Tata Consultancy Services का बड़ा एक्शन: नासिक यौन उत्पीड़न केस में सस्पेंड निदा खान, अग्रिम जमानत पर आज अहम सुनवाई

नासिक के चर्चित यौन उत्पीड़न और धर्मांतरण मामले में निदा खान को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है. एक तरफ जहां टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज़ (TCS) ने उसे सस्पेंड कर दिया है, वहीं दूसरी तरफ आज उसकी अग्रिम जमानत याचिका पर कोर्ट में सुनवाई होनी है. इस केस को लेकर कानूनी और सामाजिक दोनों स्तर पर हलचल तेज है. महिला आयोग की जांच भी जारी है और आज इस जांच का तीसरा दिन है. ऐसे में पूरे मामले पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं.

निदा को अब कंपनी से पूरी तरह दूर रहने के लिए कहा गया है

निदा खान को TCS ने 9 अप्रैल 2026 को जारी एक आधिकारिक पत्र के जरिए सस्पेंड कर दिया. कंपनी के मुताबिक, उनके खिलाफ एक गंभीर मामला सामने आया है, जिसके चलते वे फिलहाल न्यायिक या पुलिस हिरासत में हैं. कंपनी ने यह भी साफ किया कि ऐसी स्थिति में वह अपने काम की जिम्मेदारियां निभाने में सक्षम नहीं हैं. इसी आधार पर उन्हें तत्काल प्रभाव से सस्पेंड किया गया है.

सस्पेंशन ऑर्डर में साफ लिखा गया है कि निदा खान 27 दिसंबर 2021 से कंपनी के साथ जुड़ी थीं और प्रोसेस एसोसिएट के पद पर कार्यरत थीं. कंपनी ने उनके नेटवर्क एक्सेस को भी तुरंत प्रभाव से बंद कर दिया है. साथ ही निर्देश दिया गया है कि उनके पास मौजूद कंपनी की सभी संपत्तियां वापस जमा कराई जाएं. उन्हें किसी भी ऑफिस में रिपोर्ट करने या घर से काम करने से भी मना किया गया है.

कंपनी ने अपने आदेश में यह भी कहा है कि निदा खान इस मामले को लेकर किसी भी कर्मचारी से बातचीत नहीं करेंगी और पूरी गोपनीयता बनाए रखेंगी. अगर वे इन निर्देशों का पालन नहीं करती हैं, तो उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है. यह आदेश कंपनी के HR हेड शेखर कांबले द्वारा जारी किया गया है, जो पुणे,और गोवा क्षेत्र के प्रभारी हैं.

इस बीच, आज कोर्ट में निदा खान की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई होनी है. पूरे मामले को लेकर अटकलें तेज हैं कि कोर्ट उन्हें राहत देगा या उनकी जमानत अर्जी खारिज कर दी जाएगी. कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए फैसला अहम हो सकता है और आगे की जांच पर भी इसका असर पड़ेगा.

महिला आयोग की ओर से गठित सत्यशोधन समिति भी इस मामले की जांच कर रही है. आज इस जांच का तीसरा दिन है और टीम लगातार तथ्यों को जुटाने में लगी हुई है. आयोग यह जानने की कोशिश कर रहा है कि आरोपों में कितनी सच्चाई है और क्या इसमें किसी तरह की लापरवाही या अन्य पहलू जुड़े हुए हैं.

पूरे मामले ने कॉर्पोरेट और सामाजिक दोनों ही स्तर पर सवाल खड़े कर दिए हैं. एक तरफ कंपनी ने अपनी नीति के तहत सख्त कदम उठाया है, तो दूसरी तरफ कानूनी प्रक्रिया भी तेजी से आगे बढ़ रही है. आने वाले दिनों में कोर्ट के फैसले और जांच रिपोर्ट के आधार पर इस केस की दिशा साफ होगी.

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