विंध्वासनी माता सुबह के दर्शन


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विंध्वासनी माता सुबह के दर्शन

PM मोदी ने एक बार फिर की शिवराज सरकार की तारीफ, जानिए क्या बोले प्रधानमंत्री


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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बार फिर शिवराज सरकार की तारीफ की है। पीएम भोपाल (Bhopal) में आयोजित कार्यक्रम में वर्चुअली जुड़कर  संबोधन दे रहे थे। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में पिछले तीन वर्षों में करीब 50 हजार शिक्षकों की भर्ती हुई है। इसके लिए राज्य सरकार बहुत-बहुत बधाई की पात्र है।

मोदी ने कहा कि मुझे बताते हुए अत्यंत प्रसन्नता है कि सफलता की एक और सीढ़ी चढ़ते हुए मध्यप्रदेश में आज 5,580 शिक्षकों की नियुक्ति की गई है। भोपाल के भेल में आयोजित कार्यक्रम में नवनियुक्त शिक्षकों को बधाई पत्र भेंटकर उन्हें उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं। आज जो शिक्षक बन रहे हैं, मैं आपको और आपके परिवार के लोगों को इस सफलता और नई यात्रा के लिए शुभकामनाएं देता हूं। मैं मध्यप्रदेश के प्राथमिक विद्यालयों में नियुक्त होने वाले 5,500 से ज्यादा शिक्षक भाई-बहनों को बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूं। पीएम मोदी ने मध्य प्रदेश रोजगार मेले को भी संबोधित किया। उन्होंने कहा कि नीति आयोग की रिपोर्ट के अनुसार, पांच वर्षों में 13.5 करोड़ लोग गरीबी रेखा से ऊपर चले गए हैं। इस वर्ष दाखिल आईटी रिटर्न पर एक अन्य रिपोर्ट 9 वर्षों में औसत आय में वृद्धि का संकेत देती है।

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि शिक्षक को पर्याप्त सुविधाएं न देना भी पाप है। कांग्रेस की सरकार में संविदा, शिक्षाकर्मी कहा जाता था। 500 रुपये महीने वेतन दिया जाता था, लेकिन जब मेरी सरकार बनी तो हमने सभी को शिक्षक बनाया, अच्छा वेतन दिया। उन्होंने नवनियुक्त शिक्षकों को नियुक्ति बधाई पत्र देते हुए कहा कि अभी भी व्यवस्था में और सुधार करने वाला हूं। शिक्षक का काम विद्यार्थियों को ज्ञान और बेहतर मनुष्य बनने का संस्कार देना भी है। मुख्यमंत्री ने शिक्षकों से आग्रह करते हुए कहा कि आप बच्चों की चिंता करिए, आप सभी के भविष्य की चिंता करना मेरा काम है।

बता दें कि सोमवार को भोपाल के भेल स्थित सीएम राइज महात्मा गांधी विद्यालय में प्रशिक्षण-सह-उन्मुखीकरण कार्यक्रम आयोजित हुआ था। यहां पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 5 हजार 580 नवनियुक्त शिक्षकों को नियुक्ति बधाई पत्र सौंपा। सीएम ने प्रतीकात्मक तौर पर 10 शिक्षकों को मंच पर बुलाया और उन्हें यह पत्र सौंपे। इसमें सत्र 2023-24 में नवनियुक्त 5 हजार 580 शिक्षक शामिल हैं।

सीरियल किलर बनी नर्स; अस्पताल में अलग-अलग तरीके से की 7 मासूम बच्चों की हत्या, कोर्ट ने सुनाई उम्र कैद की सजा


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ब्रिटेन के मैनचेस्टर क्राउन कोर्ट ने 7 बच्चों की जान लेने वाली नर्स को उम्रकैद सुनाई है। इस नर्स का नाम लूसी लेटबी है। सोमवार को कोर्ट की कार्यवाही शुरू होने पर जज जस्टिस गॉस ने कहा- लेटबी ने अदालत आने से इनकार कर दिया है। लिहाजा, उसकी गैरमौजूदगी में ही सजा का ऐलान किया गया।

