सरकार ने कहा कि पर्शन-टू-पर्शन ट्रांजैक्शन पूरी तरह फ़्री रहेंगे. वहीं, अगर भविष्य में मर्चेंट डिस्काउंट रेट लागू किया जाता है, तो यह केवल कुछ चुनिंदा मर्चेंट ट्रांजेक्शन पर, एक तय सीमा से ऊपर और मामूली दर पर लगाया जाएगा.यह दर डेबिट या क्रेडिट कार्ड के एमडीआर से काफ़ी कम होगी. ‘मर्चेंट डिस्काउंट रेट’ या एमडीआर लागू होने की स्थिति में भी यह शुल्क केवल एक तय सीमा से अधिक के लेनदेन पर ही लगाया जाएगा और ज़्यादातर लेनदेन पर कोई शुल्क नहीं लगेगा.

सरकार ने बताया कि टैक्सेशन एंड अदर लॉज़ (अमेंडमेंट) बिल, 2026 के जरिए पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट, 2007 की धारा 10ए में बदलाव का प्रस्ताव है.संसद से बिल पास होने के बाद, एमडीआर लागू करना है या नहीं और इसकी दर क्या होगी, इसका फ़ैसला एनपीसीआई की अध्यक्षता वाली यूपीआई एंड सर्विस स्टीयरिंग कमिटी करेगी.सरकार ने कहा कि पेमेंट्स एंड सैटलमेंट्स सिस्टम्स एक्ट में हालिया संशोधन को लेकर कुछ भ्रम पैदा हुआ है. कुछ लोगों ने इसे आम यूज़र्स पर चार्ज लगाने की तैयारी के तौर पर देखा, जबकि सरकार के मुताबिक़ ऐसा नहीं है.
सरकार का कहना है कि यूपीआई पर लेनदेन का वॉल्यूम लगातार तेजी से बढ़ रहा है. ऐसे में साइबर सिक्योरिटी, फ़्रॉड रोकने और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए लगातार निवेश की ज़रूरत है.सरकार ने यह भी कहा कि यूपीआई के विस्तार के लिए ज़्यादा कंपनियों को इस क्षेत्र में लाना ज़रूरी है. इसके लिए लंबे समय में ऐसा मॉडल चाहिए, जो सिर्फ सरकारी सब्सिडी पर निर्भर न रहे और यूपीआई को आर्थिक रूप से टिकाऊ बनाए.