भागीरथपुरा हादसे के बाद MP में रोबोटिक जांच: 2.30 लाख डेंजर क्रॉसिंग पॉइंट्स पर नजर, ₹40 प्रति मीटर में बिना सड़क खोदे पकड़े जाएंगे पानी-सीवर के लीकेज

इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से 36 मौतों के बाद मध्य प्रदेश सरकार ने पेयजल और सीवर लाइनों के घालमेल की जांच के लिए रोबोटिक निरीक्षण कराने का फैसला लिया है।नगरीय प्रशासन एवं विकास संचालनालय ने सभी नगर निगमों, नगर पालिकाओं और नगर परिषदों को 70 से 900 मिमी व्यास वाली पानी और सीवर पाइपलाइनों की जांच कराने के निर्देश दिए हैं। इसके लिए चेन्नई की एक विशेषज्ञ एजेंसी को एम्पैनल किया गया है।

एजेंसी 40 रुपए प्रति मीटर की दर से पाइपलाइनों की जांच करेगी। नगरीय प्रशासन विभाग ने इसके लिए एजेंसी से एक साल का एग्रीमेंट किया है। मंडे स्पेशल में जानिए कैसे काम करेगी तकनीक… क्या होगा फायदा

पहले समझिए, सरकार को यह फैसला क्यों लेना पड़ा?

दिसंबर 2025 के आखिरी सप्ताह में इंदौर के भगीरथपुरा में दूषित पेयजल से 36 लोगों की मौत हो गई थी। जांच में पीने के पानी में मानव मल से जुड़े बैक्टीरिया मिले। सीवर लाइन लीक होने से उसका पानी पेयजल लाइन में मिल गया था। अकेले भगीरथपुरा में ऐसे 260 पॉइंट्स मिले, जहां सीवर का पानी पेयजल में मिल रहा था।

हादसे के बाद सरकार ने जीआईएस (GIS) प्लेटफॉर्म ‘गरुड़’ से पूरे प्रदेश की मैपिंग कराई। इसमें मध्य प्रदेश में 2.30 लाख से अधिक ऐसे पॉइंट्स मिले, जहां सीवर और पेयजल पाइपलाइनें एक-दूसरे को क्रॉस कर रही हैं। इनमें इंदौर में 30 हजार और भोपाल में 20 हजार से अधिक डेंजर क्रॉसिंग पॉइंट्स हैं, जहां सीवर का पानी पेयजल में मिलने का खतरा है।

कैसे काम करेगी रोबोटिक तकनीक ?

अब डेंजर पॉइंट्स और पाइपलाइनों की अंदरूनी स्थिति की जांच रोबोट करेंगे।बिना खुदाई के जांच (ट्रेंचलेस टेक्नोलॉजी): इसतकनीक में पाइपलाइन की जांच के लिए सड़कों की खुदाई नहीं करनी पड़ेगी।CCTV क्रॉलर सिस्टम: रोबोट को मौजूदा मैनहोल,एयर रिलीज वाल्व या अस्थायी एक्सेस पॉइंट्स के जरिए पाइपलाइन में उतारा जाएगा।

300 मीटर का केबल नेटवर्क: रोबोट में

हाई-रिज़ॉल्यूशन कैमरा और सेंसर लगे होंगे, जो 300 मीटर लंबे केबल से जुड़े रहेंगे। रोबोट पाइपलाइन के अंदर लगातार वीडियो रिकॉर्डिंग और डेटा दर्ज करेगा।

70 से 900 मिमी व्यासः रोबोट 70 से 900 मिमी व्यास वाली पानी और सीवर पाइपलाइनों में जाकर लीकेज, टूट-फूट और अवैध कनेक्शन का पता लगाएगा।

₹400 के काम की बोली सिर्फ ₹40 प्रति मीटर, ऐसे तय हुई एजेंसी

नगरीय प्रशासन विभाग ने इस काम के लिए 1.50 करोड़ रुपए की अनुमानित लागत और 365 दिनों की अवधि का टेंडर जारी किया था। इसमें तीन कंपनियों ने बोली लगाई। उनकी दरों में बड़ा अंतर था।डिजिटल सर्विलॉन्स : ₹440 प्रति मीटरफॉर्म डील: ₹400 प्रति मीटरपेरमा-लिनियर इंडस्ट्रीज (इंडिया) प्रा. लिमिटेड: ₹40 प्रति मीटर

सबसे कम बोली (L1) के आधार पर चेन्नई की पेरमा-लिनियर इंडस्ट्रीज को एम्पैनल किया गया है। कंपनी 20 अप्रैल 2022 को रजिस्टर्ड हुई थी और इसके डायरेक्टर गणेशन और रेवती हैं। अब नगरीय निकाय अपनी जरूरत के अनुसार एस्टीमेट तैयार कर कंपनी को वर्क ऑर्डर जारी करेंगे।15 से अधिक राज्यों में इस्तेमाल हो रही है यह तकनीकमध्य प्रदेश इस तकनीक का इस्तेमाल पहली बार करने जा रहा है। नीति आयोग के फ्रंटियर टेक नेटवर्क

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