“मैं अकेला चोर नहीं, पूरा सिस्टम ही चोर है”—लाइसेंसी बंदूक मामले में सस्पेंड उपयंत्री का बड़ा दावा, सतना से भोपाल तक मचा हड़कंप

शासकीय कार्य के दौरान लाइसेंसी बंदूक लेकर चलने के मामले में सस्पेंड हुए उपयंत्री की तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है. उपयंत्री ने कहा कि जान को खतरा होने के कारण वे 20 सालों से बंदूक साथ लेकर चल रहे हैं पर कुछ लोगों ने जबरन उलझाने का प्रयास किया है.

इतना ही नहीं, उपयंत्री ने इसके साथ ही सरकारी सिस्टम की पोल खोलते हुए कई गंभीर आरोप लगाए हैं और कहा है कि कमीशन खोरी और भ्रष्टाचार करने वाले लोग खुद उनपर आरोप लगा रहे हैं.

ऊपर से लेकर नीचे तक पूरा सरकारी सिस्टम भ्रष्ट : उपयंत्री

सतना के मझगवां क्षेत्र में जनपद पंचायत उपयंत्री का बीते माह एक वीडियो सर्कुलेट हुआ था. इस वीडियो में वे अपनी लाइसेंसी बंदूक लेकर शासकीय कार्य का निरीक्षण करते पाए गए. जिसके बाद कलेक्टर ने इसे अनुशंहीनता माना और जांच के आदेश जिला पंचायत सीईओ को दिए. जांच के बादउपयंत्री को सस्पेंड कर दिया गया. वहीं, सस्पेंड होने के बाद उपयंत्री सतीश समेले की पूरे विभाग पर गंभीर आरोप लगाए हैं और कहा, ” जो खुद हर काम बिना कमीशन के नहीं करते हैं, वो मुझपर भ्रष्टाचार का आरोप लगाकर फंसाने का प्रयास कर रहे हैं.”

20 सालों से बंदूक साथ लेकर चलता हूं : उपयंत्री

सस्पेंड हुए जनपद पंचायत मझगवां के उपयंत्री सतीश समेले ने कहा,” इस मामले पर हमारे ऊपर जो भी चार्जेस जो लगाए हैं, उसमें सबसे पहले जो बंदूक वाला जो प्वाइंट है, उसका मैं जवाब देना चाहता हूं. मैं बंदूक लेकर फील्ड में साइट पर क्यों गया. वास्तव में बंदूक मैं सन 2005-6 से ले रखा हूं. 20 सालों से लगातार मैं बंदूक साथ लेकर चलता हूं. इसका मुख्य कारण है कि हमारे और हमारे परिवार के बहुत सारे दुश्मन हैं. उन दुश्मनों के कारण मुझे जान माल का खतरा रहता है. उस समय मैंने तत्कालीन कलेक्टर से शस्त्र लाइसेंस लिया और तब से मैं लगातार 24 घंटे शस्त्र लेकर चलता हूं. और जहां पर मेरा विडियो आया वहां पर एक सुनसान जगह थी, जो मझगवां के हिरौंदी के पास एक पुलिया के पास की थी.”

जिला पंचायत सीईओ पर कमीशनखोरी के आरोप

इसके पाद उपयंत्री ने जिला पंचायत सीईओ पर कमीशनखोरी के गंभीर आरोप लगाते हुए कहा, ” रही बात भ्रष्टाचार के आरोप की तो मेरे ऊपर लगाए गए सारे आरोप बेबुनियाद हैं. मुझ पर जिस जिला पंचायत सीईओ ने कमीशन का आरोप लगाया है. वह जिला पंचायत सीईओ खुद प्रतिदिन 10 से 20 हजार रुपए पंचायत से धमकी देकर के मंगाते हैं, और हमेशा सब इंजीनियर से चंदा वसूली करते हैं. हमारे विभाग में कोई माई का लाल ऐसा नहीं है जो कह दे कि पैसा नहीं लिया है.”

सबके कमीशन के रेट तय हैं

उपयंत्री यहां भी नहीं रुके उन्होंने विभाग की पोल खोलते हुए यह भी आरोप लगाए कि हर पद पर कमीशन का रेट तह है. उपयंत्री ने कहा, ” कमीशन की बात अगर करें तो 10% कमीशन सरपंच, 5% सचिव, 3% रोजगार सहायक तक जाता है. 5% उपन्यत्री, सब इंजीनियर, 2 से 3% असिस्टेंट इंजीनियर, 3% जनपद सीईओ इस तरह से पूरे सिस्टम में डिस्ट्रीब्यूशन होता है. कोई माई का लाल ग्राम पंचायत से वल्लभ भवन तक ये नहीं कह सकता कि उसने कमीशन नहीं लिया. यह सिस्टम कई वर्षों से चला आ रहा है. और इसके बाद जितनी टीम हैं, निरीक्षण के लिए जाती हैं चाहे वह जिले से हों या कमिश्नर ऑफिस से हों जितने भी निरीक्षण दल आते हैं आप तुरंत समझ जाइए कि अगले दिन सूटकेस की तैयारी होगी, और इस पूरी तैयारी का सीक्वेंस विभाग में बना हुआ है. रही जिला पंचायत सीईओ की बात जिन्होंने मुझे सस्पेंड किया है तो वह कौन सा दूध का धुला हुआ है? हर संविदा इंजीनियर की संविदा वृद्धि के लिए प्रतिवर्ष 40 हजार रुपए लिया जाता है. इसमें पूरा तंत्र ऊपर से लेकर नीचे तक मिला हुआ.”