भोपाल में आवासीय भवनों के कमर्शियल उपयोग पर सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद नगर निगम ने सर्वे शुरू कर दिया है। 15 सितंबर तक ऐसे आवासीय मकान ढूंढे जाएंगे, जहां कारोबार हो रहा है। शुरुआती आकलन में ऐसी 1 लाख प्रॉपर्टी हैं।
भोपाल का 10 नंबर मार्केट। अरेरा कॉलोनी इससे सटकर ही है।
सुप्रीम कोर्ट में भोपाल के जिस इलाके को लेकर आदेश है, भास्कर टीम वहां पहुंची। 10 नंबर मार्केट में प्रवेश करते ही ट्रैफिक जाम मिला। इसके बाद अरेरा कॉलोनी ई-4 में रहवासी लवनीश भाटी से मुलाकात हुई। उन्होंने अपनी परेशानी बताई।
लवनीश ने बताया कि वे साल 1998 से परिवार के साथ यहां रह रहे हैं। पिछले 8-10 सालों में कॉलोनी के अंदर बड़े निर्माण हुए हैं। मॉल और तीन से चार मंजिला इमारतें बन गईं।शराब के बार की तरह चाय बार भी खुल गए हैं, जहां दोपहर 2 बजे से लोगों का जमावड़ा शुरू होकर रात 12 बजे तक रहता है। खुलेआम स्मोकिंग भी होती है, जिससे आसपास के लोगों की सेहत पर असर पड़ रहा है। आवासीय भवनों में कमर्शियल एक्टिविटी होने पर रहवासी सुप्रीम कोर्ट में पहुंचे थे।

कई बार ऐसा लगता है कि जैसे हाईवे हो
लवनीश का कहना है कि पहले दुकानें मेन रोड तक ही थी, लेकिन अब कॉलोनी के अंदर तक खुल गई हैं। सुबह से रात तक ऐसा लगता है कि ये कोई रेसिडेंसियल एरिया नहीं, बल्कि कोई हाईवे हो।गाड़ियों का शोर इतना है कि रहना मुश्किल हो गया है। इनकी वजह से त्योहार तक नहीं मना पाते हैं। दीवाली पर पटाखें कहां फोड़े? यह सोचना पड़ता है। इससे कई लोग घर खाली करके चले गए हैं।
पार्किंग से कई बार घर का गेट खोलना मुश्किल
उन्होंने बताया कि मेरे घर के सामने ही गाड़ियां खड़ी कर दी जाती हैं। कई बार घर का गेट खोलना मुश्किल हो जाता है। मैं ही कई बार अपनी कार 20-30 मीटर दूर लगाता हूं। अरेरा कॉलोनी समेत मुख्य रोड पर ट्रैफिक बाधित होता है।

याचिकाकर्ता बोले- नक्शा घर का, बना लिए मॉल
आवासीय भवनों में व्यावसायिक गतिविधियों और अवैध निर्माण को लेकर रहवासी विवेक त्रिपाठी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई है। इसी याचिका पर कोर्ट ने सरकार और नगर निगम को फटकार लगाई है।
याचिका लगाने की वजह जानने के लिए भास्कर ने विवेक से बात की। उन्होंने क्षेत्र का नक्शा दिखाते हुए कहा कि इसमें बिट्ठन मार्केट में कमर्शियल एक्टिविटी होना बताई गई है। 10 नंबर मार्केट भी दिख रहा है, लेकिन यहां कॉलोनी में ही दुकानें और मॉल खुल गए हैं।उन्होंने बताया कि अरेरा कॉलोनी में प्लॉट इसलिए लिया था, ताकि परिवार शांति और सुकून से रह सके। साल 2015 तक सब ठीक रहा, लेकिन इसके बाद भू-माफिया की नजर पड़ गई। नक्शा घर बनाने के लिए पास होता था, लेकिन मॉल बन गए और कमर्शियल एक्टिविटी होने लगी।
निगम बिना अनुमति के हर निर्माण को तुरंत तोड़ देता है, लेकिन इस मामले में आंखें मूंदे बैठा रहा। कोई कार्रवाई नहीं की गई, जिसका खामियाजा रहवासियों को भुगतना शुरू हो गया। उन्होंने कहा कि यहां मंदिर के सामने ही शराब की दुकान खुल गई, लेकिन उसे बंद नहीं किया गया।इसके बाद सुप्रीम कोर्ट में जाना बेहतर समझा, क्योंकि यह सीधे तौर पर रहवासियों के मौलिक अधिकारों का हनन है। कोर्ट ने भी इसे माना है और सख्त कार्रवाई करने को कहा है।

सुप्रीम आदेश के बाद सर्वे और कार्रवाई की तैयारी
आवासीय भवन में व्यवसायिक गतिविधि चलने के मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चल रही है। 5 अगस्त की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने कार्रवाई जारी रखने के निर्देश दिए। साथ ही मध्य प्रदेश हाईकोर्ट से दुकान संचालकों को मिले सभी अंतरिम राहत आदेश (स्टे) निरस्त कर दिए।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उसके निर्देशों के समानांतर कोई दूसरी जांच प्रक्रिया या समिति कार्रवाई में बाधा नहीं बन सकती। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने राज्य सरकार की ओर से पेश पक्ष पर नाराजगी जताई और कहा कि अवैध निर्माण और रिहाइशी भवनों के व्यावसायिक उपयोग के मामलों में कानून का सख्ती से पालन कराया जाए।इसके बाद नगर निगम ने शहर में व्यापक सर्वे और कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी है। शनिवार से टीमें क्षेत्र में पहुंचने लगी हैं। 15 सितंबर को निगम कोर्ट में अपनी रिपोर्ट देगा। इससे पहले सर्वे पूरा करना है

व्यापारी बोले- 5 लाख लोगों पर असर होगा
इस मामले में भोपाल चैंबर ऑफ कॉमर्स व्यापारियों के समर्थन में है। वह सरकार से जल्द मास्टर प्लान लागू करने या मिक्स लैंड यूज व्यवस्था की मांग कर रहा है।चैंबर के सचिव अजय देवनानी ने बताया कि भोपाल के प्रमुख मार्गों और मुख्य सड़कों पर वर्षों से चल रही व्यावसायिक गतिविधियों को देखते हुए जनहित और शहरी जरूरतों के लिए मिक्स लैंड यूज नीति लागू की जा सकती है।