लेटबी को काउटेंस ऑफ चेस्टर हॉस्पिटल में 7 बच्चों की हत्या का दोषी पाया गया था। सातों बच्चों को उसने अलग-अलग तरीके से मारा था। इसके अलावा 6 बच्चों को जान से मारने की कोशिश का आरोप भी साबित हुआ। सभी घटनाएं जून 2015 से जून 2016 के बीच अंजाम दी गईं। लेटबी के खिलाफ भारतीय मूल के डॉक्टर रवि जयराम भी गवाह थे।

इस मामले में हैरानी की बात यह है कि सरकारी वकील 9 महीने चली सुनवाई में पुख्ता तौर पर यह नहीं बता सके कि लूसी ने बच्चों की हत्या क्यों की? हालांकि कुछ दावे जरूर किए गए, लेकिन कोर्ट के फैसले में इनका जिक्र नहीं है। यहां इस केस से जुड़ी अहम बातों पर सिलसिलेवार नजर…

लूसी को सजा सुनाने वाले जज जस्टिस गॉस। उन्होंने फैसले में कहा- लूसी का जुर्म हैवानियत से कम नहीं है। इसने जिन बच्चों की जान ली, उनमें से कुछ तो प्री-मैच्योर थे।

 

मौत तक जेल में

  • जस्टिस गॉस ने आदेश दिया है कि लूसी को उन विक्टिम्स के बयानों की कॉपी सौंपी जाएगी, जिन्होंने अदालत के सामने बयान दर्ज कराए हैं और जिनके आधार पर सजा का ऐलान किया गया है।
  • ‘द गार्डियन’ की रिपोर्ट के मुताबिक लूसी को उसके जुर्मों की सजा उम्रकैद के तौर पर ही मिलनी थी। जिस तरह के संगीन जुर्म उसने किए हैं, उनकी मिसाल ब्रिटेन की मॉडर्न हिस्ट्री में नहीं मिलती। लूसी ब्रिटेन की सिर्फ तीसरी ऐसी महिला है जिसे बाकी उम्र सलाखों के पीछे गुजारनी होगी। जस्टिस गॉस ने फैसले में ‘होल लाइफ ऑर्डर’ शब्द का इस्तेमाल किया है। इसके मायने ये हैं कि 33 साल की लूसी की डेड बॉडी ही अब जेल से बाहर आएगी।
  • हालांकि ब्रिटेन के क्रिमिनल लॉ में ऐसी कई व्यवस्थाएं हैं, जिनके आधार पर दोषी को वक्त से पहले भी रिहाई मिल सकती है। कई मामलों में मेंटल हेल्थ और गंभीर बीमारी के आधार पर कुछ कैदियों को रिहा किया गया है। इसका आधार ह्यूमैनिटी यानी मानवता होता है।

जुड़वां बच्चे थे निशाने पर

  • अदालत के फैसले में कहा गया- तमाम कत्ल सोची-समझी साजिश के तहत अंजाम दिए गए। लेटबी खुद उस सेक्शन में ड्यूटी करना चाहती थी, जहां जुड़वां या इससे ज्यादा बच्चे रखे जाते थे। इनमें से ज्यादातर गंभीर तौर पर बीमार थे। इसमें कोई शक नहीं कि लूसी ब्रिटेन के इतिहास की सबसे खतरनाक चाइल्ड किलर है। उसके जुर्म बयान करना भी मुश्किल है। इसकी वजह से कई फैमिलीज ताउम्र दर्द में गुजरेंगी।
  • जस्टिस गॉस ने आगे कहा- लूसी ने लोगों के भरोसे को तोड़ा। उसका जुर्म हैवानियत से कम नहीं है। इसने जिन बच्चों की जान ली, उनमें से कुछ तो प्री-मैच्योर थे और उनका जिंदा रहना वैसे ही मुश्किल था। इसके बावजूद तुमने (लूसी) उन्हें मौत की नींद सुला दिया।

