मप्र में फर्जी जाति प्रमाण पत्र के जरिए आरक्षित वर्ग का लाभ लेने के आरोप में पूर्व विधायक ममता मीणा के पति और रिटायर्ड आईपीएस रघुवीर सिंह मीणा के खिलाफ केस दर्ज हुआ है। पुलिस मुख्यालय की सतर्कता शाखा ने धोखाधड़ी, साजिश, गलत दस्तावेज तैयार करने और एससी-एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम की धाराओं में एफआईआर दर्ज की है। आरोप है कि मीणा ने एसटी वर्ग के प्रमाण पत्र के आधार पर एमपीपीएससी से डीएसपी पद पर चयन हासिल किया और बाद में दूसरे सेवा लाभ लिए।

विदिशा से जारी हुआ था एसटी का जाति प्रमाण पत्र
जांच में सामने आया कि पुलिस सेवा में आने से पहले मीणा मप्र में शासकीय शिक्षक के पद पर थे। उस समय उनके दस्तावेजों में उन्हें ओबीसी वर्ग का बताया था। इसके बाद एमपीपीएससी में खुद को एसटी वर्ग का बताया। इसी से डीएसपी पद पर चयन हुआ।
मप्र के मूल निवासी पर भी सवाल: एसटी प्रमाण पत्र 1984 में विदिशा के आदिम जाति कल्याण विभाग से जारी हुआ था। जांच में मप्र के मूल निवासी होने से जुड़े दस्तावेजों पर भी सवाल उठे हैं। प्रमाण पत्र जारी करने वाले कर्मचारी भी जांच के दायरे में हैं।
शिकायत के बाद जांच में खुलासा: गुना के राघौगढ़ निवासी हरवीर सिंह रघुवंशी की शिकायत पर मामले की जांच हुई। शासन की उच्च स्तरीय छानबीन समिति ने मीणा के जाति प्रमाण पत्र और संबंधित रिकॉर्ड की जांच की और इसे अमान्य घोषित कर दिया।