
‘मोहन’ की शहर-गांववासियों से डायरेक्ट कनेक्ट होने की बड़ी कोशिश…
प्रदेश में 25 सितंबर 2026 से सुगम यात्री परिवहन की दिशा में नया अध्याय लिखा जा रहा है। लंबे अरसे यानि 21 साल बाद प्रदेश में 25 सितम्बर को पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती के अवसर पर सरकारी नियंत्रण में परिवहन सेवा की शुरुआत की जा रही है। 21 साल पहले, तत्कालीन मुख्यमंत्री और यदुवंशी बाबूलाल गौर के समय में घाटे में चल रही सरकारी बस सेवा को बंद किया गया था
और अब प्रदेश के दूसरे यदुवंशी, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के समय में फिर सुगम परिवहन सेवा की शुरुआत हो रही है। एक बार फिर प्रदेशवासियों को सुगम, सुरक्षित, आधुनिक और पर्यावरण-अनुकूल परिवहन सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से परिवहन विभाग द्वारा मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा शुरू की जा रही है। इस सेवा से शहरी-ग्रामीण क्षेत्रों में बस कनेक्टिविटी को मजबूत किया जाएगा। प्रदेश की 75 प्रतिशत ग्राम पंचायतों तक परिवहन सेवा का विस्तार किया जाएगा।
फिलहाल 25 सितंबर को प्रदेश के 7 शहरों की 351 इंटरसिटी और इंट्रासिटी बसों को एक साथ हरी झंडी दिखाकर रवाना किया जाएगा। इसमें इंदौर, भोपाल, जबलपुर, रीवा, देवास, कटनी और भिंड शामिल हैं। शुरुआती चरण में इंदौर में 145 बसें जिसमें 50 इंटरसिटी और 95 इंट्रासिटी, भोपाल में 106 बसें जिसमें 23 इंटरसिटी और 83 इंट्रासिटी, जबलपुर के लिए 67 बसें जिसमें 14 इंटरसिटी और 53 इंट्रासिटी, रीवा में 18 इंटरसिटी बसें, देवास में 10 इंटरसिटी बसें, कटनी में 3 और भिंड में 2 इंटरसिटी बसों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया जाएगा।मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा अंतर्गत वर्ष 2031 तक प्रदेश में 15 हजार बसें संचालित करने का लक्ष्य रखा गया है, जबकि पहले वर्ष यह लक्ष्य 1,500 बसों के संचालन का होगा। इसके बाद प्रतिवर्ष लगभग 2,500 से 3,000 बसें बढ़ाई जाएंगी।
हालांकि, 21 साल पहले बंद हुई, परिवहन सेवा पूरी तरह से सरकारी थी। और इसी वजह से इसके घाटे में जाने और बसों के सरकार पर बोझ बन जाने
के चलते मजबूरी में इसे बंद किया गया था। लेकिन अब नए रूप में, यह सेवा पीपीपी मॉडल के तहत सरकारी उद्देश्य को पूरा करेगी। बात फिर वहीं आएगी कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय की मंशा के अनुरूप समाज के अंतिम व्यक्ति
के हिसाब से बसों का किराया निर्धारित करने और व्यावहारिक क्रियान्वयन में सरकार कितनी सफल हो पाएगी। क्योंकि इससे पहले भी शिवराज सरकार के समय परिवहन को सुगम बनाने की ऐसी कोशिश होती रही है। मोहन सरकार ने तय किया है कि मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा अंतर्गत पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल को बढ़ावा दिया जाएगा। ये बसें आधुनिक सुविधाओं से युक्त होंगी और सुरक्षा की दृष्टि से अनुकूल रहेंगी। जन-निजी भागीदारी को गति देने के लिए पारदर्शी अनुबंध प्रणाली और प्रोत्साहन योजनाएं लागू की जाएंगी। इस मॉडल अंतर्गत निजी बस ऑपरेटरों को विज्ञापन एवं कार्गो सेवाओं जैसे नॉन-फेयर रेवेन्यू से आय बढ़ाने के साथ ही आधुनिक डिपो और टर्मिनल सुविधाओं का उपयोग करने के अवसर मिलेंगे। बस संचालन को प्रभावी और सुचारु बनाने के लिए निजी ऑपरेटरों को प्रशासन का पूर्ण सहयोग भी उपलब्ध कराया जाएगा।
सरकार ने बसों की मॉनिटरिंग और यात्रियों की सुरक्षा को लेकर भी