दो बार रिहाई भी मिली

  • लेटबी को 7 नवजात बच्चों की हत्या और 6 बच्चों की हत्या करने की कोशिश करने का दोषी पाया गया था। लेटबी पर अक्टूबर 2022 से केस चल रहा था। उस पर जिन बच्चों की हत्या का जुर्म साबित हुआ, उनमें अधिकतर या तो बीमार थे या समय से पहले पैदा हुए थे।
  • लूसी को जुलाई 2018 से नवंबर 2020 के बीच तीन बार गिरफ्तार किया गया। हालांकि दो बार छोड़ा भी गया। नवंबर 2020 में लूसी पर आरोप तय हुए थे। उत्तरी इंग्लैंड में मैनचेस्टर क्राउन कोर्ट की जूरी 22 दिनों तक चर्चा के बाद फैसले पर पहुंची।
  • सरकारी वकील निक जॉनसन ने कहा- लूसी सहयोगियों को यह यकीन दिला देती थी कि मौत की वजह बीमारी है। वह अपनी तरफ से बच्चों को नहलाने, कपड़े पहनाने और उनकी तस्वीरें लेने की पेशकश करती थी। वह हर बच्चे की मौत के बाद बहुत खुश नजर आती थी।
  • लेटबी के घर से पुलिस को हाथ से लिखा एक नोट भी मिला था। इस पर लिखा था- हां, मैं जालिम हूं। मैंने ही इन घटनाओं को अंजाम दिया। लूसी ने कोर्ट में कहा था- मैंने यह नोट तब लिखा था, जब मुझे दो-तीन बच्चों की मौत के बाद क्लर्क बना दिया गया।

कैसे पकड़ी गई लूसी

  • ब्रिटिश मीडिया की कई रिपोर्ट्स पुलिस इन्वेस्टिगेशन की जानकारी देती हैं। इस मामले की शुरू से आखिर तक जांच में डिप्टी सुपरिन्टेंडेंट पॉल ह्यूजेस का अहम रोल रहा। पॉल कहते हैं- जब एक ही हॉस्पिटल में लगातार बच्चों की मौत हुई तो शक हुआ। हमने खुले दिमाग से जांच शुरू की। शुरुआत में ही हम किसी नतीजे तक नहीं पहुंचना चाहते थे।
  • पॉल के मुताबिक हमारी नजर किसी संदिग्ध पर थी। ये जांच लंबी चलनी थी और हम कोर-कसर बाकी नहीं रखना चाहते थे। इसलिए जल्दबाजी की कोई गुंजाइश भी नहीं थी। हमने 17 तरह से जांच की। जब यह इन्वेस्टिगेशन शुरू हुई तो टीम में सिर्फ 8 अफसर थे। केस जब अंजाम तक पहुंचा तो टीम में 70 अफसर थे। सबसे ज्यादा मुश्किल उन दर्द में डूबे पेरेंट्स से जानकारी जुटाने में आई, जिनके बच्चों की हत्या की गई थी।

