मोहन का जेन ज़ी प्रेम… और अभिजीत के बढ़ते कदम… कौशल किशोर चतुर्वेदी

मोहन का जेन ज़ी प्रेम… और अभिजीत के बढ़ते कदम…
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख डॉ. मोहन भागवत का जेन ज़ी प्रेम खुलकर सामने आ गया है। जेन ज़ी के शब्दों में निश्चित तौर से मोहन के इस प्रेम को ‘भय के बाद उत्पन्न प्रेम’ की संज्ञा दी जा सकती है। और अभिजीत दीपके तो साफ कह चुका है कि 70 साल के लोगों से बात करने से जेन-ज़ी जी को कुछ नहीं मिलेगा। जेन-ज़ी को यंग इंटरैक्टर्स की जरूरत है। जो उन्हें समझ सके और जिसे वह समझा सके। लेकिन मोहन भागवत ने भी जेन-ज़ी को उन्हीं के भावों में समझाने और अपना बनाने की भरपूर कोशिश की है। हालांकि कॉकरोच जनता पार्टी संस्थापक अभिजीत दीपके ने एक कदम आगे बढ़ाते हुए यह साफ़ कर दिया गया है कि उनका अगला कदम पब्लिक से सीधा संवाद होगा। सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने 6 अगस्त को अपने गृह नगर छत्रपति संभाजी नगर में ‘क्या बोलती पब्लिक’ नाम के अभियान की घोषणा की। इस अभियान का मकसद ‘लोगों के मुद्दों’ को समझना है। तो दीपके ने यह भी घोषणा की है कि उनकी विचारधारा के केंद्र में अंबेडकर, गांधी और जवाहर रहेंगे। संकेत साफ है कि अब सीजेपी को लुभाना भाजपा-आरएसएस के लिए एक बड़ी चुनौती है। धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे ने कॉकरोच जनता पार्टी को उनकी ताकत का अहसास करा दिया है। तो कहीं न कहीं केंद्र की मोदी-शाह सरकार बैकफुट पर जाती नजर आई है। अब कॉकरोच जनता पार्टी को काबू करना असंभव प्रतीत हो रहा है। मोदी की माफी भी इसमें महज सीजेपी की मांगों की पूर्ति से ज्यादा कुछ नजर नहीं आ रही है। खैर, फिलहाल, हम यह देखते हैं कि मोहन भागवत ने क्या कहा और दीपके की क्या सोच है।
जेन-ज़ी से संवाद कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख डॉ. मोहन भागवत ने कहा कि आवाज नहीं सुनी गई तो प्रदर्शन कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि आंदोलन भी डायलॉग का ही एक तरीका है। उन्होंने कहा, ‘लोकतंत्र में विरोध भी आम सहमति बनाने का एक तरीका है। कई तरह के विचार सामने आते हैं और बातचीत के बाद आम सहमति बनती है। यह बातचीत संवाद के जरिए हो सकती है। अगर अलग-अलग वजहों से बात नहीं सुनी जाती तो आंदोलन किया जा सकता है। लेकिन ऐसा आम सहमति बनाने के लिए किया जाना चाहिए, न कि बंटवारा करने के लिए।’  आरएसएस चीफ ने कहा, ‘हम सभी पहलुओं को देखते हैं और हर किसी का अपना नजरिया होता है। हमें बहुत सारे विचार और विरोधी विचार मिलते हैं, जो मिलकर सच्चाई की पूरी तस्वीर बनाते हैं। ऐसा जरूर होना चाहिए। मैं यह नहीं कहूंगा कि जेन-ज़ी को विरोध नहीं करना चाहिए, लेकिन लोकतंत्र में विरोध करने और काम करने के कुछ तरीके होते हैं। संविधान बनाने वालों ने, डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर के भाषणों में, इस बारे में संकेत दिए हैं। इस पर ध्यान दिया जाना चाहिए।’ उन्होंने कहा, ‘ जेन-ज़ी विरोध करने के लिए आवाज नहीं उठा रही है, वे ऐसा इसलिए कर रहे हैं क्योंकि उन्हें कुछ दिक्कतें हैं, जिसे ठीक किया जाना चाहिए। आंदोलन मेरे या आपके खिलाफ नहीं, बल्कि सिस्टम को ठीक करने के लिए होना चाहिए।’ छात्रों के विरोध-प्रदर्शन और प्रदर्शनकारियों को ‘देश-विरोधी’ कहे जाने पर भागवत ने कहा, ‘अगर जेन-ज़ी विरोध कर रहा है तो वे देश-विरोधी नहीं हैं। वे हमारे ही लोग हैं, हमारी अगली पीढ़ी हैं। मुझे लगता है कि नई पीढ़ी जेन-ज़ी और जेन अल्फा हमारी मौजूदा पीढ़ी से ज्यादा ईमानदार है। देशभक्ति और सेवा की सच्ची अपील उन पर असर करती है।