पूरी तैयारी की है। इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्ट मैनेजमेंट सिस्टम के माध्यम से बसों के संचालन, लोकेशन और समयबद्धता की रियल-टाइम मॉनिटरिंग की जाएगी। मध्यप्रदेश यात्री परिवहन इन्फ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड एवं उसकी 7 सहायक कंपनियों में कमांड-कंट्रोल सेंटर स्थापित किए गए हैं, जहां से बसों की निगरानी की जाएगी।यात्रियों, विशेषकर महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए सर्विलांस के लिए हर बस में सीसीटीवी कैमरा इंस्टॉल रहेगा। आपात स्थिति में यात्रियों को तत्काल सहायता उपलब्ध कराने के लिए बसों में पैनिक बटन की सुविधा होगी।व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस के माध्यम से प्रत्येक बस की लाइव लोकेशन की जानकारी उपलब्ध होगी।यात्रियों को बस के संचालन एवं यात्रा से संबंधित आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराने के लिए पैसेंजर इनफॉरमेशन सिस्टम की सुविधा दी गई है।आधुनिक तकनीक और सुरक्षित यातायात व्यवस्था के अनुरूप बस चालकों को तकनीकी रूप से प्रशिक्षण दिया जाएगा। यात्रियों की शिकायतों के त्वरित समाधान के लिए प्रभावी शिकायत निवारण तंत्र विकसित किया जाएगा।पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल के माध्यम से निजी बस ऑपरेटरों की भागीदारी को बढ़ावा दिया जा रहा है। आधुनिक तकनीक, निगरानी प्रणाली और सुरक्षा सुविधाओं के माध्यम से यात्रियों को अधिक सुरक्षित, सुगम, पारदर्शी एवं समयबद्ध परिवहन सेवा उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा। फिलहाल इसे सरकारी दावा माना जा सकता है, लेकिन आगामी एक साल में इसकी सच्चाई भी सामने आ जाएगी और उम्मीद है कि सरकार अपने दावों पर खरी उतरेगी।
तो मध्यप्रदेश के लिए 25 सितंबर का दिन ऐतिहासिक रहने वाला है। सिटी बसों से लेकर राज्य के भीतर और दूसरे राज्यों के लिए लग्जरी बस सेवाएं शुरू होंगी। इससे प्रदेश के प्रमुख शहरों के साथ देश के प्रमुख तीर्थस्थलों और महानगरों तक आवागमन सुगम होगा। मध्यप्रदेश में मेट्रो सेवा की शुरुआत के बाद सड़क परिवहन के क्षेत्र में लोक परिवहन बस सेवा का पुनः शुभारंभ एक महत्वपूर्ण कदम है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मुताबिक यह निर्णय प्रदेश की जनता के लिए सुविधा, कनेक्टिविटी और बेहतर आवागमन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। तो एक सच्चाई यह भी है कि मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के जरिये डॉ. मोहन यादव हर शहर और हर गांववासी से डायरेक्ट कनेक्ट होने का सफल प्रयास करते नजर आ रहे हैं… बात फिर वही है कि समय के साथ परिवहन की सुगमता, सुरक्षा, मॉनिटरिंग ऑर सरकारी नियंत्रण की सफलता ही मोहन की शहर-गांववासियों से डायरेक्ट कनेक्टिविटी पर पक्की मुहर लगा पाएगी…।

कौशल किशोर चतुर्वेदी
कौशल किशोर चतुर्वेदी मध्यप्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार हैं। प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में पिछले ढ़ाई दशक से सक्रिय हैं। पांच पुस्तकों व्यंग्य संग्रह “मोटे पतरे सबई तो बिकाऊ हैं”, पुस्तक “द बिगेस्ट अचीवर शिवराज”, ” सबका कमल” और काव्य संग्रह “जीवन राग” के लेखक हैं। वहीं काव्य संग्रह “अष्टछाप के अर्वाचीन कवि” में एक कवि के रूप में शामिल हैं। इन्होंने स्तंभकार के बतौर अपनी विशेष पहचान बनाई है।वर्तमान में भोपाल और इंदौर से प्रकाशित दैनिक समाचार पत्र “एलएन स्टार” में कार्यकारी संपादक हैं। इससे पहले इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में एसीएन भारत न्यूज चैनल में स्टेट हेड, स्वराज एक्सप्रेस नेशनल न्यूज चैनल में मध्यप्रदेश संवाददाता, ईटीवी मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ में संवाददाता रह चुके हैं। प्रिंट मीडिया में दैनिक समाचार पत्र राजस्थान पत्रिका में राजनैतिक एवं प्रशासनिक संवाददाता, भास्कर में प्रशासनिक संवाददाता, दैनिक जागरण में संवाददाता, लोकमत समाचार में इंदौर ब्यूरो चीफ दायित्वों का निर्वहन कर चुके हैं। नई दुनिया, नवभारत, चौथा संसार सहित अन्य अखबारों के लिए स्वतंत्र पत्रकार के तौर पर कार्य कर चुके हैं।