लूसी के घर से पुलिस ने तीन नोट बरामद किए थे। ये उनमें से एक था।

जब भी कोई बच्चा मरा, लूसी ही ड्यूटी पर क्यों थी

  • जज जस्टिस गॉस की अदालत ने इस केस की लगातार 9 महीने सुनवाई की। इस दौरान पुलिस ने तमाम साइंटिफिक एविडेंस पेश किए।
  • मोटे तौर पर बच्चों को तीन तरीकों से मारे जाने की बात साबित हुई। पहला- बिना दवाई का इंजेक्शन देकर। इससे नसों में वैक्यूम बन जाता है। ये ब्लड तक पहुंचता है और फिर मौत हो जाती है। दूसरा- जबरदस्ती ज्यादा दूध पिलाना और वो भी दूसरों का। तीसरा- इंसुलिन देकर जहर पैदा करना। इससे भी बच्चों की मौत हुई।
  • लेटबी ने बचाव में कहा- मैंने किसी बच्चे को नहीं मारा। हॉस्पिटल में सफाई की अच्छी व्यवस्था नहीं थी और वहां स्टाफ को लेकर भी दिक्कतें थीं। बच्चों की मौत इसी वजह से हुई।
  • इसके जवाब में सरकारी वकील ने कहा- अगर आपकी बात को सही मान लिया जाए तो ये बताइए कि सभी बच्चों की मौत उस वक्त ही क्यों हुई जब आप शिफ्ट में थीं और ऑन ड्यूटी थीं। इस पर लूसी ने चुप्पी साध ली।

बच्चों को क्यों मारा? क्या एकतरफा प्यार बना वजह?

  • लूसी को उम्रकैद जरूर दी गई है, लेकिन इस केस में एक सवालिया निशान अब भी बाकी है और वो ये कि लूसी ने आखिर 7 बच्चों की जान क्यों ली? कोर्ट के फैसले में भी हत्याओं की वजह नहीं बताई गई है। बहरहाल, केस की सुनवाई के दौरान और कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में हत्याओं के कुछ संभावित कारण बताए जाते रहे हैं।
  • ‘द इंडिपेंडेंट और बीबीसी’ के मुताबिक लूसी ने जिस हॉस्पिटल में बच्चों की जान ली, वो उसी हॉस्पिटल के एक डॉक्टर को एकतरफा तौर पर चाहती थी। वो ये भी चाहती थी कि बच्चों की मौत पर वो डॉक्टर लूसी से सहानुभूति जताए।
  • एक और शक ये है कि वो मानसिक तौर पर बीमार थी और उसे बच्चों को मारकर खुशी महसूस होती थी। 2020 में जब उसे तीसरी बार अरेस्ट किया गया तो उसके घर से एक नोट मिला। इस पर लिखा था- मैं जालिम हूं और यह मैंने ही किया है। एक और नोट में लूसी ने लिखा था- मैंने उन्हें इसलिए मारा, क्योंकि मैं उनकी सही देखभाल करने में नाकाम थी।
  • एक और नोट जो लूसी के घर से बरामद हुआ। उसमें लिखा था- मैं कभी शादी नहीं करूंगी और न मेरे बच्चे होंगे। मुझे कभी पता ही नहीं चला कि फैमिली कैसी होती है।

यह डायरी भी लूसी के घर से ही बरामद हुई थी। इसमें उसके रूटीन का जिक्र था।

कानून में बदलाव करेंगे सुनक

  • लूसी पर फैसला आने के बाद ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक ने कहा- सरकार यह तय करेगी कि सजा के ऐलान के वक्त अब कोई दोषी कोर्ट से गैरहाजिर न हो। सुनक का बयान इस लिहाज से अहम है, क्योंकि सजा के ऐलान के वक्त लूसी कोर्ट में मौजूद नहीं थी।
  • लूसी से पहले ब्रिटेन की सिर्फ तीन महिलाओं को आखिरी सांस तक कैद दी गई थी। इनके नाम है मायरा हिंडली, रोजमैरी वेस्ट और जोना डेनली। यह कानून 1983 में लाया गया था। इससे पहले मायरा को हत्या का दोषी पाए जाने के बाद 1990 में आखिरी सांस तक जेल में रहने की सजा सुनाई गई थी। हालांकि 2002 में उसकी मौत हो गई थी।
  • इसके अलावा दोनों महिलाएं इस वक्त जेल में हैं। रोजमैरी वेस्ट को हत्या के 10 मामलों में सजा मिली। डेनली को तीन लोगों की हत्या का दोषी पाया गया था।

 

KBC के पहले ही एपिसोड में अमिताभ बच्चन को 18 साल की धिमाही त्रिवेदी ने लगाई डांट, दी ये सलाह


