
मोहन के मन में यही है कि 2047 तक रहे सनातनी सरकार…
नागपुर में विजयादशमी के वार्षिक संबोधन में संघ प्रमुख डॉ. मोहन भागवत ने अपने मन की बात सबके सामने जाहिर कर दी। डॉ. भागवत ने खुले मन से यही स्वीकार किया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सनातनी सरकार बेहतर काम कर रही है। इस सरकार ने जिस तरह से भारत की संस्कृति के अनुरूप स्थायी बदलाव किए हैं, वह इससे पहले कभी नहीं हो सके थे। और इन बदलावों से ही पश्चिमी देशों की नींद उड़ गई है। और परोक्ष रूप से, भागवत ने जेन-ज़ी के जरिए
देश में अस्थिरता लाने की कोशिश को एक तरह से पश्चिमी देशों की साजिश करार दिया है।
भागवत ने कहा, “भारत उनका मुख्य निशाना है, क्योंकि भारत प्रगति कर रहा है। इन ताक़तों को पता है कि पिछले कुछ दशकों में निर्णायक नीतियों के साथ भारत जिस तरह आगे बढ़ा है, उसे वे बाधित नहीं कर सकते। इसलिए वे भारत और संघ को तोड़ने की कोशिश कर रहे हैं।” भागवत ने यह भी आगाह किया कि जब विरोध प्रदर्शन राजनीतिक होते हैं या उन्हें उकसाया जाता है, तो उनका इस्तेमाल तनाव, अराजकता और सार्वजनिक व्यवस्था को बिगाड़ने के लिए किया जाता है।आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि भारत को ‘तोड़ने’ की कोशिशें सफल नहीं होंगी। और यह तर्क भी दिया कि यह सोचना ग़लत है कि सत्ता बदलने से परिस्थितियां बदल जाएंगी। उन्होंने कहा कि ऐसा पहले कभी नहीं हुआ है और आगे भी ऐसा नहीं होगा।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ एसआईआर में कथित अपारदर्शिता को लेकर जारी विरोध प्रदर्शनों के बीच भागवत ने यह भी कहा कि आंदोलनों से बदलाव नहीं आता और समस्याओं का समाधान समाज के भीतर से ही निकलता है।
गौरतलब है कि आरएसएस की स्थापना 27 सितंबर, 1925 को विजयादशमी के दिन डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने नागपुर में की थी। इसलिए आरएसएस हर साल दशहरे में स्थापना दिवस मनाता है और इस दिन सरसंघचालक स्वसंसेवकों को संबोधित करते हैं। आरएसएस प्रमुख ने कहा कि भारतीयों को सतर्क रहने की ज़रूरत है, क्योंकि कुछ ताक़तें देश को विकसित राष्ट्र बनने के रास्ते से भटकाना चाहती हैं। उन्होंने कहा कि यह स्पष्ट है… दुनिया में कई ऐसी ताकतें हैं जो चाहती हैं कि भारत हार जाए। पश्चिम से एक तूफ़ान आ रहा है, जो संस्कृति, व्यवस्था और सुरक्षा से नफरत करता है। यह सब कुछ नष्ट करना चाहता है। भागवत ने फ्रांस, बांग्लादेश और नेपाल में हाल के वर्षों में सरकारों के खिलाफ आंदोलन को एक तरह की साजिश करार दिया है। भागवत ने कहा कि भारत में भी कुछ लोग ऐसी ताकतों के विचारों को दोहराते दिखाई देते हैं।उन्होंने विरोधी राजनैतिक मंसूबों पर परोक्ष रूप से टिप्पणी करते हुए कहा, “भारत में भी कुछ लोग उनके विचारों से सहमत हैं…जिनकी बुद्धि कम है और जिन्हें सत्ता की लालसा है।” समाज को सतर्क रहने की अपील करते हुए उन्होंने कहा कि लोगों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि समस्याओं का समाधान विरोध प्रदर्शनों के बजाय समाज के भीतर से निकले। उन्होंने कहा कि तुष्टीकरण की मानसिकता ने विभाजनकारी सोच को लगातार बढ़ावा दिया और आखिरकार, देश का विभाजन हो गया।
मोहन भागवत के यह सभी विचार साफ तौर पर जाहिर करते हैं कि जिस तरह मोदी के नेतृत्व में केंद्रीय सरकार ने 2047 तक विकसित भारत की कल्पना की है, भागवत उस कल्पना को सनातनी सरकार के सत्ता में रहते ही पूरा होता देखना चाहते हैं। हालांकि यह जरूरी नहीं है कि भागवत की इच्छा पूरी हो लेकिन यह जरूरी है कि भारत 2047 तक विकसित होकर पूरी दुनिया में श्रेष्ठतम स्थान हासिल कर सके…।

कौशल किशोर चतुर्वेदी
कौशल किशोर चतुर्वेदी मध्यप्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार हैं। प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में पिछले ढ़ाई दशक से सक्रिय हैं। पांच पुस्तकों व्यंग्य संग्रह “मोटे पतरे सबई तो बिकाऊ हैं”, पुस्तक “द बिगेस्ट अचीवर शिवराज”, ” सबका कमल” और काव्य संग्रह “जीवन राग” के लेखक हैं। वहीं काव्य संग्रह “अष्टछाप के अर्वाचीन कवि” में एक कवि के रूप में शामिल हैं। इन्होंने स्तंभकार के बतौर अपनी विशेष पहचान बनाई है।वर्तमान में भोपाल और इंदौर से प्रकाशित दैनिक समाचार पत्र “एलएन स्टार” में कार्यकारी संपादक हैं। इससे पहले इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में एसीएन भारत न्यूज चैनल में स्टेट हेड, स्वराज एक्सप्रेस नेशनल न्यूज चैनल में मध्यप्रदेश संवाददाता, ईटीवी मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ में संवाददाता रह चुके हैं। प्रिंट मीडिया में दैनिक समाचार पत्र राजस्थान पत्रिका में राजनैतिक एवं प्रशासनिक संवाददाता, भास्कर में प्रशासनिक संवाददाता, दैनिक जागरण में संवाददाता, लोकमत समाचार में इंदौर ब्यूरो चीफ दायित्वों का निर्वहन कर चुके हैं। नई दुनिया, नवभारत, चौथा संसार सहित अन्य अखबारों के लिए स्वतंत्र पत्रकार के तौर पर कार्य कर चुके हैं।