
आओ 71 वें स्थापना दिवस समारोह पर नशामुक्त और जवाबदेह मध्यप्रदेश बनाने का संकल्प लेते हैं…
हाल ही में आईएएस-आईपीएस की आई पदस्थापना सूची में मध्य प्रदेश के दो जिलों सागर और देवास के कलेक्टर और एसपी बदल दिए गए। यह दोनों जिले इसलिए चर्चा में रहे थे क्योंकि जहरीली और अवैध शराब के सेवन से सागर में करीब तीन दर्जन और देवास में एक दर्जन से ज्यादा मौतें हुईं थी। और मध्य प्रदेश के 71 वें स्थापना दिवस समारोह से एक दिन पहले इंदौर के एक नशा मुक्ति केंद्र में नशा छोड़ने के लिए भर्ती हुए एक युवक की आत्महत्या ने गंभीर सवाल उठाए हैं। सबसे बड़ा सवाल यह सामने आया है कि नशा मुक्ति केंद्र में युवक की आत्महत्या का जिम्मेदार किसे ठहराया जाए? आखिर क्या नशा मुक्ति केंद्र में ऐसी किसी घटना के लिए किसी की जवाबदेही तय नहीं होनी चाहिए?
तो मूल बात जवाबदेही की है। सागर और देवास जिलों में नशे से हुई मौतों के लिए एक तरफ़ आबकारी महकमे को जवाबदेह माना गया और दोनों जिलों में आबकारी विभाग के अफसरों पर ताबड़तोड़ कार्रवाई की गई। वहीं दोनों ही जिलों में अंततः कलेक्टर और एसपी को जवाबदेह मानकर उन्हें भी जिलों से हटाने में सरकार पीछे नहीं रही। जवाबदेही की यह परम्परा क्या खाली जिलों तक सीमित रहेगी? हाल ही में मध्यप्रदेश के एक मंत्री के ओएसडी पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगे थे। सरकार और संबंधित मंत्री ने आनन फानन में ओएसडी को हटाकर जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया था। और बाद में हटाए गए ओएसडी के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज कराई गई है। तो सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या मंत्री के यहाँ रहते हुए ओएसडी अपनी मनमानी करने का दुस्साहस कर सकता है? बात यानी इतनी सी है कि सरकार को इस मामले में क्या असल जवाबदेह की तलाश नहीं करनी चाहिए थी? जबकि इस मामले के कुछ महीनों पहले ही एक मंत्री से आनन फानन में उसका मूल विभाग छीनकर आनंद की तरफ रुखसत कर दिया गया था। उन मंत्री के खिलाफ वास्तव में क्या आरोप थे, इस बात की आज तक भी किसी को खबर नहीं लगी। और हाल ही में, एक विभाग के एसीएस ने अपने ही
विभाग में खरीदी घोटाले की पूरी पोल खोल दी। सबूत भी सबके सामने रख दिए। अब इस मामले में भी यह समझ में नहीं आ रहा कि पोल खोलने वाले अफ़सर आखिर क्या संदेश देने वाले थे? यदि वह चाहते तो समय रहते ऐसे घोटाले करने वाले मातहतों को सबक सिखा सकते थे। और फिर वही बात कि इस मामले में भी असल जवाबदेह कौन है?
