भारत में वाहनों की संख्या 41.3 करोड़ के पार, बढ़ते शहरीकरण के बीच पुरानी परिवहन नीति पर सवाल; 2006 की नीति की समीक्षा शुरू, 2026 तक नई व्यापक शहरी परिवहन नीति की सिफारिश

देश में तेजी से बढ़ते शहरीकरण और वाहनों की संख्या में लगातार हो रही वृद्धि के बीच परिवहन विशेषज्ञों ने नई और व्यापक शहरी परिवहन नीति की आवश्यकता पर जोर दिया है।इंडियन स्कूल आफ पब्लिक पालिसी (आइएसपीपी) ने सोमवार को वर्ष 2006 में लागू राष्ट्रीय शहरी परिवहन नीति की समीक्षा प्रक्रिया शुरू करने की घोषणा की।

यह समीक्षा आइएसपीपी के सेंटर फार अर्बन ट्रांजिशन (आइसीयूटी) के माध्यम से की जा रही है। कार्यक्रम में परिवहन, शहरी विकास और सार्वजनिक नीति से जुड़े विशेषज्ञों ने भाग लिया। समीक्षा के प्रारंभिक निष्कर्षों में कहा गया है कि सार्वजनिक परिवहन और गैर-मोटर चालित साधनों को बढ़ावा देने का लक्ष्य अपेक्षित स्तर तक हासिल नहीं हो पाया।विशेषज्ञों ने बदलती जरूरतों को ध्यान में रखते हुए वर्ष 2026 में नई शहरी परिवहन नीति लागू करने की सिफारिश की है। रिपोर्ट में बताया गया कि मौजूदा नीति के तहत कई शहरों में मेट्रो रेल परियोजनाओं को प्राथमिकता दी गई, लेकिन उन्हें समग्र परिवहन नेटवर्क और भूमि उपयोग योजनाओं के साथ पर्याप्त रूप से नहीं जोड़ा गया।

इसके अलावा पार्किंग प्रबंधन, शहरी माल परिवहन, छोटे शहरों की आवाजाही संबंधी आवश्यकताएं, एप-आधारित परिवहन सेवाएं, ई-कामर्स लाजिस्टिक्स तथा जलवायु परिवर्तन से जुड़े मुद्दों पर भी पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया।आइएसपीपी के डीन और सह-संस्थापक डा. पार्थ शाह ने कहा कि भारत में अब तक कोई व्यापक शहरीकरण नीति नहीं रही है। उन्होंने कहा कि शहरों को लंबे समय तक विकास की प्राथमिकता में पीछे रखा गया, जिसके कारण 2006 की नीति जिन समस्याओं को हल करने के लिए बनाई गई थी, उनमें से कई आज और अधिक गंभीर हो गई हैं।

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