
क्या यह ट्रंप पर मोदी की दोस्ती का असर है…
डोनाल्ड ट्रंप ने वादा किया है कि अगर मिडटर्म इलेक्शन में रिपब्लिकन पार्टी का कांग्रेस पर नियंत्रण बरकरार रहता है, तो हर वयस्क अमेरिकी नागरिक को 5,000 डॉलर का “डिविडेंड” दिया जाएगा। ट्रंप की यह घोषणा भारत की चुनावी प्रक्रिया की याद दिला रही है। इस पूरे घटनाक्रम में यह साबित हो रहा है कि ट्रंप वास्तव में मोदी के सबसे अच्छे दोस्त हैं। और कहीं न कहीं यह मोदी की दोस्ती का ही असर है कि ट्रंप
ने अब मतदाताओं को सीधा-सीधा लालच देना शुरू कर दिया है। अमेरिका की राजनीति में यह भले ही पहली बार हो रहा हो, लेकिन ट्रंप हर मामले में अमेरिका में बदलाव लाने की मुहिम में लगे हैं। नई दिल्ली में अंग्रेजी अखबार द हिन्दू के स्थानीय संपादक वर्गीज के जॉर्ज ने ट्रंप की घोषणा पर लिखा है कि ट्रंप भारत में चुनाव जीतने के फॉर्मूले को कॉपी कर रहे हैं। और यह संयोग ही है कि इससे पहले ट्रंप ने भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की तारीफ की थी। भारत की चुनावी राजनीति में ऐसे लोकलुभावन वादे आम हैं लेकिन अमेरिका की राजनीति में यह नई बात है। ट्रंप लोकलुभावन आर्थिक नीतियों की बड़ी खुराक के साथ रिपब्लिकन पार्टी की चुनावी संभावनाओं को संभालने की कोशिश कर रहे हैं। ट्रंप ने 9 सितंबर 2026 को डलास में रिपब्लिकन पार्टी के पहले मिडटर्म कन्वेंशन की शुरुआत की रात यह घोषणा की।
अपनी गिरती अप्रूवल रेटिंग के बावजूद उन्होंने मतदाताओं को इमोशनली ब्लैकमेल करते हुए ट्रंप ने कहा कि वे “यह मानकर चलें कि मैं बस एक बार और बैलट पर हूँ।” राष्ट्रपति ने कहा कि अगर रिपब्लिकन पार्टी कांग्रेस के दोनों सदनों (सीनेट और कांग्रेस) पर अपना नियंत्रण बरकरार रखती है, तो वह मतदाताओं को 5,000 डॉलर का भुगतान देने का वादा कर सकते हैं। ट्रंप ने कहा, ”अर्थव्यवस्था के मामले में हमारी ताकत और कामयाबी बहुत बड़ी है। ठीक वैसे ही जैसे कोई सफल कंपनी अपने शेयरधारकों को नकद देती है।”
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि नवंबर के मिडटर्म चुनाव में अगर रिपब्लिकन पार्टी प्रतिनिधि सभा और सीनेट, दोनों में बहुमत बरकरार रखती है, तो हर बालिग अमेरिकी को 5000 डॉलर (करीब 4.76 लाख रुपए) दिए जाएंगे। ट्रम्प ने यह बयान डलास में रिपब्लिकन कन्वेंशन को संबोधित करते हुए दिया। उन्होंने इसे ‘ट्रम्प डिविडेंड’ नाम दिया और कहा कि यह अमेरिका की ‘आर्थिक ताकत और सफलता’ की वजह से दिया जाएगा।
ट्रम्प ने ये भी कहा कि डिविडेंड की रकम अमेरिका में ही खर्च करनी होगी। हालांकि, उन्होंने यह नहीं बताया कि इसके लिए पैसा कहां से आएगा, भुगतान का दायरा क्या होगा और रकम किस तरह बांटी जाएगी।
अमेरिका में करीब 26.98 करोड़ वयस्क हैं। अगर सभी को 5,000 डॉलर दिए जाएं तो कुल खर्च करीब 1.35 ट्रिलियन डॉलर यानी 128.25 लाख करोड़ रुपए होगा। यह रकम दुनिया के करीब 162 देशों की इकोनॉमी से ज्यादा है। विश्व बैंक के 2025 के आंकड़े के मुताबिक इससे ज्यादा सिर्फ 19 देशों की GDP है। यहां तक की यह पाकिस्तान की पूरी अर्थव्यवस्था से करीब 3.3 गुना ज्यादा है। पाकिस्तान की GDP करीब 407.3 अरब डॉलर यानी ₹38.69 लाख करोड़ है। 2025 में अमेरिका की अर्थव्यवस्था करीब 30.8 ट्रिलियन डॉलर की थी। हर बालिग अमेरिकी को 5,000 डॉलर देने की योजना पर करीब 1.3 ट्रिलियन डॉलर खर्च होगा। इसे लागू करने के लिए संसद की मंजूरी जरूरी होगी। यह रकम अमेरिका की 2025 की GDP के करीब 4.2% के बराबर है। वहीं, अमेरिका का सालाना बजट घाटा करीब 1.8 ट्रिलियन डॉलर है। यानी इस योजना से सरकारी खर्च और घाटे पर और दबाव बढ़ सकता है।