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मुंबई: महानायक अमिताभ बच्चन को उनके शो कौन बनेगा करोड़पति के नए सीजन में वापसी के साथ ही चेतावनी मिल गई. स्वतंत्रता दिवस के दिन KBC का सीजन 15 का पहला एपिसोड आया जिसमें धिमाही त्रिवेदी नाम की एक 18 साल की लड़की ने अमिताभ बच्चन को देर रात तक सोशल मीडिया के इस्तेमाल न करने के बारे में सलाह के बारे में सलाह दी और कहा कि अगर वो ऐसा करेंगे तो उनकी आंखों के नीचे डार्क सर्कल हो जाएंगे.

हॉट सीट पर बैठे अमिताभ बच्चन से धिमाही ने कहा कि वो सिर्फ आधा घंटे के लिए ही सोशल मीडिया का इस्तेमाल करती हैं. बात-चीत में धिमाही ने बिग बी को कहा कि आप आधी रात के बाद भी ऑनलाइन रहते हैं. आप फिल्मों की शूटिंग करते हैं और अब केबीसी के लिए भी कर रहे हैं. फिर आप सोशल मीडिया कैसे मैनेज करते हैं? इसके जवाब में अमिताभ बच्चन ने धिमाही से पूछा कि क्या वो उनका सोशल मीडिया पेज देखती हैं, तो केबीसी कंटेस्टेंट ने कहा, मैंने यह भी देखा है कि आप रात 2 बजे भी पोस्ट शेयर करते हैं. इसके जवाब में अमिताभ ने उनसे पूछा, ‘क्या मैं कुछ गलत कर रहा हूं?

धिमाही ने कहा कि ‘नहीं सर, लेकिन देर रात तक मोबाइल देखने से डार्क सर्कल हो सकते हैं और आपको तो एकदम हैंडसम दिखना है तो आराम से सो जाया करिए.’ इसके जवाब में अमिताभ बच्चन ने कहा कि वो कैसे भी अपने फैंस के लिए समय निकाल लेते हैं अगर ऐसा नहीं करेंगे तो उन्हें बुरा लगता है.

इससे पहले सोनी टीवी पर केबीसी का एक प्रोमो शेयर किया गया था, जिसमें धीमही अमिताभ बच्चन से कहती हैं कि अगर आपकी उम्र को उलटा कर दिया जाए तो मेरी उम्र होगी. आपको बता दें अमिताभ बच्चन इस साल 81 साल के हो जाएंगे. केबीसी सीजन 15 को लेकर फैंस बेहद एक्साइटेड हैं.

 

 

तीर्थ यात्रियों से भरी बस में लगी अचानक आग, लोगों ने खिड़कियों से कूदकर बचाई जान


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मध्यप्रदेश के रीवा में फिर बस हादसा हो गया। बैजनाथ धाम  से लौट रहे दर्शनार्थियों की बस (tourist bus) में अचानक आग लग गई। कुछ ही पलों में आग ने पूरी बस को चपेट में ले लिया। भीतर बैठे दर्शनार्थियों ने कूदकर अपनी जान बचाई। प्राथमिक जानकारी के अनुसार हादसा रीवा-मिर्जापुर राष्ट्रीय राजमार्ग  पर स्थित ड्रमंडगंज घाटी में हुआ है। बस नेपाल से रीवा  जा रही थी।

बताया जा रहा है कि इलाके के कुछ लोग बैजनाथधाम दर्शन गए थे। लौटते समय उनकी बस में अचानक आग लग गई। बस की रफ्तार से आग तेजी से फैल गई। पूरी बस लपटों से घिर गई। अंदर बैठे लोगों को कुछ समझ नहीं आया। आग देखकर भगदड़ की स्थिति मच गई। लोगों ने खिड़कियों से कूदकर अपनी जान बचाई। फिलहाल किसी भी यात्री के हताहत होने की खबर नहीं मिली है। पुलिस को सूचना दी गई है। आग लगने का कारण तेल की पाइप फटना बताया जा रहा है।

