मिशन-2029 के मुद्दों का मैदानी परीक्षण जारी… शाह की सुनियोजित रणनीति बहुतों पर पड़ेगी भारी…
केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 13 सितंबर 2026 को मुंबई में कहा था कि भाजपा नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) की 21 राज्यों में सरकारें 2029 से पहले समान नागरिक संहिता लागू करेंगी। और उसके बाद विहिप का बड़ा बयान आया है कि
भाजपा-राजग शासित राज्यों में 2029 तक यूसीसी लागू होना लैंगिक समानता की दिशा में बड़ा कदम है। वहीं यूसीसी का जेडीयू ने विरोध किया है और उसके बाद अब चिराग पासवान ने भी रुख साफ कर दिया है। चिराग पासवान ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि भारत में हर वर्ग के अपने रीति-रिवाज हैं। उन्होंने कहा कि हमारी पार्टी विविधता और समानता दोनों की पक्षधर है। अमित शाह ने लोकसभा चुनाव के ढाई साल पहले यूसीसी राग शायद इसीलिए छेड़ दिया है, ताकि एनडीए में भी इसके विरोधी सुरों का पता चल जाए ताकि अंतिम रणनीति बनाई जा सके। शाही कदम बहुत सोच समझकर आगे बढ़ते हैं ताकि समय की धारा में कौन साथ है और कौन विपक्षी खेमे में खड़ा होने को तैयार है, इसका समय रहते पता लगाया जा सके। पर एक बात तय है कि नक्सलवाद
मुक्त भारत की तरह ही यूसीसी भी 2029 लोकसभा चुनाव में एनडीए का
बड़ा मुद्दा बनकर राष्ट्रभक्त और राष्ट्रद्रोही का माहौल बनाने में बड़ी भूमिका निभाएगा।
विश्व हिंदू परिषद (विहिप) ने गृह मंत्री अमित शाह के बयान का 14 सितंबर 2026 को स्वागत किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि 2029 तक सभी भाजपा-राजग शासित राज्यों में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू कर दी जाएगी। संगठन ने कहा कि यह देश में लैंगिक असमानता और भेदभाव को खत्म करने की दिशा में एक ‘‘मील का पत्थर’’ साबित होगा।
शाह ने 13 सितंबर को संवाददाताओं को संबोधित करते हुए नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में पिछले 12 वर्षों में केंद्र सरकार की उपलब्धियों और भाजपा के 25 साल के सफर का जिक्र किया था।
शाह ने कहा, ‘‘तीन तलाक को समाप्त कर दिया गया है, जिससे मुस्लिम महिलाओं को समान अधिकार मिले हैं। हमने कई राज्यों में समान नागरिक संहिता लागू की है और मुझे विश्वास है कि 2029 से पहले हम भाजपा-राजग शासित सभी 21 राज्यों में इसे लागू कर देंगे।’’ और इसके साथ ही अगले लोकसभा चुनाव 2029 में होने हैं।
विहिप के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने कहा कि समान नागरिक संहिता बड़ी संख्या में उन महिलाओं को अपने अधिकार हासिल करने में सक्षम बनाएगी, जो पिछले 75 वर्षों से इनसे वंचित रही हैं। बंसल ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘यह महिलाओं और बच्चों को कट्टरपंथियों तथा अलगाववादियों के चंगुल से मुक्त कराने में भी मदद करेगा।’’ उन्होंने शाह के बयान को स्वागत योग्य बताते हुए दावा किया कि यूसीसी पहले ही पांच राज्यों में लागू की जा चुकी है और तीन अन्य राज्यों में इसे लागू करने की प्रक्रिया चल रही है। 2029 तक भारत के 80 प्रतिशत हिस्से में यूसीसी लागू होगी। उन्होंने गैर-भाजपा शासित राज्यों से भी इस मुद्दे पर पहल करने का आग्रह किया। बंसल ने कहा, ‘‘गैर भाजपा शासित राज्यों को भी यूसीसी लागू करने पर विचार करना चाहिए। आखिरकार, नागरिकों को समान अधिकार देना, महिलाओं को अधिकार देना और बच्चों के छीने गए अधिकारों को बहाल करना सरकार और प्रशासन की जिम्मेदारी है। यह सिर्फ नैतिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि संवैधानिक दायित्व भी है।’’
तो वहीं यूसीसी पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बयान पर सियासी संग्राम शुरू हो गया है। बिहार एनडीए में विरोध के स्वर सुनाई दिए। जेडीयू नेता श्याम रजक ने कहा कि किसी भी कीमत पर यह कानून बिहार में लागू नहीं होगा। जेडीयू के बाद अब बीजेपी के सहयोगी चिराग पासवान ने भी रुख साफ कर दिया है। अपने एक्स पोस्ट में चिराग पासवान ने कहा, “भारत का सामाजिक ताना-बाना विविधतापूर्ण है। हर वर्ग की अपनी नागरिक परंपराएं और रीति-रिवाज हैं। संविधान ने स्वयं इसे स्वीकार किया है- पांचवीं-छठी अनुसूची, अनुच्छेद 371A व 371G, और अब तक की हर संहिता में अनुसूचित जनजातियों को दी गई छूट इसका प्रमाण है। मेरी पार्टी लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) समानता और विविधता – दोनों के प्रति प्रतिबद्ध है। प्रारूप सार्वजनिक हो, सभी हितधारकों के हितों का अवलोकन हो, व्यापक विचार-विमर्श हो।”
तो मुंबई में शाह ने अपनों को परखने के लिए ही शायद यूसीसी पर अपना शाही मत व्यक्त किया था। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर भाजपा कदम आगे बढ़ाएगी,यह बात तय है। अपने किन साथियों को इस पथ पर चलने के लिए विदा करना पड़ेगा और कौन साथी इस पद पर चलने के लिए साथ जुड़ेंगे, यह आने वाला समय बताएगा। फिलहाल यही कहा जा सकता है कि मिशन-2029 के मुद्दों के लिए एनडीए का मैदानी परीक्षण जारी है… और शाह की सुनियोजित रणनीति बहुतों पर भारी पड़ने वाली है…।

