किसान कल्याण वर्ष में किसान आंदोलन का हो सम्मान… कौशल किशोर चतुर्वेदी

किसान कल्याण वर्ष में किसान आंदोलन का हो सम्मान…
मध्यप्रदेश सरकार वर्ष 2026 को “किसान कल्याण वर्ष” के रूप में मना रही है। राज्य सरकार के 17 अलग-अलग विभागों पशुपालन, उद्यानिकी, सहकारिता, कृषि, उद्योग को साथ लेकर किसानों की समृद्धि के लिए खेत से लेकर बाजार तक विस्तृत योजना तैयार की गई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के इस ट्वीट में कहा गया था कि किसानों की समृद्धि के लिए समर्पित इस वर्ष में हम किसानों को आत्मनिर्भर बनाने वाले सभी कार्यों और नवाचारों को प्रोत्साहन देंगे। और सरकार लगातार खुद को किसान हितैषी बताती रही है और किसानों के लिए सरकारी सौगातों को सामने रखती रही है। ऐसे में ग्रीष्मकालीन मूंग की समर्थन मूल्य पर खरीदी को लेकर मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में जुट रहे किसान निराश नहीं होंगे, यह उम्मीद की जा सकती है।
मूंग की 100% खरीदी और अन्य मांगों को लेकर संयुक्त किसान मोर्चा के किसान मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में एकत्र हुए हैं। पुलिस और किसानों के बीच संघर्ष भी सामने आया है। किसानों की मांगों की सूची में मूंग की 100 प्रतिशत उपज समर्थन मूल्य पर खरीदी जाए, ई-टोकन व्यवस्था खत्म की जाए, एमएसपी पर खरीद की कानूनी गारंटी दी जाए, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में सुधार किया जाए, अघोषित बिजली कटौती बंद की जाए, अनुदान पर ट्रांसफार्मर उपलब्ध कराए जाएं, ग्रामीण सड़कों का निर्माण कराया जाए, भारत-अमेरिका ट्रेड डील समाप्त करने की मांग शामिल है।
किसान नेताओं का कहना है कि वे सीएम हाउस के सामने डेरा डालेंगे और मांगें पूरी होने तक वापस नहीं लौटेंगे। भोपाल कूच के दौरान किसान नेता ने सरकार पर नाराजगी जताते हुए कहा कि किसान कोई अपराध नहीं कर रहे हैं, बल्कि देश का पेट भर रहे हैं। उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण आंदोलन के बावजूद पदाधिकारियों को डिटेन किया गया और जगह-जगह बैरिकेड लगाए गए।
उन्होंने मूंग खरीदी और एमएसपी का मुद्दा उठाते हुए कहा कि किसानों की पूरी मूंग नहीं खरीदी जा रही। उन्होंने सवाल उठाया कि जब संसद में एमएसपी थी, है और रहेगी कहा गया, तो किसानों को इसका लाभ क्यों नहीं मिल रहा। भोपाल कूच में शामिल किसान लंबी लड़ाई की तैयारी के साथ आए हैं। वे ट्रैक्टर-ट्रॉली में सात दिन का राशन और पानी लेकर पहुंचे हैं। कई किसान पहले से दाल-बाटी बनाकर भी साथ लाए हैं। उनका कहना है कि मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा और वे किसी भी परिस्थिति का सामना करने के लिए तैयार हैं। संयुक्त किसान मोर्चा के नेतृत्व में प्रदेश के 19 किसान संगठन इस आंदोलन में शामिल हैं। 27 जुलाई 2026 को बरखेड़ा से शुरू हुई किसान क्रांति पैदल यात्रा 28 जुलाई 2026 को औबेदुल्लागंज, मंडीदीप और 11 मील होते हुए भोपाल शहर में पहुंची। रास्ते में कई जगह पुलिस ने किसानों को रोकने का प्रयास किया, लेकिन वे बैरिकेडिंग हटाते हुए आगे बढ़ते रहे। किसानों की मूंग खरीदी को लेकर कृषि मंत्री से हुई चर्चा का कोई ठोस परिणाम नहीं निकल सका।