खैर मुख्यमंत्री के रूप में तीसरा स्थापना दिवस समारोह मना रहे डॉ. मोहन यादव का कहना है कि मध्यप्रदेश का स्थापना दिवस केवल एक तारीख नहीं, बल्कि हमारी गौरवशाली सांस्कृतिक विरासत, समृद्ध परंपराओं, विकास यात्रा और सामूहिक संकल्पों का उत्सव है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारा संकल्प है कि किसान केवल अन्नदाता ही नहीं, बल्कि आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर और समृद्ध भी बने। किसान की समृद्धि ही मध्यप्रदेश की समृद्धि का वास्तविक आधार है। सीएम चाहते हैं कि मध्यप्रदेश का युवा नौकरी पाने वाला ही नहीं, बल्कि रोजगार देने वाला उद्यमी और समाज का नेतृत्व करने वाला व्यक्तित्व भी बने। सीएम चाहते हैं कि गांव और शहर के बच्चों को समान रूप से उत्कृष्ट शिक्षा प्राप्त हो। मोहन का कहना है कि हमारा उद्देश्य ऐसा मध्यप्रदेश बनाना है, जहां प्रत्येक नागरिक भयमुक्त वातावरण में जीवन व्यतीत कर सके और निवेशकों तथा उद्यमियों को भी सुरक्षित वातावरण उपलब्ध हो। सीएम का संकल्प है कि प्रशासन अधिक जवाबदेह, संवेदनशील और जनकेंद्रित बने। मुख्यमंत्री ने अपील की है कि आइए, मध्यप्रदेश के स्थापना दिवस पर हम सब मिलकर एक ऐसे प्रदेश के निर्माण का संकल्प लें, जहां विकास का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे, हर वर्ग को आगे बढ़ने का अवसर मिले और हमारी आने वाली पीढ़ियां एक समृद्ध, सुरक्षित एवं आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश पर गर्व कर सकें।
वास्तव में देखा जाए तो 1 नवंबर 1956 को अस्तित्व में आए हमारे मध्यप्रदेश ने सात दशकों में अनेक उपलब्धियां अर्जित की हैं। और इन सात दशकों में मध्य प्रदेश ने बहुत सारे संकल्प पूरे किए हैं और संकल्पों का यह सिलसिला अब भी जारी है। इन सबके मूल में कहीं न कहीं जवाबदेही ही है। अगर हर नागरिक जवाबदेह बन जाए तब शायद पूरा मध्य प्रदेश न केवल आत्मनिर्भर बन जाए, बल्कि स्वच्छतम शहर इंदौर की तरह पूरी दुनिया में अपना नाम विकसित और सर्वश्रेष्ठ राज्य में शामिल कर ले। तो फिर वही बात कि इंदौर की घटना नशामुक्ति केंद्रों में जवाबदेही की मांग कर रही है। और सागर और देवास की घटनाएं भी हमसे बहुत कुछ मांग कर रही हैं। तो आओ हम सभी 71 वें स्थापना दिवस समारोह पर नशामुक्त और जवाबदेह मध्यप्रदेश बनाने का संकल्प लेते हैं… ताकि किसी भी नशे का रंग हम पर न चढ़े और हमारा मध्यप्रदेश आत्मनिर्भर विकसित और सर्वसमृद्धि का पर्याय बनकर सभी की उम्मीदों पर खरा उतरने में सफल हो।

कौशल किशोर चतुर्वेदी
कौशल किशोर चतुर्वेदी मध्यप्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार हैं। प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में पिछले ढ़ाई दशक से सक्रिय हैं। पांच पुस्तकों व्यंग्य संग्रह “मोटे पतरे सबई तो बिकाऊ हैं”, पुस्तक “द बिगेस्ट अचीवर शिवराज”, ” सबका कमल” और काव्य संग्रह “जीवन राग” के लेखक हैं। वहीं काव्य संग्रह “अष्टछाप के अर्वाचीन कवि” में एक कवि के रूप में शामिल हैं। इन्होंने स्तंभकार के बतौर अपनी विशेष पहचान बनाई है।वर्तमान में भोपाल और इंदौर से प्रकाशित दैनिक समाचार पत्र “एलएन स्टार” में कार्यकारी संपादक हैं। इससे पहले इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में एसीएन भारत न्यूज चैनल में स्टेट हेड, स्वराज एक्सप्रेस नेशनल न्यूज चैनल में मध्यप्रदेश संवाददाता, ईटीवी मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ में संवाददाता रह चुके हैं। प्रिंट मीडिया में दैनिक समाचार पत्र राजस्थान पत्रिका में राजनैतिक एवं प्रशासनिक संवाददाता, भास्कर में प्रशासनिक संवाददाता, दैनिक जागरण में संवाददाता, लोकमत समाचार में इंदौर ब्यूरो चीफ दायित्वों का निर्वहन कर चुके हैं। नई दुनिया, नवभारत, चौथा संसार सहित अन्य अखबारों के लिए स्वतंत्र पत्रकार के तौर पर कार्य कर चुके हैं।