कौशल किशोर चतुर्वेदी

कौशल किशोर चतुर्वेदी मध्यप्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार हैं। प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में पिछले ढ़ाई दशक से सक्रिय हैं। पांच पुस्तकों व्यंग्य संग्रह “मोटे पतरे सबई तो बिकाऊ हैं”, पुस्तक “द बिगेस्ट अचीवर शिवराज”, ” सबका कमल” और काव्य संग्रह “जीवन राग” के लेखक हैं। वहीं काव्य संग्रह “अष्टछाप के अर्वाचीन कवि” में एक कवि के रूप में शामिल हैं। इन्होंने स्तंभकार के बतौर अपनी विशेष पहचान बनाई है।वर्तमान में भोपाल और इंदौर से प्रकाशित दैनिक समाचार पत्र “एलएन स्टार” में कार्यकारी संपादक हैं। इससे पहले इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में एसीएन भारत न्यूज चैनल में स्टेट हेड, स्वराज एक्सप्रेस नेशनल न्यूज चैनल में मध्यप्रदेश‌ संवाददाता, ईटीवी मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ में संवाददाता रह चुके हैं। प्रिंट मीडिया में दैनिक समाचार पत्र राजस्थान पत्रिका में राजनैतिक एवं प्रशासनिक संवाददाता, भास्कर में प्रशासनिक संवाददाता, दैनिक जागरण में संवाददाता, लोकमत समाचार में इंदौर ब्यूरो चीफ दायित्वों का निर्वहन कर चुके हैं। नई दुनिया, नवभारत, चौथा संसार सहित अन्य अखबारों के लिए स्वतंत्र पत्रकार के तौर पर कार्य कर चुके हैं।

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