देश में पहली बार शेयर बाजार में लिस्ट होंगे ‘टेंपल बॉन्ड’: उज्जैन के 10 और नलखेड़ा के बगलामुखी मंदिर समेत 11 मंदिरों के विकास पर खर्च होंगे 1,124 करोड़, 200 करोड़ के बॉन्ड जारी होंगे; सिंहस्थ-2028 से पहले बनेंगे कालभैरव महालोक, शनि लोक और सांदीपनि लोक

देश में पहली बार धार्मिक स्थलों के विकास के लिए टेंपल बॉन्ड शेयर बाजार में लिस्ट किए जाएंगे। काल भैरव और भूखी माता सहित उज्जैन के 10 मंदिरों और नलखेड़ा के बगलामुखी माता मंदिर के विकास व सौंदर्यीकरण के लिए ये बॉन्ड जारी होंगे। इन्हें देश-विदेश के श्रद्धालु और आम निवेशक खरीद सकेंगे

अगले एक-दो महीने में इनकी ऑनलाइन खरीद-बिक्री शुरू होने की संभावना है। बॉन्ड की लिस्टिंग से पहले शेयर बाजार में होने वाली बेल सेरेमनी में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव शामिल होंगे और घंटी बजाएंगे।

उज्जैन विकास प्राधिकरण इन मंदिरों का जीर्णोद्धार कराएगा।

643 करोड़ लोन लेंगे, 200 करोड़ के बॉन्ड जारी होंगे

उज्जैन विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष रवि सोलंकी के मुताबिक, ये योजना 1,124 करोड़ रुपए की है। यूडीए की गारंटी पर 643 करोड़ रुपए का लोन ले रहे हैं। केंद्र से 25% राशि मिलने का प्रावधान है। ये 281 करोड़ रुपए है। इसके बाद स्टॉक एक्सचेंज में बेल सेरेमनी के जरिए 200 करोड़ के बॉन्ड जारी करने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

टेंपल बॉन्ड से देश-विदेश के श्रद्धालु मंदिरों के विकास में भागीदारी कर सकेंगे। प्रयोग सफल होने पर दूसरे मंदिरों के विकास में भी यह मॉडल अपनाया जा सकता है।

कमाई से कर्ज चुकाने और निवेशकों को भुगतान

योजना के तहत मंदिरों से जुड़े इको सिस्टम की कमाई से बैंक का कर्ज चुकाने और बॉन्ड निवेशकों को भुगतान करने का प्रस्ताव है। इसमें मंदिरों के आसपास की व्यावसायिक दुकानों, पार्किंग और प्रवेश शुल्क से मिलने वाला राजस्व शामिल होगा।

श्रद्धालुओं के लिए आधुनिक सुविधाएं जुटाएंगे

मंदिरों में पार्किंग, पेयजल, यात्री सुविधा केंद्र, सड़क व मार्ग विकास, लाइटिंग और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े काम होंगे।

सिंहस्थ-2028 में संभावित भीड़ को देखते हुए दर्शन मार्ग, आवागमन और ठहरने की सुविधाएं भी बेहतर बनाई जाएंगी।

सांदीपनि आश्रम को भी भव्य स्वरूप देने की योजना है।

सांदीपनि लोक: 139 करोड़ रुपए से बदलेगा आश्रम का स्वरूप

उज्जैन में श्रीमहाकाल महालोक के बाद भगवान श्रीकृष्ण की शिक्षास्थली सांदीपनि आश्रम को भव्य स्वरूप दिया जाएगा। करीब 5 हेक्टेयर में सांदीपनि लोक विकसित होगा। इसके लिए 139 करोड़ रुपए खर्च करने की योजना है। लक्ष्य सिंहस्थ-2028 से पहले निर्माण पूरा करना है।

मान्यता है कि भगवान श्रीकृष्ण ने इसी स्थान पर बलराम और सुदामा के साथ 16 विद्याओं और 64 कलाओं का ज्ञान अर्जित किया था। श्रीकृष्ण पाथेय योजना के तहत आश्रम का कायाकल्प होगा। इसमें भव्य प्रवेश द्वार, सुविधा केंद्र और श्रद्धालुओं के लिए अन्य सुविधाएं विकसित की जाएंगी।

श्रद्धालुओं को भगवान श्रीकृष्ण की गाथा से परिचित कराने के लिए यहां डिजिटल अनुभव मिलेगा। इसमें एआर/वीआर तकनीक, डिजिटल और ऑडियो-विजुअल प्रदर्शनी व बहुभाषी डिजिटल कंटेंट शामिल होंगे।

108 फीट ऊंची प्रतिमा बनेगी आकर्षण

सांदीपनि लोक में भगवान श्रीकृष्ण की 108 फीट ऊंची प्रतिमा स्थापित करने की योजना है। यह परिसर का प्रमुख आकर्षण होगी। प्रतिमा का डिजाइन आईआईटी/एनआईआईटी के तकनीकी परीक्षण और विंड टनल स्टडी के बाद तैयार होगा।

कालभैरव महालोक: 163 करोड़ रुपए से होगा विकास

सिंहस्थ-2028 में श्रद्धालुओं की भीड़ व्यवस्थित करने के लिए कालभैरव मंदिर परिसर को महाकाल महालोक की तर्ज पर विकसित करने की योजना है। इसके लिए 163 करोड़ रुपए की डीपीआर तैयार की गई है।

योजना में तीन बड़े पार्किंग स्थल, धर्मशाला, सुविधा केंद्र, नई अप्रोच रोड और ठहरने की व्यवस्था प्रस्तावित है। होल्डिंग एरिया, मल्टीलेवल पार्किंग, पार्क, मूर्तियां और फाउंटेन भी विकसित होंगे। दर्शन मार्ग, पेयजल और आवागमन की व्यवस्था सुधारने पर जोर रहेगा।

करीब 21,100 वर्गमीटर क्षेत्र में प्रस्तावित शनि लोक।

शनि लोक: 140 करोड़ रुपए से बनेगा मंदिर परिसर

इंदौर रोड स्थित त्रिवेणी शनि मंदिर परिसर के करीब 21,100 वर्गमीटर क्षेत्र में शनि लोक विकसित करने की योजना है। राज्य सरकार ने 7 जनवरी 2026 को परियोजना के लिए 140 करोड़ रुपए स्वीकृत किए थे।

परियोजना में भव्य मंदिर परिसर, घाटों का सौंदर्यीकरण, कतार प्रबंधन, स्मार्ट लाइटिंग, सीसीटीवी, लैंडस्केपिंग, पैदल पथ और सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) विकसित किए जाएंगे। मंदिर परिसर में बेसाल्ट और बंसी पहाड़पुर के पत्थरों से मोनोलिथिक मंदिर संरचना बनाने की योजना है।

इसमें नवग्रहों की महिमा दर्शाने वाली नक्काशीदार कलाकृतियां, थ्रीडी पत्थर की जालियां, भव्य प्रवेश द्वार, धार्मिक मूर्तियां और सांस्कृतिक प्रांगण विकसित किए जाएंगे। मान्यता है कि मंदिर की स्थापना सम्राट विक्रमादित्य ने की थी।

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