वहीं नई दिल्ली में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय कृषि एवं उद्यानिकी एक्सपो-2026 में संपूर्ण एग्री-हॉर्टिकल्चर सेक्टर में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए मध्यप्रदेश को प्रथम पुरस्कार प्राप्त हुआ है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस उपलब्धि के लिये प्रदेश के किसानों, कृषि वैज्ञानिकों और विभागीय अधिकारियों को 27 जुलाई को बधाई दी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 27 जुलाई 2026 को ही खंडवा जिला मुख्यालय में हुये बलराम कृषि महोत्सव में प्रदेश के 82 लाख 70 हजार से अधिक किसानों के खातों में मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना अंतर्गत 3308 करोड़ रुपए सिंगल क्लिक से अंतरित किये।
तो उम्मीद की जा सकती है कि बलराम के नाम पर आगे बढ़ रहा मध्य प्रदेश जल्दी ही अन्नदाताओं की मांगों के पूरा होने का साक्षी बनेगा। मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव किसानों को हितों को लेकर और खेती को लाभ का धंधा बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं, तो इस कड़ी में किसानों की मांगों के पूरे होने की उम्मीद करना एकदम सही है। और हो सकता है कि किसानों को सीएम हाउस का घेराव उग्र तरीके से करने की जरूरत ही न पड़े और मांगें भी पूरी हो जाएं…किसान कल्याण वर्ष में किसान आंदोलन का हो सम्मान…
कौशल किशोर चतुर्वेदी
मध्यप्रदेश सरकार वर्ष 2026 को “किसान कल्याण वर्ष” के रूप में मना रही है। राज्य सरकार के 17 अलग-अलग विभागों पशुपालन, उद्यानिकी, सहकारिता, कृषि, उद्योग को साथ लेकर किसानों की समृद्धि के लिए खेत से लेकर बाजार तक विस्तृत योजना तैयार की गई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के इस ट्वीट में कहा गया था कि किसानों की समृद्धि के लिए समर्पित इस वर्ष में हम किसानों को आत्मनिर्भर बनाने वाले सभी कार्यों और नवाचारों को प्रोत्साहन देंगे। और सरकार लगातार खुद को किसान हितैषी बताती रही है और किसानों के लिए सरकारी सौगातों को सामने रखती रही है। ऐसे में ग्रीष्मकालीन मूंग की समर्थन मूल्य पर खरीदी को लेकर मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में जुट रहे किसान निराश नहीं होंगे, यह उम्मीद की जा सकती है।
मूंग की 100% खरीदी और अन्य मांगों को लेकर संयुक्त किसान मोर्चा के किसान मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में एकत्र हुए हैं। पुलिस और किसानों के बीच संघर्ष भी सामने आया है। किसानों की मांगों की सूची में मूंग की 100 प्रतिशत उपज समर्थन मूल्य पर खरीदी जाए, ई-टोकन व्यवस्था खत्म की जाए, एमएसपी पर खरीद की कानूनी गारंटी दी जाए, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में सुधार किया जाए, अघोषित बिजली कटौती बंद की जाए, अनुदान पर ट्रांसफार्मर उपलब्ध कराए जाएं, ग्रामीण सड़कों का निर्माण कराया जाए, भारत-अमेरिका ट्रेड डील समाप्त करने की मांग शामिल है।
किसान नेताओं का कहना है कि वे सीएम हाउस के सामने डेरा डालेंगे और मांगें पूरी होने तक वापस नहीं लौटेंगे। भोपाल कूच के दौरान किसान नेता ने सरकार पर नाराजगी जताते हुए कहा कि किसान कोई अपराध नहीं कर रहे हैं, बल्कि देश का पेट भर रहे हैं। उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण आंदोलन के बावजूद पदाधिकारियों को डिटेन किया गया और जगह-जगह बैरिकेड लगाए गए।