अभिजीत ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि अब लोग तानाशाही से डरते नहीं हैं और पार्टी संविधान के मूल्यों पर आधारित है।कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने दो दिनों की गहन चर्चा के बाद घोषणा की है कि उनकी पार्टी इस साल सितंबर में ‘क्या बोलती पब्लिक’ नाम से एक राष्ट्रव्यापी कैंपेन शुरू करेगी। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य देशभर के लोगों की आकांक्षाओं, अपेक्षाओं और चिंताओं को करीब से समझना और संवाद स्थापित करना है। अभिजीत दिपके ने केंद्र की एनडीए सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि छात्रों ने ही इस सरकार को इस्तीफा देने पर मजबूर किया है। उन्होंने दावा किया कि पिछले 14 सालों में देश के दमन और तानाशाही देखी है, लेकिन अब लोगों के मन का डर खत्म हो गया है और सबसे अहम बात ये है कि लोग अब इनसे नहीं डरते। अभिजीत दिपके ने स्पष्ट किया कि काकरोच जनता पार्टी डॉ. बीआर आंबेडकर, महात्मा गांधी और भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के आदर्शों से मार्गदर्शन लेगी। पार्टी की विचारधारा पूरी तरह से भारत के संविधान में निहित मूल्यों पर आधारित होगी।
कुल मिलाकर भागवत ने जेन-ज़ी को लोकतांत्रिक भाषा में और अपना बनाने की मंशा से प्रेम से जो नसीहत दी है, शायद कॉकरोच जनता पार्टी के लिए उसका मूल्य बहुत ज्यादा नहीं है। मोदी सरकार के लिए यह संक्रमणकालीन दौर है, जिसमें खुद को माफी मांगते हुए वीडियो पोस्ट डाल कर वह अपनी मूल छवि से समझौता कर चुके हैं। लोकतंत्र की यही तस्वीर शायद अभिजीत को हर तरफ अपनी सोच के मुताबिक फतह करने का हौसला दे रही है तो लोकतंत्र की यह भी तस्वीर है जिसमें आरएसएस प्रमुख भागवत, युवाओं की प्रतीक बन गई कॉकरोच जनता पार्टी कि कर्ताधर्ताओं को प्रेम के धागे में बांधने की कोशिश करते दिखाई दे रहे हैं…। मोहन का जेन ज़ी प्रेम… और अभिजीत के बढ़ते कदम… दोनों ही भारतीय लोकतंत्र की मौलिक तस्वीरें मानी जा सकती हैं…।

कौशल किशोर चतुर्वेदी

कौशल किशोर चतुर्वेदी मध्यप्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार हैं। प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में पिछले ढ़ाई दशक से सक्रिय हैं। पांच पुस्तकों व्यंग्य संग्रह “मोटे पतरे सबई तो बिकाऊ हैं”, पुस्तक “द बिगेस्ट अचीवर शिवराज”, ” सबका कमल” और काव्य संग्रह “जीवन राग” के लेखक हैं। वहीं काव्य संग्रह “अष्टछाप के अर्वाचीन कवि” में एक कवि के रूप में शामिल हैं। इन्होंने स्तंभकार के बतौर अपनी विशेष पहचान बनाई है।वर्तमान में भोपाल और इंदौर से प्रकाशित दैनिक समाचार पत्र “एलएन स्टार” में कार्यकारी संपादक हैं। इससे पहले इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में एसीएन भारत न्यूज चैनल में स्टेट हेड, स्वराज एक्सप्रेस नेशनल न्यूज चैनल में मध्यप्रदेश‌ संवाददाता, ईटीवी मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ में संवाददाता रह चुके हैं। प्रिंट मीडिया में दैनिक समाचार पत्र राजस्थान पत्रिका में राजनैतिक एवं प्रशासनिक संवाददाता, भास्कर में प्रशासनिक संवाददाता, दैनिक जागरण में संवाददाता, लोकमत समाचार में इंदौर ब्यूरो चीफ दायित्वों का निर्वहन कर चुके हैं। नई दुनिया, नवभारत, चौथा संसार सहित अन्य अखबारों के लिए स्वतंत्र पत्रकार के तौर पर कार्य कर चुके हैं।

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