 

जानकारी मिली है कि मध्य प्रदेश के सीधी जिला के अमिलिया थाना क्षेत्र के ग्रामीण एक बस बुक कर नेपाल स्थित पशुपतिनाथ मंदिर में दर्शन-पूजन के लिए गए थे। बुधवार को विंध्याचल में दर्शन-पूजन के बाद रीवा लौट रहे थे। दोपहर में ड्रमंडगंज घाटी चढ़ते समय बस के डीजल टैंक का पाइप फट जाने से अचानक बस में आग लग गई।

धुआं और आग देखते ही बस सवार लोगों में दर्शनार्थियों में अफरा-तफरी मच गई। चालक ने बस को रोक दिया। तीर्थयात्री जान बचाने के लिए बस की खिड़कियों का शीशा तोड़कर एक दूसरे को बाहर निकालने लगे। कई यात्रियों ने खिड़की का शीशा तोड़कर कूद कर जान बचाई। कुल 10 से 12 लोगों को हल्की चोटें आईं। सभी को वाहन से घर भिजवाया जा रहा है।

होमवर्क से परेशान बच्चा अपनी ही मां की शिकायत करने पहुंचा पुलिस स्टेशन! बोला- ‘अनाथालय में डाल दो मुझे’


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डेस्क: कहा जाता है कि बच्चों का दिल बहुत साफ होता है और वो किसी भी बात को दिल से लगाकर नहीं रखते. अब तक अगर आप भी ऐसा ही सोचते हैं कि बच्चे तो बच्चे होते हैं, तो चीन में हुई एक घटना आपकी सोच बदल देगी. यहां पर एक 10 साल के बच्चे ने अपनी मां की शिकायत जाकर पुलिस स्टेशन में कर दी और उनके रिक्वेस्ट की है कि वे उसे अनाथालय में डाल दें.

ये अजीबोगरीब घटना चीन के चोंगक्विंग नाम की जगह पर घटी. यहां के हुइक्सिंग पुलिस स्टेशन में एक बच्चा धड़धड़ाता हुआ पहुंचा और वो 2 पुलिसकर्मियों के पास जाकर अपनी बात बताने लगा. लड़के ने उनसे कहा कि वो अपने घर में और नहीं रहना चाहता है और घर से भागकर यहां आया है. उसने आग्रह किया है कि उसे अनाथाश्रम में डाल दिया जाए लेकिन उसे घर वापस नहीं जाना.

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक बच्चे की उम्र 10 साल है और उसे अपने घर में मां से होमवर्क नहीं करने के लिए डांट पड़ी थी. उसने पुलिसवालों से रिक्वेस्ट की है कि वे उसे अनाथालय में डाल दें. हालांकि काफी देर तक उसे कंविंस करने के बाद पुलिस ने उससे माता-पिता का नंबर ले लिया. जब उन्हें कॉल किया गया तो उसकी मां ने होमवर्क पर हुई बहस के बारे में बताया. हालांकि वो ये जानकर हैरान थी कि होमवर्क पूरा करने की बात पर बच्चा घर छोड़कर अनाथालय जाने के लिए तैयार हो जाएगा.

बच्चे ने बताया कि मां उसे रोज़ाना उसे होमवर्क के लिए डांटती है. वो रोज़ मुझे पढ़ने के लिए कहती है इसलिए मैं अनाथालय जाना चाहता हूं. पुलिस ने बच्चे को समझाने के बाद पिता को बुलाया कि उसे वे घर ले जाएं. उन्होंने बताया कि ये बेहतर ऑप्शन है. इस घटना का वीडियो देखने के बाद लोग दंग रह गए और उन्होंने कहा कि ये माता-पिता की नहीं बल्कि आलसी जेनरेशन की दिक्कत है, जो मेहनत नहीं करना चाहते. इसके अलावा पुलिस की तारीफ भी की गई है कि उन्होंने किस तरह समस्या का समाधान किया.