उज्जैन में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के रोड-शो के दौरान महापौर मुकेश टटवाल को रथ से उतारे जाने का विवाद अब शांत हो गया है। शनिवार को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बैरवा समाज के प्रदेश अध्यक्ष, अन्य पदाधिकारियों और महापौर मुकेश टटवाल से मुलाकात की।
भाजपा अध्यक्ष का रोड शो और रथ से उतारे जाने को लेकर मेयर को माला पहनाते कांग्रेसी।मुख्यमंत्री ने पूरे घटनाक्रम पर संज्ञान लेते हुए उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया। इसके बाद महापौर ने रविवार को डॉ. आंबेडकर की प्रतिमा के समक्ष प्रस्तावित कार्यक्रम निरस्त कर दिया।
महापौर बोले- मेरी मंशा सिर्फ बाबा साहब को नमन करने की थी
महापौर मुकेश टटवाल ने वीडियो जारी कर कहा कि मुख्यमंत्री से मुलाकात में उन्होंने पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी। उन्होंने मामले को गंभीरता से लेते हुए आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया है।महापौर ने कहा कि उनकी ओर से किसी मांग या धरने का आह्वान नहीं किया गया था। उनकी मंशा सिर्फ बाबा साहब को नमन कर उनसे सहनशक्ति और कार्य करने की प्रेरणा लेने की थी। उन्होंने समाजबंधुओं, जनप्रतिनिधियों और नगरवासियों का आभार जताया।
बैरवा समाज ने भी मुख्यमंत्री का आभार जताया
बैरवा समाज के शहर अध्यक्ष सुरेंद्र मरमट ने मुख्यमंत्री का आभार जताते हुए कहा कि उन्होंने समाज की बात सुनी और जल्द विवाद सुलझाने का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि महापौर के अपमान के मामले में पूरा समाज उनके साथ खड़ा रहा। अब मुख्यमंत्री के आश्वासन के बाद विवाद समाप्त हो गया है।
पहले महापौर ने कल विरोध का ऐलान किया था
रथ से उतारे जाने के बाद महापौर ने 20 सितंबर को सुबह 11 बजे फ्रीगंज स्थित डॉ. भीमराव आंबेडकर की प्रतिमा के पास बैठने की बात कही थी। उन्होंने कहा था कि वे बाबा साहब की प्रतिमा के सामने प्रार्थना करेंगे और जनता की ओर से मिली जिम्मेदारी निभाने की शक्ति मांगेंगे।शुक्रवार रात प्रभारी मंत्री गौतम टेटवाल, सांसद उमेशनाथ, विधायक अनिल जैन कालूहेड़ा समेत भाजपा के अन्य पदाधिकारी महापौर के बंगले पहुंचे थे। नेताओं ने उनसे विरोध वापस लेने को कहा था। महापौर ने घटना के जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग रखी थी।
कांग्रेस विधायक समेत कई नेता मेयर से मिले थे
विवाद के बाद कांग्रेस विधायक महेश परमार, शहर कांग्रेस अध्यक्ष मुकेश भाटी, नगर निगम नेता प्रतिपक्ष रवि राय और बैरवा समाज अध्यक्ष सुरेंद्र मरमट भी महापौर से मिलने पहुंचे थे। महेश परमार ने कहा था कि महापौर निर्वाचित जनप्रतिनिधि और शहर के प्रथम नागरिक हैं। उनके अनुसार किसी भी निर्वाचित जनप्रतिनिधि के साथ इस तरह का व्यवहार नहीं होना चाहिए।
बैरवा समाज ने प्रदर्शन की चेतावनी दी थी
बैरवा समाज के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामदयाल बड़ोदिया ने कहा था कि महापौर का नाम कार्यक्रम में था और उन्हें रथ पर बुलाया गया था। उनके अनुसार रथ पर पहुंचने के बाद उन्हें नीचे उतारा गया और उनके साथ अभद्र व्यवहार हुआ। उन्होंने 20 सितंबर को सुबह 11 बजे अंबेडकर सर्किल पर धरने की बात कही थी। जरूरत पड़ने पर उज्जैन के बाद जंतर-मंतर पर भी प्रदर्शन की चेतावनी दी थी।
25 साल से उज्जैन में बैरवा समाज का महापौर
महापौर मुकेश टटवाल बैरवा समाज से आते हैं। उज्जैन की राजनीति में इस समाज का खासा प्रभाव है। पिछले 25 साल से उज्जैन में इसी समाज से महापौर बनता आया है। बीते 25 साल में बैरवा समाज से मदन लाल लालावत, सोनी मेहर, रामेश्वर अखंड, मीना जोनवाल और अब मुकेश टटवाल महापौर बने हैं।
शहर में करीब 90 हजार बैरवा आबादी
उज्जैन शहर में बैरवा समाज की करीब 90 हजार आबादी और करीब 65 हजार वोटर बताए जाते हैं। महापौर चुनाव में बैरवा समाज की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती है।

महापौर को लेकर पहले भी विवाद सामने आ चुके
1. सवारी के दौरान महाकाल मंदिर जाने से भी रोका था
महाकाल मंदिर से निकलने वाली भादौ माह की पहली और सावन-भादो की पांचवीं सवारी में भी महापौर मुकेश टटवाल को मंदिर के अंदर जाने से रोक दिया गया।दरअसल, सवारी निकलने से पहले करीब 3 बजे मंदिर में जा रहे महापौर को शंख द्वार से पहले रोक दिया गया था। इस दौरान वे मंदिर के बाहर से दर्शन कर वापस लौट गए थे।
2. पत्र के बाद मेयर की 25 भस्म आरती परमिशन रोकी थी
महापौर मुकेश टटवाल ने इसी साल 10 जनवरी को पत्र लिखकर अवंतिका द्वार पर शहर के श्रद्धालुओं को हो रही असुविधा का मुद्दा उठाया था। उन्होंने लिखा था- अवंतिका द्वार से प्रवेश के बाद भी उज्जैन के दर्शनार्थियों को सामान्य कतार में शामिल किया जा रहा है।महापौर ने मंदिर समिति से व्यवस्था तत्काल ठीक करने की मांग की थी, क्योंकि इससे शीघ्र दर्शन का उद्देश्य पूरा नहीं हो रहा है। इसके बाद मंदिर समिति ने मेयर के कोटे से होने वाली 25 भस्म आरती परमिशन को रोक दिया।मेयर के मुताबिक- मंदिर में बात करने पर पता चला कि मेरे कोटे की सभी 25 भस्म आरती परमिशन को कैंसिल कर दिया गया है। इसके बाद मैंने मंदिर प्रशासक को फोन किया, लेकिन उन्होंने मेरा फोन भी रिसीव नहीं किया।