उन्होंने मूंग खरीदी और एमएसपी का मुद्दा उठाते हुए कहा कि किसानों की पूरी मूंग नहीं खरीदी जा रही। उन्होंने सवाल उठाया कि जब संसद में एमएसपी थी, है और रहेगी कहा गया, तो किसानों को इसका लाभ क्यों नहीं मिल रहा। भोपाल कूच में शामिल किसान लंबी लड़ाई की तैयारी के साथ आए हैं। वे ट्रैक्टर-ट्रॉली में सात दिन का राशन और पानी लेकर पहुंचे हैं। कई किसान पहले से दाल-बाटी बनाकर भी साथ लाए हैं। उनका कहना है कि मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा और वे किसी भी परिस्थिति का सामना करने के लिए तैयार हैं। संयुक्त किसान मोर्चा के नेतृत्व में प्रदेश के 19 किसान संगठन इस आंदोलन में शामिल हैं। 27 जुलाई 2026 को बरखेड़ा से शुरू हुई किसान क्रांति पैदल यात्रा 28 जुलाई 2026 को औबेदुल्लागंज, मंडीदीप और 11 मील होते हुए भोपाल शहर में पहुंची। रास्ते में कई जगह पुलिस ने किसानों को रोकने का प्रयास किया, लेकिन वे बैरिकेडिंग हटाते हुए आगे बढ़ते रहे। किसानों की मूंग खरीदी को लेकर कृषि मंत्री से हुई चर्चा का कोई ठोस परिणाम नहीं निकल सका।
नई दिल्ली में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय कृषि एवं उद्यानिकी एक्सपो-2026 में संपूर्ण एग्री-हॉर्टिकल्चर सेक्टर में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए मध्यप्रदेश को प्रथम पुरस्कार प्राप्त हुआ है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस उपलब्धि के लिये प्रदेश के किसानों, कृषि वैज्ञानिकों और विभागीय अधिकारियों को 27 जुलाई को बधाई दी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 27 जुलाई 2026 को ही खंडवा जिला मुख्यालय में हुये बलराम कृषि महोत्सव में प्रदेश के 82 लाख 70 हजार से अधिक किसानों के खातों में मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना अंतर्गत 3308 करोड़ रुपए सिंगल क्लिक से अंतरित किये।
तो उम्मीद की जा सकती है कि बलराम के नाम पर आगे बढ़ रहा मध्य प्रदेश
जल्दी ही अन्नदाताओं की मांगों के पूरा होने का साक्षी बनेगा। मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव किसानों को हितों को लेकर और खेती को लाभ का धंधा बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं, तो इस कड़ी में किसानों की मांगों के पूरे होने की उम्मीद करना एकदम सही है। और हो सकता है कि किसानों को सीएम हाउस का घेराव उग्र तरीके से करने की जरूरत ही न पड़े और मांगें भी पूरी हो जाएं…किसान कल्याण वर्ष में किसान आंदोलन का सम्मान तो होना ही चाहिए…।

कौशल किशोर चतुर्वेदी

कौशल किशोर चतुर्वेदी मध्यप्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार हैं। प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में पिछले ढ़ाई दशक से सक्रिय हैं। पांच पुस्तकों व्यंग्य संग्रह “मोटे पतरे सबई तो बिकाऊ हैं”, पुस्तक “द बिगेस्ट अचीवर शिवराज”, ” सबका कमल” और काव्य संग्रह “जीवन राग” के लेखक हैं। वहीं काव्य संग्रह “अष्टछाप के अर्वाचीन कवि” में एक कवि के रूप में शामिल हैं। इन्होंने स्तंभकार के बतौर अपनी विशेष पहचान बनाई है।वर्तमान में भोपाल और इंदौर से प्रकाशित दैनिक समाचार पत्र “एलएन स्टार” में कार्यकारी संपादक हैं। इससे पहले इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में एसीएन भारत न्यूज चैनल में स्टेट हेड, स्वराज एक्सप्रेस नेशनल न्यूज चैनल में मध्यप्रदेश‌ संवाददाता, ईटीवी मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ में संवाददाता रह चुके हैं। प्रिंट मीडिया में दैनिक समाचार पत्र राजस्थान पत्रिका में राजनैतिक एवं प्रशासनिक संवाददाता, भास्कर में प्रशासनिक संवाददाता, दैनिक जागरण में संवाददाता, लोकमत समाचार में इंदौर ब्यूरो चीफ दायित्वों का निर्वहन कर चुके हैं। नई दुनिया, नवभारत, चौथा संसार सहित अन्य अखबारों के लिए स्वतंत्र पत्रकार के तौर पर कार्य कर चुके हैं