अपना नाम खुद बनाओ’ कहकर मनोज तिवारी ने बेटी रीति से बनाई दूरी? बोलीं- ‘पापा से साल में सिर्फ एक बार मिलती थी’, 20-25 हजार में गुजारा और 10 रुपये का वड़ा पाव खाया

बिग बॉस’ के घर में इस वक्त रिश्तों, विवादों और खुलासों का दौर जारी है. शो में मनोज तिवारी की बेटी रीति तिवारी ने अपनी जिंदगी से जुड़े ऐसे किस्से शेयर किए, जिन्हें सुनकर हर कोई हैरान रह गया. पर्दे पर एक मशहूर और बड़े नाम की बेटी होने के बावजूद रीति ने बताया कि उनकी जिंदगी हमेशा किसी ‘सिल्वर स्पून’ वाली कहानी जैसी नहीं रही.

पिता मनोज तिवारी के प्यार को तरसीं रीति तिवारी

रीति ने अपने माता-पिता के रिश्ते और बचपन के दिनों को याद करते हुए बताया कि तलाक के बाद उनके पिता उनसे काफी दूर हो गए थे. उन्होंने कहा- जब मेरी मम्मी का तलाक हुआ तो मेरे पापा चले गए. वो फोन भी करते थे तो मेरी बात नहीं हो पाती थी, क्योंकि मेरे मम्मी-पापा का उस वक्त बहुत झगड़ा चलता था. मैं उनसे एक साल में एक ही बार मिल पाती थी.

18 की उम्र में लिया पापा के साथ रहने का फैसला

रीति ने बताया कि जैसे-जैसे वह बड़ी हुईं, उनके मन में अपने पिता को करीब से जानने की इच्छा बढ़ती गई. आखिरकार 18 साल की उम्र में उन्होंने फैसला किया कि अब वह अपने पिता के साथ रहना चाहती हैं. रीति ने कहा- जब मैं 18 साल की हुई, तब मैंने फैसला लिया कि मुझे मेरे पापा के साथ रहना है. मुझे जानना है कि वो कैसे इंसान हैं. पर तब तक ना देर हो गई थी.

रीति ने आगे अपने पिता की शोहरत और दौलत को लेकर भी खुलकर बात की. उन्होंने बताया कि उन्हें उनके पिता की कमाई या संपत्ति नहीं मिली, लेकिन उनका नाम जरूर उनके साथ आया. वो बोलीं- उनकी जो कमाई की चीजें हैं- धन-दौलत, नाम-शोहरत, वो सब मुझे नहीं मिला. लेकिन मेरे तक आया उनका नाम- मैं की बेटी हूं. उससे मुझे रिस्पेक्ट मिला. मैं जहां भी जाती हूं लोग मुझे बहुत रिस्पेक्ट देते हैं.

‘करियर में पापा मेरी कोई हेल्प नहीं करने वाले थे’

रीति ने बताया कि उनके पिता ने करियर को लेकर भी उनके सामने अपनी बात बिल्कुल साफ रखी थी. मनोज तिवारी ने उन्हें यह भरोसा दिया कि वह खुद अपने दम पर आगे बढ़ सकती हैं, लेकिन उनके करियर को अपने नाम या प्रभाव के सहारे आगे नहीं बढ़ाएंगे.

रीति के मुताबिक- उन्होंने मुझे एक और चीज बहुत क्लियर बोल दी थी कि वो मेरे करियर में मेरी कोई हेल्प नहीं करने वाले. गंदी तरह से नहीं बोला था, पर साफ कर दिया था कि मुझे अपना नाम खुद ही बनाना होगा. वो कहते हैं कि तुम खुद से कर लोगी, मैं करके नहीं दूंगा.

रीति ने यह भी साफ किया कि ऐसा नहीं है कि उनके पिता उन्हें बिल्कुल आर्थिक मदद नहीं करते. उन्होंने बताया कि उन्हें महीने के खर्च के लिए सीमित रकम मिलती है और उसी में उन्हें अपनी जरूरतें संभालनी पड़ती हैं. उन्होंने कहा- पापा कुछ भी नहीं दे देते हैं. ऐसा नहीं कि जो मांगू मिल जाएगा. महीने के खर्च जितना, जैसे 20-25 हजार. और इतने में किसी का खर्च नहीं निकल सकता.

दो बार 10 रुपये का वड़ा पाव खा लेती हूं’

रीति का सबसे भावुक कर देने वाला खुलासा उनकी रोजमर्रा की जिंदगी को लेकर था. उन्होंने बताया कि खर्च चलाने के लिए कई बार उन्हें खाने तक में कटौती करनी पड़ती है. रीति ने कहा- मैं गुजारा करने के लिए कभी-कभी दिन में दो बार 10 रुपये का वड़ा पाव खा लेती हूं, ताकि पेट भर जाए. 500 रुपये का डीजल भरवाती हूं, जरूरत के हिसाब से.

रीति ने आखिर में उस धारणा पर भी बात की, जो अक्सर किसी बड़े स्टार या सेलिब्रिटी की बेटी को लेकर बनाई जाती है. उन्होंने कहा कि लोग सिर्फ उनके पिता का नाम देखकर मान लेते हैं कि उनकी जिंदगी में किसी चीज की कमी नहीं होगी. लेकिन रीति के मुताबिक उनकी असल जिंदगी इससे काफी अलग है. उन्होंने कहा- सबको लगता है कि सिल्वर स्पून के साथ आई हूं. नहीं यार, मैं भी आम इंसान हूं. और ये बहुत मुश्किल है.

रीति की ये बातें  में उनकी जिंदगी का एक ऐसा पहलू सामने लाती हैं, जो शायद उनके पिता के बड़े नाम और शोहरत के पीछे छिपा रहा. एक तरफ उन्हें पिता के नाम से पहचान और सम्मान मिला, तो दूसरी तरफ उन्होंने अपने पैरों पर खड़े होने और अपनी अलग पहचान बनाने की चुनौती का भी सामना किया.

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