अमेरिका का राष्ट्रीय कर्ज भी पहले ही 40 ट्रिलियन डॉलर के पार पहुंच चुका है। ऐसे में इतनी बड़ी रकम बांटने से सरकारी कर्ज और महंगाई को लेकर चिंता बढ़ सकती है। ट्रम्प के ऐलान के करीब एक घंटे बाद उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा कि डिविडेंड का लाभ अमीर लोगों को नहीं मिलेगा।
ट्रम्प अक्सर कहते रहे हैं कि आधुनिक दौर में राष्ट्रपति की पार्टी आमतौर पर मिडटर्म चुनाव में कांग्रेस की सीटें गंवाती है। डलास में उन्होंने कहा कि वह इस परंपरा को बदलना चाहते हैं। उन्होंने कहा, “हम इसे बदलने जा रहे हैं। ऐसा होने की कोई वजह नहीं है।”
ट्रम्प इससे पहले भी अमेरिकी नागरिकों को सीधे पैसा देने की बात कर चुके हैं। इस साल की शुरुआत में उन्होंने 2,000 डॉलर के डिविडेंड का प्रस्ताव रखा था। उस समय उन्होंने कहा था कि इसके लिए कांग्रेस की मंजूरी जरूरी नहीं होगी। पिछले साल ट्रम्प ने अमेरिकी सैनिकों को 1776 डॉलर का भुगतान किया था, जिसे उन्होंने ‘वॉरियर डिविडेंड’ कहा था।
अमेरिका में मिडटर्म चुनाव राष्ट्रपति चुनाव के दो साल बाद होते हैं। इसमें प्रतिनिधि सभा की सभी सीटों और सीनेट की करीब एक-तिहाई सीटों के लिए चुनाव होता है। रिपब्लिकन इस बार प्रतिनिधि सभा में अपने बेहद मामूली बहुमत को बचाने की कोशिश कर रहे हैं। सीनेट में भी पार्टी को चुनौती मिल रही है।
वैसे, यह आसान नहीं है कि अमेरिका में मतदाताओं को खरीदने की ट्रंप की कोशिश सफल हो सकेगी। पर यह बात सही है कि चुनाव जीतने की यह प्रैक्टिस डोनाल्ड ट्रंप पर कहीं न कहीं मोदी की दोस्ती के असर के रूप में भी देखी जाएगी…।

कौशल किशोर चतुर्वेदी
कौशल किशोर चतुर्वेदी मध्यप्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार हैं। प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में पिछले ढ़ाई दशक से सक्रिय हैं। पांच पुस्तकों व्यंग्य संग्रह “मोटे पतरे सबई तो बिकाऊ हैं”, पुस्तक “द बिगेस्ट अचीवर शिवराज”, ” सबका कमल” और काव्य संग्रह “जीवन राग” के लेखक हैं। वहीं काव्य संग्रह “अष्टछाप के अर्वाचीन कवि” में एक कवि के रूप में शामिल हैं। इन्होंने स्तंभकार के बतौर अपनी विशेष पहचान बनाई है।वर्तमान में भोपाल और इंदौर से प्रकाशित दैनिक समाचार पत्र “एलएन स्टार” में कार्यकारी संपादक हैं। इससे पहले इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में एसीएन भारत न्यूज चैनल में स्टेट हेड, स्वराज एक्सप्रेस नेशनल न्यूज चैनल में मध्यप्रदेश संवाददाता, ईटीवी मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ में संवाददाता रह चुके हैं। प्रिंट मीडिया में दैनिक समाचार पत्र राजस्थान पत्रिका में राजनैतिक एवं प्रशासनिक संवाददाता, भास्कर में प्रशासनिक संवाददाता, दैनिक जागरण में संवाददाता, लोकमत समाचार में इंदौर ब्यूरो चीफ दायित्वों का निर्वहन कर चुके हैं। नई दुनिया, नवभारत, चौथा संसार सहित अन्य अखबारों के लिए स्वतंत्र पत्रकार के तौर पर कार्य कर चुके हैं।